पटना: बिहार में औद्योगिक विकास को गति देने और निवेशकों को आकर्षित करने की कोशिशों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बेगूसराय को राज्य की औद्योगिक पहचान का प्रमुख केंद्र बताया है। बोधगया स्थित आईटीसी वेलकम होटल में आयोजित बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027 के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विकास वैभव की सराहना की।
उन्होंने कहा कि बेगूसराय में उद्योगों को बढ़ावा मिला है और यह जिला एक तरह से बिहार की इंडस्ट्रियल कैपिटल बन गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में राज्य के दूसरे जिलों में भी औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार होगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गया जिले के डोभी में विकसित हो रहे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में निवेश की संभावनाओं को बढ़ाना और नए उद्योगों की स्थापना के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करना था।
बेगूसराय की औद्योगिक पहचान का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि आईपीएस विकास वैभव मूल रूप से बेगूसराय जिले के रहने वाले हैं। वे बिहार ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में लोगों से संपर्क स्थापित करते हैं और उन्हें बिहार में निवेश के लिए प्रेरित करते हैं। मुख्यमंत्री ने बेगूसराय में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार का उल्लेख करते हुए इसे बिहार की इंडस्ट्रियल कैपिटल बताया।
बेगूसराय लंबे समय से बिहार के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शामिल रहा है। यहां बरौनी रिफाइनरी, उर्वरक उद्योग और अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों की मौजूदगी जिले की आर्थिक गतिविधियों को महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसे में मुख्यमंत्री का बयान जिले की औद्योगिक क्षमता और राज्य में उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं को रेखांकित करता है।
छह साल बाद फील्ड पुलिसिंग में लौटे विकास वैभव
वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी विकास वैभव को मगध रेंज का आईजी बनाए जाने के बाद उन्होंने कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी प्राथमिकताएं सार्वजनिक की थीं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर कहा था कि करीब छह साल बाद वे फील्ड पुलिसिंग में लौटे हैं। गया स्थित मगध रेंज मुख्यालय में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने कानून का राज निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ लागू करने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया था।
विकास वैभव ने पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही पर जोर देते हुए एफआईआर दर्ज नहीं करने, अपराध की धाराओं को कमजोर करने, रिश्वत लेने और एकतरफा कार्रवाई करने जैसी शिकायतों पर सख्त कार्रवाई की बात कही थी। उन्होंने जमीन विवाद, अतिक्रमण, यातायात व्यवस्था, अवैध शराब कारोबार और सड़क जाम जैसी समस्याओं से निपटने पर भी जोर दिया था।
एनआईए में भी कर चुके हैं काम
बेगूसराय निवासी विकास वैभव वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्होंने आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वर्ष 2015 में विधायक अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद भी वे चर्चा में आए थे। इससे पहले वे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) में काम कर चुके हैं। वर्ष 2023 में तत्कालीन डीजी शोभा अहोतकर के साथ विवाद के कारण भी वे सुर्खियों में रहे। इस प्रकरण के बाद उन्हें होमगार्ड एवं फायर सर्विसेज के आईजी पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय भेजा गया था। अब मगध रेंज में फील्ड पुलिसिंग की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनकी भूमिका एक बार फिर चर्चा में है।
डोभी इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में निवेश पर नजर
बिहार बिजनेस कनेक्ट 2027 में देश के विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक निवेशकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य फोकस गया जिले के डोभी में विकसित हो रहे औद्योगिक कॉरिडोर में निवेश की संभावनाओं को बढ़ाना था। सरकार की कोशिश निवेशकों को बिहार में उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करने और औद्योगिक विकास के नए अवसर तैयार करने की है। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलित कर की गई। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
आबादी और आर्थिक विकास की संभावनाओं का जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारत की लगभग 140 करोड़ और बिहार की करीब 14 करोड़ आबादी का उल्लेख किया। उन्होंने देश की आर्थिक प्रगति और बिहार में औद्योगिक विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा की। बिहार और झारखंड के विभाजन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय लगभग 46 प्रतिशत जमीन झारखंड और 54 प्रतिशत बिहार के हिस्से में रही।
मुख्यमंत्री के संबोधन का प्रमुख संदेश राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देना और निवेश के नए अवसर विकसित करना रहा। बेगूसराय को इंडस्ट्रियल कैपिटल बताने वाला उनका बयान राज्य के औद्योगिक विकास में जिले की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। हालांकि, बिहार को व्यापक औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए निवेश को वास्तविक परियोजनाओं, रोजगार और उत्पादन में बदलना अहम चुनौती होगी।







