Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home विशेष

राष्ट्रपति एक वर्ग नहीं पूरे देश का गौरव  हैं

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
July 25, 2022
in विशेष
A A
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

भूपेन्द्र गुप्ता

देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू का चुनाव कई तरह से चर्चा में बना हुआ है। पहले तो एन.डी.ए. ने उन्हें एक आदिवासी उम्मीदवार के रूप में बहु प्रचारित करने की रणनीति बनाई जबकि पूर्व में भी पी.ए. संगमा और अल्फ्रेड स्वेल आदिवासी समाज से राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ चुके थे।

इन्हें भी पढ़े

डॉ. हेमंत शरद पांडे

आईएमआरसी 2026 में विश्व विजेता बनी वेकोलि माइन्स रेस्क्यू टीम का भव्य स्वागत एवं सम्मान

May 11, 2026
PM modi

ब्लूमबर्ग रिपोर्ट: 2030 के बाद भी सत्ता में रह सकते हैं पीएम मोदी, भाजपा के पक्ष में बन रहा माहौल !

May 11, 2026
Rashtriya Swayamsevak Sangh

स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को मीडिया ने सबसे अधिक भ्रामक रूप में प्रस्तुत किया: प्रखर श्रीवास्तव

May 11, 2026
BJP and TMC

पश्चिम बंगाल : नए सीएम की शपथ पर फंसेगा पेंच? इस्तीफे से इनकार पर बढ़ी सियासी हलचल

May 5, 2026
Load More

सामान्यत: राष्ट्रपति का पद उनके व्यक्तित्व, समाज में उनके योगदान और उनकी निर्विवाद सेवाओं को लेकर जाने जाते हैं ।जाति के आधार पर कभी भी न तो राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को  प्रचारित किया गया ना ही इस आधार पर उन्हें महिमामंडित करने की कोशिश की गई । वे देश के संविधान के सबसे बड़े रक्षक के रूप में ही चुने जाते हैं। देश तो हर जाति, हर धर्म और हर समाज का है, इसलिये वे भारत के हर नागरिक के पालक के रूप में ही जाने जाते हैं ।अगर कोई राजनीतिक दल ऐसे पदों को एक जाति की सीमाओं में बांधने की चेष्टा करते हैं तो क्या इसे राष्ट्रपति पद की गरिमा को क्षति पहुंचाना नहीं माना जाना चाहिए? क्या हमने बाबू राजेंद्र प्रसाद को इसलिए राष्ट्रपति चुना कि वे कायस्थ थे  या के. आर. नारायणन दलित, एपीजे अब्दुल कलाम अल्पसंख्यक या प्रणव मुखर्जी ब्राह्मण थे, शायद नहीं। यह सब अपने अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ व्यक्ति थे। देश के प्रति इनकी सेवाएं उत्कृष्ट थी । इन्हीं उत्कृष्ट सेवाओं के लिए हमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी याद करना चाहिए ना कि उनके जाति वर्ग के कारण ।वे अब एक वर्ग की नहीं बल्कि पूरे भारत का गौरव हैं ।

देश में विभिन्न अवसरों पर हुए राष्ट्रपति पद के  हर चुनाव किसी न किसी कारण से चर्चित रहे है। 1969 का चुनाव त्रिकोणी होने के कारण सबसे कम मतों से जीतने वाला चुनाव बना इसमें इंदिरा गांधी द्वारा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में वीवी गिरी को 48 प्रतिशत वोट मिले थे और वह अपने निकटतम प्रतिद्वंदी नीलम संजीव रेड्डी से लगभग 90 हजार मतों से ही चुनाव जीत सके थे। यह पहला चुनाव था जब अंतरात्मा की आवाज पर वोट डालने का आव्हान किया गया था और एक श्रमिक नेता वी वी गिरी राष्ट्रपति चुने गये।
देश में सर्वाधिक मतों से चुनाव जीतने वाले राष्ट्रपति के रूप में के.आर. नारायणन का चुनाव सबसे चर्चित रहा है। इसमें नारायणन ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी टी.एन. सेशन को लगभग 9 लाख 5 हजार मतों से परास्त किया था ।मत प्रतिशत के हिसाब से बाबू राजेंद्र प्रसाद एक मात्र राष्ट्रपति रहे जिन्हें कुल मतों का 99 प्रतिशत मत प्राप्त हुए ,दूसरे नंबर पर एस. राधाकृष्णन जिन्हें 98 प्रतिशत, के.आर. नारायणन जिन्हें 95 प्रतिशत और एपीजे अब्दुल कलाम जिन्हें 90 प्रतिशत मत प्राप्त हुए थे ।

अगर भारतीय जनता पार्टी के द्वारा बनाये गये एनडीए उम्मीदवारों के मतों की तुलना करें तो श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को अपने ही पार्टी के पूर्व राष्ट्रपति कोविद के मुकाबले 2 प्रतिशत कम वोट  प्राप्त हुए हैं। श्री कोविंद को कुल मतों का 66 प्रतिशत जबकि श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को 64 प्रतिशत मत प्राप्त हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव को एक और दृष्टि से चर्चित बनाने की चेष्टा की है वह है प्रतिपक्ष की क्रास वोटिंग को लेकर । जबकि राष्ट्रपति पद के कई चुनाव में क्रास वोटिंग  होती रही है। स्वयं भारतीय जनता पार्टी शिवसेना और अन्य दल भी समय-समय पर क्रास वोटिंग कर चुके हैं।

श्रीमती पाटिल के चुनाव में  शिवसेना ने गठबंधन की सीमाओं से बाहर आकर पाटिल के पक्ष में मतदान किया था। हालांकि इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता भैरों सिंह शेखावत चुनाव लड़ रहे थे लेकिन इसके बावजूद गुजरात में 5 विधायकों ने प्रतिभा पाटिल के पक्ष में क्रास वोटिंग की थी। इसी तरह 2012 में जब प्रणव मुखर्जी के विरुद्ध पी.ए. संगमा एनडीए के उम्मीदवार थे तब कर्नाटक में 14 विधायकों ने मुखर्जी के पक्ष में क्रास वोटिंग की थी। इसी तरह 2017 में मीरा कुमार ने श्री कोविद के विरुद्ध प्रतिपक्ष  यूपीए के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में भी एनडीए के उम्मीदवार कोविद के विरुद्ध गुजरात के एक, गोवा के 3 और राजस्थान के 6 विधायकों ने मीरा कुमार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी ।

इसी तरह 2002 में एपीजे अब्दुल कलाम सर्व सम्मत उम्मीदवार के रूप में सामने आये थे किंतु वामपंथी पार्टियों ने क्रांतिकारी और आजाद हिंद फौज की महिला कमांडर  लक्ष्मी सहगल को उनके विरुद्ध उतार दिया था। इस चुनाव में मध्यप्रदेश के 11 मत रद्द हुये थे और 2 मत क्रास वोट हुये थे।चूंकि राष्ट्रपति पद का चुनाव गुप्त मतदान के माध्यम से किया जाता है एवं इस चुनाव में कोई भी दल व्हिप जारी नहीं करता है इसलिए क्रास वोटिंग का मामला पार्टी अनुशासन के दायरे में नहीं आता है ।ऐसा इसलिए भी सोचा गया होगा ताकि राष्ट्रपति पद का चुनाव निर्विवाद रहे और उसे पार्टी की सीमाओं में ना बांधा जाए।

1977 का राष्ट्रपति पद का चुनाव भी कम चर्चित नहीं रहा यह चुनाव तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन की मृत्यू के कारण बचे हुए कार्यकाल के लिये हुआ था।  हालांकि यह पूर्णकालिक चुनाव तो नहीं था किंतु इस चुनाव में 37 उम्मीदवारों ने अपने पर्चे दाखिल किए थे और 36 उम्मीदवारों के नामांकन रद्द हो जाने के कारण नीलम संजीव रेड्डी निर्विरोध राष्ट्रपति के रूप में चुने गए ।वे देश के ऐसे एकमात्र राष्ट्रपति थे।इसी तरह बाबू राजेंद्र प्रसाद दो बार राष्ट्रपति पद को सुशोभित करने करने वाले एकमात्र राष्ट्रपति रहे।
महामहिम द्रोपदी मुरमू अब देश की शोभा हैं,उनके संघर्ष और जिजीविशा को याद रखने का यह समय है न कि उनकी जाति को।
(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
new parliament

नए संसद भवन में और क्या है खास?

May 28, 2023
British

अंग्रेजों के शासन काल में हुए भारतीय संस्कृति विरुद्ध गढ़े जा रहे है झूठे विमर्श

October 24, 2024
Harish rawat

हरीश रावत ने दिल्ली एनसीआर के चिन्हिकरण से वंचित आंदोलनकारी के लिए उपवास किया

November 2, 2024
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • ईंधन बचत के लिए पीएम मोदी का बड़ा कदम, काफिले में नजर आईं महज दो गाड़ियां
  • अक्षय कुमार ने जंगल में बिखेरा अपना स्वैग, अगली फिल्म का जबरदस्त लुक हुआ रिवील
  • नीट यूजी पेपर लीक का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, NTA को बदलने की मांग

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.