Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राजनीति

राहुल गांधी का युवा कनेक्ट, डूसू में कांग्रेस का डि-कनेक्ट, अब रणनीति पर उठे सवाल !

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 20, 2026
in राजनीति, राज्य, राष्ट्रीय
A A
Rahul Gandhi's
25
SHARES
841
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

नई दिल्ली (विशेष डेस्क) : कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इन दिनों लगातार छात्रों और युवाओं के बीच पहुंचकर संवाद कर रहे हैं। ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए वह शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक, कोचिंग फीस और युवाओं से जुड़े दूसरे मुद्दों को उठा रहे हैं। लेकिन इसी दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस की छात्र राजनीति और राहुल गांधी की युवा-केंद्रित रणनीति को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आइये एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रकाश मेहरा से समझते हैं।

डूसू चुनाव और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम

इन्हें भी पढ़े

ABVP's dominance in DUSU elections

विश्लेषण : डूसू चुनाव में एबीवीपी का दबदबा, जेन ज़ी के वोट पर क्यों छिड़ी बहस?

September 20, 2026
Dattatreya Hosabale

श्रम साधक मजबूत होंगे तो समाज और भविष्य दोनों मजबूत होंगे : दत्तात्रेय होसबाले

September 20, 2026
next generation missile vessels

समंदर में भारत का नया ब्रह्मास्त्र, स्वदेशी हथियारों से लैस NGMV प्रोजेक्ट पर काम शुरू

September 19, 2026
महिला संवाद में सशक्तिकरण की गूंज

महिला संवाद में सशक्तिकरण की गूंज, गीतों के माध्यम से PM-CM का जताया आभार

September 19, 2026
Load More

19 सितंबर को डूसू चुनाव के घोषित नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार में से तीन केंद्रीय पदों—अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव—पर जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद पर यश डबास, सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह विजयी रहे। उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने जीता। कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI को चारों केंद्रीय पदों में से एक भी पद नहीं मिला। चुनाव में मतदान प्रतिशत 40.46 प्रतिशत रहा।

यह परिणाम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उसी दिन राहुल गांधी मध्य प्रदेश के इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए युवाओं से संवाद कर रहे थे।

छात्रों के बीच राहुल गांधी का संवाद

इंदौर में राहुल गांधी ने ‘सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स’ विषय पर छात्रों से बातचीत की। उन्होंने छात्रों की जिज्ञासा, सवाल पूछने की आदत और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने संस्थाओं में भागीदारी, प्रतियोगी परीक्षाओं और विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया।

राहुल गांधी इससे पहले कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में भी छात्रों के बीच कार्यक्रम कर चुके हैं। इन कार्यक्रमों में अलग-अलग शहरों के स्थानीय छात्र मुद्दों को केंद्र में रखा गया है।

कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं और कोचिंग व्यवस्था, देहरादून में भर्ती परीक्षाओं और कथित अनियमितताओं, प्रयागराज में प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जुड़े सवालों तथा पुणे में छात्राओं से जुड़े मुद्दों पर संवाद किया गया।

राहुल गांधी का फोकस साफ तौर पर युवा मतदाताओं और छात्रों के बीच कांग्रेस की राजनीतिक पहुंच बढ़ाने पर दिखाई देता है। हालांकि, डूसू के नतीजे यह सवाल जरूर खड़ा करते हैं कि छात्रों के बीच संवाद और किसी राजनीतिक दल के छात्र संगठन के चुनावी प्रदर्शन के बीच कितना सीधा संबंध है।

क्या संवाद वोट में बदल रहा है ?

पत्रकार और लेखक प्रकाश मेहरा के मुताबिक राहुल गांधी का छात्रों के बीच जाकर संवाद करना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रयास है, लेकिन केवल संवाद को जनसमर्थन का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। मेहरा कहते हैं, “राहुल गांधी का युवाओं के सामने यह अच्छा प्रदर्शन है, मगर उन्हें जहां सीखने की जरूरत है, वहां वे नहीं सीख रहे हैं। एक तरफ दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में NSUI हार जाती है और दूसरी तरफ युवाओं को पार्टी से जोड़ने की कोशिश हो रही है।”

उनके मुताबिक युवा वर्ग केवल किसी एक राजनीतिक दल के साथ स्थायी रूप से जुड़ा हुआ नहीं है। “जेन ज़ी या युवा इस देश की राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ हैं, मगर उनके आकलन में कांग्रेस भी बहुत सारी चीजों में दोषी है।”डूसू चुनाव का परिणाम भी इसी जटिलता की ओर संकेत करता है। अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 मतों से हराया। वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने 30,615 वोट हासिल कर बड़ी जीत दर्ज की। शौकीन पहले NSUI से जुड़े रहे थे और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े।

इसलिए डूसू का परिणाम केवल ABVP बनाम NSUI की कहानी नहीं है। इसमें निर्दलीय उम्मीदवार की जीत और अलग-अलग छात्र संगठनों के प्रदर्शन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

युवाओं का मूड एकरूप नहीं

प्रकाश मेहरा का मानना है कि “युवा मतदाताओं को किसी एक राजनीतिक खेमे का स्थायी वोट बैंक मानना उचित नहीं होगा। वह कहते हैं, “जेन ज़ी के वोट फिलहाल बंटे हुए हैं और उन्हें अपने पक्ष में करने की गुंजाइश अब भी बनी हुई है। कोई भी राजनीतिक दल इस वोट को अपना मानकर नहीं चल सकता।”

यह बात डूसू के नतीजों में भी दिखाई देती है। जहां ABVP ने तीन केंद्रीय पद जीते, वहीं उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई। इसका अर्थ यह है कि छात्र राजनीति में संगठनात्मक पहचान के साथ-साथ उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे और चुनावी समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राहुल गांधी के सामने बड़ी चुनौती

राहुल गांधी के सामने चुनौती सिर्फ युवाओं से संवाद करने की नहीं, बल्कि उस संवाद को संगठनात्मक समर्थन और राजनीतिक भागीदारी में बदलने की भी है। प्रकाश मेहरा कहते हैं, “राहुल गांधी 2029 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से जो कर रहे हैं, अभी वह पर्याप्त नहीं है। राहुल को राजनीतिक आचरण के तौर-तरीके सीखने होंगे। जनसमर्थन और उसका वोट में तब्दील होना अलग बात है।”

हालांकि, डूसू चुनाव को पूरे देश के युवाओं के राजनीतिक रुझान का अंतिम संकेत मानना भी उचित नहीं होगा। यह दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच हुआ एक विश्वविद्यालय-स्तरीय चुनाव है। हालिया विश्लेषणों में भी इसे राष्ट्रीय स्तर पर पूरे Gen Z का फैसला मानने से सावधान किया गया है।

राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ पहल

इस लिहाज से राहुल गांधी की ‘छात्रों की गूंज’ पहल और डूसू के नतीजे दो अलग-अलग तस्वीरें पेश करते हैं। एक तरफ राहुल गांधी युवाओं के बीच जाकर शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला रहे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस का छात्र संगठन दिल्ली विश्वविद्यालय में अपना खाता भी नहीं खोल सका।

यही अंतर अब कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा सवाल है— क्या छात्रों के बीच संवाद को संगठन और चुनावी समर्थन में बदला जा सकता है? इसका जवाब आने वाले वर्षों में कांग्रेस की युवा रणनीति और उसके जमीनी संगठन के प्रदर्शन से ही स्पष्ट होगा।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Tejashwi Yadav

कांग्रेस को बिहार में खतरा क्यों मानने लगे हैं तेजस्वी यादव?

February 26, 2023
ram mandir

500 वर्षों का इंतजार हुआ खत्म, निर्बल के बल मेरे राम

January 21, 2024
JDS

कर्नाटक चुनाव में किंग बनेगी जेडीएस!

May 10, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • घर बैठे ऐसे करें अपने फेफड़ों को डिटॉक्स, रोज पिएं ये ड्रिंक
  • IMDb पर 9+ रेटिंग वाले 4 क्राइम थ्रिलर शोज, हर एपिसोड में ऐसा ट्विस्ट कि कांप जाएगी रूह
  • राहुल गांधी का युवा कनेक्ट, डूसू में कांग्रेस का डि-कनेक्ट, अब रणनीति पर उठे सवाल !

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.