प्रकाश मेहरा
एक्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली। SIR को लेकर देशभर में जारी राजनीतिक घमासान के बीच मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शनों की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी क्रम में दिल्ली में कनॉट प्लेस से लेकर रामलीला मैदान तक प्रदर्शन और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर हलचल बढ़ गई है। विपक्ष की ओर से आगामी 1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली आयोजित करने की घोषणा के बाद राजधानी के व्यापारियों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
व्यापारियों का आरोप है कि राजनीतिक दलों के विरोध-प्रदर्शनों के कारण बाजारों में कारोबार प्रभावित होता है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इस मुद्दे पर व्यापारी नेता परमजीत पम्मा ने भी चिंता जताते हुए प्रदर्शन के संभावित प्रभावों को लेकर अपनी नाराजगी और चेतावनी जाहिर की है।
प्रदर्शनों से कारोबार प्रभावित होने का आरोप
व्यापारियों के मुताबिक, हाल के दिनों में कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक संगठनों की ओर से दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में किए गए प्रदर्शनों के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। उनका दावा है कि इन प्रदर्शनों से व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। अब 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित महारैली को लेकर उनकी चिंता और बढ़ गई है।
विपक्ष की ओर से इस महारैली में करीब 10 लाख लोगों के पहुंचने का दावा किए जाने की चर्चा है। वहीं, रामलीला मैदान की क्षमता लगभग 50 हजार लोगों की बताई जा रही है। ऐसे में व्यापारियों ने भीड़ प्रबंधन, यातायात और आसपास के बाजारों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर सवाल उठाए हैं।
राहुल गांधी से प्रदर्शन रद्द करने की मांग
सदर बाजार के व्यापारियों ने इस प्रस्तावित महारैली पर नाराजगी जाहिर करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से प्रदर्शन रद्द करने की मांग की है। व्यापारियों का कहना है कि लगातार होने वाले प्रदर्शनों के कारण उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है और आर्थिक नुकसान की भरपाई करना मुश्किल हो जाता है।
व्यापारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 1 नवंबर को यह प्रदर्शन आयोजित किया जाता है, तो इसका असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ सकता है और उन्हें एक बार फिर भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। उनका कहना है कि राजनीतिक दलों को विरोध दर्ज कराने के साथ-साथ व्यापारियों की आजीविका और आम जनता की परेशानियों का भी ध्यान रखना चाहिए।
सिख समुदाय के जख्मों का मुद्दा भी उठा
व्यापारियों की नाराजगी के बीच 1 नवंबर की तारीख को लेकर सिख समुदाय की भावनाओं का मुद्दा भी उठाया गया है। कुछ व्यापारियों ने आरोप लगाया कि इस तारीख पर राजनीतिक आयोजन से समुदाय के पुराने जख्म फिर ताजा हो सकते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर समुदाय की भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता बरतने की मांग करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को ऐसे विषयों पर सावधानी से कदम उठाना चाहिए।
फिलहाल, 1 नवंबर को प्रस्तावित महारैली को लेकर राजनीतिक सरगर्मी के साथ-साथ व्यापारिक हलकों में भी चर्चा तेज है। एक ओर विपक्ष SIR के मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद करने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर व्यापारी संगठनों की चिंता कारोबार, यातायात और संभावित आर्थिक नुकसान को लेकर बनी हुई है। अब देखना होगा कि इस विरोध और व्यापारियों की मांग के बीच राजनीतिक दल क्या रुख अपनाते हैं।







