Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home विशेष

तेल के खेल में नया खेला!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 11, 2022
in विशेष
A A
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

अजीत द्विवेदी

तेल में बड़ा खेल हो रहा है। किसी का ध्यान इस तरफ नहीं है तो उसका कारण यह है कि छह अप्रैल यानी भाजपा के स्थापना दिवस के बाद से पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं। उलटे दोनों ईंधनों के दाम में कमी आ गई है। चूंकि भारत में ज्यादातर लोगों को पेट्रोल-डीजल से इतना ही सरोकार होता है कि इनकी कीमत बढ़ रही है, घट रही है या स्थिर है। कीमत बढ़ नहीं रही है और मई में एक बार उत्पाद शुल्क में कटौती की वजह से पेट्रोल साढ़े नौ रुपए और डीजल सात रुपए प्रति लीटर सस्ता हुआ। सो, इसके बाद अब क्या चाहिए? यूक्रेन और रूस की लड़ाई चल रही है, तेल उत्पादन और निर्यात करने वाले देश उत्पादन नहीं बढ़ा रहे हैं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं फिर भी भारत में तेल महंगा नहीं हो रहा है तो सब संतुष्ट हैं। उन्हें पता नहीं है कि तेल के खुदरा कारोबार और खुदरा कीमत से इतर भी तेल का बड़ा खेल है।

इन्हें भी पढ़े

Jhandewala Devi Temple

झण्डेवाला देवी मंदिर में बप्पा को भावभीनी विदाई, विसर्जन में सम्मिलित हुए भक्तगण

September 25, 2026
Five-day elephant festival

बांधवगढ़ में हाथियों का पांच दिवसीय महोत्सव शुरू, नहाने-मालिश के साथ मिलेगा पसंदीदा खाना

September 25, 2026
election

विश्लेषण: चुनाव आयोग के भीतर 14 बार आपत्ति, SIR, वोटर लिस्ट और ECINet को लेकर क्या सामने आया?

September 24, 2026
WCL

स्वच्छता ही सेवा-2026 एवं स्पेशल कैंपेन-6 के तहत वेकोलि ने आयोजित की सामुदायिक गतिविधियां

September 24, 2026
Load More

तेल का यह खेल उलझ गया है और उसके साथ साथ सरकार भी उलझ गई है। सरकार तो अपनी मजबूरी में तेल की कीमतें नहीं बढ़ा रही है। पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम पहले ही आसमान पर पहुंचे हुए हैं और अगले कुछ दिन में दो राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। तभी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अप्रैल से अभी तक कच्चे तेल की कीमत में 15 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी के बावजूद भारत में कीमतें स्थिर रखी गई हैं। इससे सरकारी पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों का मुनाफा कम हो रहा है। इसके बावजूद उनकी मजबूरी है, जो वे पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध करा रहे हैं। पर ऐसी कोई मजबूरी निजी कंपनियों की नहीं है।

सो, उन्होंने मुनाफा कम होते ही तेल की आपूर्ति घटा दी। इसका नतीजा यह हुआ कि देश के कई हिस्सों में पेट्रोल पंपों पर सूखा पड़ गया। जून में दो-तीन हफ्ते तक कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल की किल्लत रही क्योंकि कंपनियों ने आपूर्ति कम कर दी थी। कई राज्यों में ऐसी स्थिति पैदा हुई। एक रिपोर्ट के मुताबिक कई दिन तक औसतन चार सौ पेट्रोल पंप बंद रहे।
ऐसा नहीं है कि सिर्फ निजी कंपनियों के पेट्रोल पंप बंद हुए सरकारी कंपनियों ने भी आपूर्ति घटाई। पिछले महीने के आखिरी हफ्ते में एक दिन हिंदुस्तान पेट्रोलियम के सवा दो सौ पेट्रोल पंप तेल नहीं होने की वजह से बंद रहे। सबसे बड़ी तेल मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल के भी 130 पेट्रोल पंप बंद रहे और भारत पेट्रोलियम के 50 से ज्यादा पंप तेल की कमी से बंद रहे। इसके बावजूद तेल मार्केटिंग कंपनियां इससे इनकार करती रही कि कहीं तेल की कमी हो रही है। असल में पिछले करीब दो-तीन महीने से सरकारी और निजी दोनों पेट्रोलियम कंपनियां माहौल बना रही हैं कि कच्चे तेल की कीमत बढऩे से उनको खुदरा कारोबार में नुकसान हो रहा है। उनके माहौल बनाने के बावजूद सरकार कीमतों में बढ़ोतरी करने की इजाजत नहीं दे रही है। ध्यान रहे भारत में 82 हजार के करीब पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से सात हजार से कुछ ज्यादा निजी कंपनियों के हैं। इनमें से ज्यादातर पर आपूर्ति कम हो गई है या बंद हो गई है।

 

सोचें, सरकार बरसों से यह कथा सुनाती रही है कि तेल की कीमतें बाजार के हिसाब से कंपनियां खुद तय करती हैं फिर जब कंपनियों को नुकसान हो रहा है तो वे कीमत क्यों नहीं बढ़ा रही हैं? कीमत बढ़ाने की बजाय वे आपूर्ति कम कर रही हैं। ऊपर से उनका तर्क है कि पिछले साल के मुकाबले तेल की मांग 50 फीसदी बढ़ गई है। सवाल है कि क्या उनको पता नहीं है कि पिछले साल कोरोना की वजह से लॉकडाउन में तेल की खपत कम हो गई थी तो इस साल उसे अनिवार्य रूप से बढऩा था? खुद सरकार ने जून के मध्य में माना कि कुछ राज्यों खास कर मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक आदि में पेट्रोलियम उत्पादों की कमी हुई और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सवाल है कि जब पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल आयात हो रहा है तो फिर तेल मार्केटिंग कंपनियां खुदरा आपूर्ति में कमी कैसे कर सकती हैं?

यहीं पर तेल कंपनियों का खेल चल रहा है। भारत में इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम के अलावा दो निजी कंपनियां नयारा एनर्जी और रिलांयस पेट्रोलियम तेल की मार्केटिंग करती हैं। तीनों सरकारी कंपनियों की तो मजबूरी है कि अगर सरकार कीमत नहीं बढ़ाने दे रही है तब भी वे आपूर्ति सुनिश्चित करें। लेकिन निजी कंपनियों की ऐसी कोई मजबूरी नहीं है। इसलिए उन्होंने अपने पेट्रोल पंप पर आपूर्ति घटा दी और निर्यात बढ़ा दिया। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस पर लगी पाबंदियों का सबसे बड़ा फायदा भारत की निजी रिफाइनरी और मार्केटिंग कंपनियों ने उठाया है। उनको रूस से बेहद सस्ते दाम पर कच्चा तेल मिल रहा है और वे रिफाइन करके यूरोप के उन्हीं देशों में बेच रही हैं, जो पाबंदियों की वजह से सीधे रूस से तेल नहीं खरीद रहे हैं। इससे तेल कंपनियों ने छप्पर फाड़ मुनाफा कमाया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पिछले महीने यानी जून में हर दिन औसत 12 लाख बैरल तेल रूस से खरीदा गया है। इस लिहाज से भारत के लिए रूस कच्चे तेल का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता हो गया है- सऊदी अरब और इराक से भी बड़ा!

अब जाकर भारत सरकार की नींद खुली है तो उसने निजी कंपनियों की छप्पर फाड़ कमाई पर अतिरिक्त टैक्स लगाया है। सरकार ने पेट्रोल और विमान ईंधन के निर्यात पर प्रति लीटर छह  रुपए और डीजल पर 13 रुपए प्रति लीटर का अतिरिक्त शुल्क लगाया है। साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि रिफाइनरी कंपनियां एक टन निर्यात पर आधा टन ईंधन घरेलू जरूरत के लिए उपलब्ध कराएं। इसके अलावा कच्चे तेल के घरेलू उत्पादन पर भी प्रति टन 23,250 रुपए का उपकर लगाया गया है। सरकार को इस तरह के कदम पहले उठाने चाहिए थे और यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि निजी कंपनियां भले मुनाफा कमाएं पर घरेलू ग्राहकों के लिए मुश्किल पैदा नहीं करें। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा हो रहा है तो दूसरी ओर घरेलू मांग बढ़ रही है और सरकार तेल कंपनियों को कीमत नहीं बढ़ाने दे रही है। इनके बीच सरकारी और निजी कंपनियां अपने नुकसान का हवाला देकर घरेलू आपूर्ति घटा रही हैं, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। सरकार को इस पर नजर रखनी होगी।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
पालीताना शहर

भारत में है दुनिया का पहला शाकाहारी शहर, जानिए यहां क्यों बैन है मीट

September 15, 2022
shahbaz sharif

ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान में खलबली, शहबाज शरीफ की उड़ी नींद !

May 7, 2025
Congress's 'toy' taunt on the Rafale deal

रफ़ाल पर घमासान कांग्रेस का ‘खिलौना’ तंज, बीजेपी का ‘सेना अपमान’ का जवाबी हमला !

May 5, 2025
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • झण्डेवाला देवी मंदिर में बप्पा को भावभीनी विदाई, विसर्जन में सम्मिलित हुए भक्तगण
  • UPI पर 2000 का नियम और डेली लिमिट, दोनों में क्या है बड़ा अंतर?
  • भारत-वेस्टइंडीज के बीच होंगे 8 मैच, रोहित-विराट खेलेंगे सिर्फ 3 मैच

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.