नई दिल्ली। हिंदू धर्म में करवा चौथ के पर्व का विशेष महत्व होता है। इस त्योहार के दौरान, महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक लगभग एक दिन का उपवास रखती हैं और पति की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए निर्जला व्रत रखकर प्रार्थना करती हैं।
कई बार कुंवारी लड़कियां भी अच्छे जीवनसाथी की कामना में इस व्रत को करती हैं। इस पर्व से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं और नियम हैं जिनका पालन जरूर होता है। इनमें से एक है चांद की पूजा करके व्रत का पारण करना। करवा चौथ के दिन उपवास करने के बाद चंद्रमा के दर्शन और पूजा करने के बाद भी अन्न-जल ग्रहण किया जा सकता है।
इस दिन कई बार चांद बहुत देर से निकलता है, आइए एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा से जानते हैं करवा चौथ के दिन चांद के देरी से निकलने के कारणों के बारे में।
करवा चौथ पर चंद्रोदय में देरी के खगोलीय कारण
एस्ट्रोपत्री के ज्योतिषी चंद्रेश शर्मा बताते हैं कि चंद्रमा की दैनिक गति चंद्रोदय में देरी का कारण है। चंद्रमा पृथ्वी का चक्कर लगाता है और पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। इस वजह से चंद्रमा रोजाना लगभग 50 से 53 मिनट देर से उदित होता है।
यदि हम हिंदू पंचांग की तिथियों की बात करें, तो चंद्रोदय का गणित यह है कि पूर्णिमा के दिन चांद सूर्यास्त के ठीक साथ शाम 05:00 से 05:30 के बीच निकलता है। इसके बाद प्रतिदिन चंद्रोदय के समय में परिवर्तन आता है।
- प्रतिपदा के दिन चंद्रोदय- शाम लगभग 06:00 बजे
- द्वितीया के दिन चंद्रोदय- शाम लगभग 06:50 बजे
- तृतीया के दिन चंद्रोदय- रात लगभग 07:40 बजे
- चतुर्थी यानी करवा चौथ पर चंद्रोदय- रात 08:00 से 08:30 के बीच
क्योंकि करवा चौथ कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को आता है, इसलिए खगोलीय गणना और पंचांग के अनुसार इस दिन चांद का उदय प्राकृतिक रूप से रात 08:00 से 08:30 के बीच या कुछ स्थानों में उसके बाद ही संभव होता है।
करवा चौथ के चांद का मौसम और वातावरणीय प्रभाव
करवा चौथ प्रायः अक्टूबर-नवंबर के महीने में आता है। इस समय वातावरण में हल्की धुंध और कोहरा रहता है। चांद क्षितिज पर उदित तो हो जाता है, लेकिन धुंध और बहुमंजिला इमारतों के कारण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देने में इसे 15 से 20 मिनट का समय और लग जाता है। इसी वजह से करवा चौथ की पूजा के लिए भी महिलाओं को इंतजार करना पड़ता है।
करवा चौथ का चांद देर से निकलने के धार्मिक कारण
आमतौर पर देखा जाता है कि करवा चौथ का चांद आम दिनों की तुलना में देरी से निकलता है, इसके पीछे कुछ धार्मिक कारण हैं। इसका एक मुख्य कारण या है कि धार्मिक रूप से इस व्रत को सुहागिन महिलाओं के धैर्य, समर्पण, प्रेम और कठिन तपस्या का प्रतीक माना जाता है। दिनभर निर्जला व्रत रहने के बाद चांद का देर से निकलना सुहागिन महिलाओं के संयम और पति के प्रति प्रेम की परीक्षा का संकेत होता है।
क्या हैं वैज्ञानिक कारण
करवा चौथ का चांद देर से निकलने का एक मुख्य वैज्ञानिक कारण यह है कि चांद हर एक दिन थोड़ा-थोड़ा करके आसमान में पूर्व दिशा की ओर बढ़ता है। इससे आमतौर पर पिछली रात की तुलना में चंद्रमा के उदय में देरी होती है। चंद्रमा का उदय हर रोज लगभग 50 मिनट देर से होता है।
यही 50 मिनट चंद्रोदय के समय में बढ़ोतरी का मुख्य कारण माने जाते हैं। करवा चौथ शरद पूर्णिमा के 4 दिन बाद मनाया जाता है और यह कार्तिक महीने की चतुर्थी तिथि होती है। इन चार दिनों में चंद्रमा के उदय होने का समय कुल मिलाकर काफी आगे बढ़ चुका होता है। इसका मतलब यह है कि करवा चौथ का चंद्रमा अपने आप ही पूर्णिमा की तुलना में लगभग 200 मिनट देर से उदय होता है।
करवा चौथ का चांद देरी से निकलने के धार्मिक के साथ कई वैज्ञानिक कारण हैं और मुख्य रूप से यह पंचांग की गणना के कारण होता है।






