नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात के 139 वें संस्करण में चंबा की हेंवल नदी के पुनर्जीवीकरण का उल्लेख करते हुए प्रशासन और ग्रामीणों, प्रयासों सराहना की। प्रधानमंत्री ने नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ग्रामीणों और संबंधित विभागों की ओर से किए गए प्रयासों को जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
पहाड़ों में लगातार घटते जलस्रोतों और गर्मियों में गहराते पेयजल संकट के बीच हेंवल नदी की कहानी सामुदायिक सहभागिता की अहमियत को रेखांकित करती है। इस नदी से चंबा शहर से लेकर आसपास के करीब 80 गांव को शुद्ध पीने का पानी मिल रहा है।
पानी रोकने के उपायों की सराहना की
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे यहां प्रकृति के प्रति सम्मान की बहुत पुरानी परंपरा रही है। हमारे पूर्वजों ने हमें सिखाया है कि अपने आस-पास स्वच्छता रखना, जल-स्रोतों की देखभाल करना ये हमारी अपनी जिम्मेदारी है। मुझे खुशी होती है, जब मैं देखता हूं कि देश के कितने ही लोग इसी भावना को अपना जीवन बनाए हुए हैं। यही भाव उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के चंबा में भी देखने को मिलता है।
यहां लोगों ने मिलकर एक नदी को नया जीवन देने का प्रयास किया है| ये नदी है ‘हेंवल’। कुछ समय पहले हेंवल नदी में पानी कम होने लगा था। आस-पास के प्राकृतिक जल-स्रोत भी सूख रहे थे। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और गांव के लोगों ने मिलकर हेंवल नदी को बचाने का अभियान चलाया। इस दौरान बारिश का पानी रोकने के उपाय हुए, जमीन में पानी पहुंचाने के लिए काम हुआ और बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए। आज इस प्रयास से हेंवल नदी को नया जीवनदान मिला है और साथ ही दर्जनों प्राकृतिक जल-स्रोतों के पुनर्जीवन में भी मदद मिली है।







