नई दिल्ली। दिल्ली में अब फ्लाईओवरों के नीचे खाली पड़ी जगहें सिर्फ पार्किंग या कचरा जमा होने तक सीमित नहीं रहेंगी. लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) इन उपेक्षित स्थानों को अलग-अलग थीम पर विकसित कर सार्वजनिक आकर्षण का केंद्र बनाने की तैयारी में है. इसके लिए बड़ी कंपनियों को कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के जरिए इन जगहों को गोद दिया जा रहा है.
चिराग दिल्ली से लेकर आईआईटी दिल्ली तक फ्लाईओवरों के नीचे प्रकृति, विज्ञान, योग और भारतीय शास्त्रीय नृत्य से जुड़ी थीम पर काम चल रहा है. पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने गुरुवार को चिराग दिल्ली और आईआईटी दिल्ली फ्लाईओवर का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने मौके पर चल रहे सौंदर्यीकरण के कार्यों का जायजा लिया. विभाग की योजना इन स्थानों को सिर्फ खूबसूरत बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हर फ्लाईओवर को उसकी जगह और आसपास के माहौल के अनुरूप एक अलग पहचान देना भी है.
इंडियन ऑयल संभालेगा छह स्थानों की जिम्मेदारी
पीडब्ल्यूडी के मुताबिक, 10 दिसंबर 2025 को हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने दिल्ली के पांच फ्लाईओवर और अरबिंदो मार्ग के एक हिस्से को गोद लिया है. कंपनी इन सभी स्थानों का अगले तीन साल तक रखरखाव करेगी. इनमें चिराग दिल्ली, पंचशील, आईआईटी दिल्ली, पंजाबी बाग और मुकरबा चौक फ्लाईओवर शामिल हैं.
इनके अलावा अरबिंदो मार्ग के एक हिस्से को भी योजना में शामिल किया गया है. हर जगह एक जैसी सजावट करने के बजाय कंपनी ने संबंधित स्थानों का अध्ययन कर अलग-अलग थीम चुनी हैं. इससे इन स्थानों को एक ही तरह के सौंदर्यीकरण से अलग रखा जाएगा.
छह जगह, छह अलग पहचान
योजना के तहत फ्लाईओवरों के नीचे विकसित होने वाले स्थानों की थीम इस प्रकार तय की गई है-
- चिराग दिल्ली फ्लाईओवर: प्रकृति एवं वन्यजीव थीम.
- आईआईटी दिल्ली फ्लाईओवर: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी.
- पंजाबी बाग फ्लाईओवर: योगशाला.
- मुकरबा चौक फ्लाईओवर: इंटर ट्रांजिट हब.
- अरबिंदो मार्ग: जीवंत और रंग-बिरंगी सार्वजनिक जगह.
- पंचशील फ्लाईओवर: आधुनिक कला के जरिए भारतीय शास्त्रीय नृत्य की झलक.
दक्षिण दिल्ली के व्यस्त चौराहों में शामिल चिराग दिल्ली में खास तौर पर प्रकृति और वन्यजीवों को केंद्र में रखा जा रहा है. यहां फ्लाईओवर के नीचे की जगह को हरे-भरे हिस्से के रूप में विकसित किया जा रहा है. दीवारों पर बनने वाली कलाकृतियों में देश के पक्षियों, जानवरों और पेड़-पौधों को दर्शाया जाएगा. शहरी भीड़भाड़ के बीच यह स्थान प्रकृति की झलक पेश करेगा. वहीं, आईआईटी दिल्ली, फ्लाईओवर के नीचे विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़ी थीम देखने को मिलेगी, जबकि पंचशील में भारतीय शास्त्रीय नृत्य को आधुनिक कला के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा.
सीएसआर फंड से हो रहा सौंदर्यीकरण
मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि, उनकी सरकार बनने के बाद से ही बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी कर फ्लाईओवरों के नीचे की जगहों को विकसित करने का काम किया जा रहा है. इन परियोजनाओं के लिए कंपनियों के सीएसआर फंड का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस व्यवस्था में कंपनियां जगहों को गोद लेकर उनके सौंदर्यीकरण और रखरखाव की जिम्मेदारी उठाएंगी. फिलहाल इंडियन ऑयल को सौंपे गए छह स्थानों के लिए तीन साल की रखरखाव अवधि तय की गई है.
फ्लाईओवरों के नीचे बनेंगे करीब 400 पुलिस बूथ
सौंदर्यीकरण के साथ पीडब्ल्यूडी ने फ्लाईओवरों के नीचे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की भी योजना बनाई है. विभाग अपने बजट से शहरभर में करीब 400 पुलिस बूथ तैयार कर रहा है. मंत्री के मुताबिक, इन बूथों के बनने से खाली पड़ी जगहों का इस्तेमाल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए हो सकेगा. खासकर व्यस्त चौराहों और सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि व्यस्त चौराहों पर पुलिस बूथ होने से लोगों में सुरक्षा का एहसास बढ़ता है. साथ ही जरूरत पड़ने पर पुलिस की पहुंच भी तेज हो सकती है.







