प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली | अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्था ब्लूमबर्ग की एक नई रिपोर्ट ने भारतीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट का शीर्षक है- “Resurgent Modi Paves Way to Keep Power in India Well Beyond 2030”। इस विश्लेषण में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2030 के बाद भी देश की सत्ता में बने रह सकते हैं और 2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के फिर से बहुमत हासिल करने की संभावना मजबूत दिखाई दे रही है।
2024 में लगा था झटका, लेकिन 2026 ने बदली तस्वीर
रिपोर्ट के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अकेले पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। विपक्षी दलों, खासकर जाति आधारित पार्टियों ने कई हिंदू-बहुल क्षेत्रों में भाजपा को चुनौती दी थी। उस समय कई राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे “मोदी युग के कमजोर पड़ने” की शुरुआत माना था।
लेकिन 2026 के राज्य चुनावों ने पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल दी। सबसे बड़ा बदलाव पश्चिम बंगाल में देखने को मिला, जहां भाजपा ने महज 3 सीटों से छलांग लगाकर 207 सीटें जीत लीं और दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया। वहीं तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में भी सत्ताधारी दलों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। इससे भाजपा का प्रभाव उत्तर भारत से निकलकर दक्षिण और पूर्व भारत तक तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है।
हिंदू वोटों के एकीकरण पर भाजपा की रणनीति
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट का सबसे अहम निष्कर्ष यह है कि भाजपा लगातार हिंदू वोटों के बड़े हिस्से को एकजुट करने में सफल होती दिख रही है। भारत की लगभग 80 प्रतिशत आबादी हिंदू है और भाजपा इसी सामाजिक समीकरण को अपनी सबसे बड़ी ताकत मान रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम बहुल इलाकों में विपक्षी वोटों का बंटवारा भाजपा को अप्रत्यक्ष लाभ पहुंचा रहा है। वहीं हिंदू-बहुल क्षेत्रों में भाजपा लगातार मजबूत होती जा रही है।
किन मुद्दों पर आगे बढ़ रही भाजपा ?
रिपोर्ट में भाजपा की चुनावी रणनीति को विस्तार से समझाया गया है। इसमें मुख्य रूप से धार्मिक पहचान की राजनीति। राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा। गरीब और मध्यम वर्ग के लिए कल्याणकारी योजनाएं। महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार व नकद सहायता। कानून-व्यवस्था को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाना।
जैसे बिंदुओं को भाजपा की “सफल चुनावी प्लेबुक” बताया गया है। इसके अलावा विपक्ष पर “अल्पसंख्यक तुष्टिकरण” के आरोपों को भी भाजपा की रणनीति का हिस्सा माना गया है। रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए यह दावा किया गया कि “मतदाता सूचियों में बड़े स्तर पर बदलाव हुए और लगभग 90 लाख नाम हटाए गए। हालांकि इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद भी जारी है और विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है।
रिसर्च किस आधार पर ?
ब्लूमबर्ग ने अपने विश्लेषण के लिए विधानसभा स्तर के चुनावी आंकड़ों का अध्ययन किया है। इसमें London School of Economics के प्रोफेसर Rafael Cohen Susewind के शोध का हवाला दिया गया है, जिसमें मतदाता सूचियों में नामों के आधार पर धार्मिक संरचना का अनुमान लगाने की पद्धति का उपयोग किया गया।
2029 में भाजपा सबसे मजबूत दावेदार ?
रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में भाजपा 2029 के लोकसभा चुनाव की सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभर रही है। कई राज्यों में भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकार होने से पार्टी का संगठनात्मक ढांचा भी मजबूत हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि “यदि यही राजनीतिक रुझान जारी रहे तो भाजपा “यूनिफॉर्म सिविल कोड। एक देश, एक चुनाव। संसद विस्तार। बड़े आर्थिक सुधार। जैसे एजेंडों को और तेजी से आगे बढ़ा सकती है।
क्या कहते है राजनीतिक विश्लेषक
राजनीतिक विश्लेषक माइकल कुगल्मैन का कहना है कि भाजपा 2029 में लगातार चौथी बार सत्ता में आने की प्रबल दावेदार है। वहीं भाजपा नेताओं का दावा है कि पार्टी दक्षिण भारत में तेजी से विस्तार कर रही है और हिंदू वोटों का बड़ा एकीकरण हो रहा है। हालांकि विपक्षी दलों और आलोचकों का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन विपक्ष के बिखराव के कारण भाजपा को फिलहाल बड़ी चुनौती मिलती नहीं दिख रही।
अर्थव्यवस्था और राजनीति पर असर
रिपोर्ट के अनुसार, यदि भाजपा लंबे समय तक सत्ता में बनी रहती है तो ‘विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिल सकता है। विदेशी निवेश में तेजी आ सकती है। Apple जैसी वैश्विक कंपनियों का भारत में विस्तार बढ़ सकता है। “विकसित भारत 2047” मिशन को गति मिल सकती है। हालांकि दूसरी तरफ राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर हिंदुत्व बनाम धर्मनिरपेक्षता की बहस और तेज होने की संभावना भी जताई गई है।
ब्लूमबर्ग की यह रिपोर्ट भारतीय राजनीति में भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मजबूत होती स्थिति की ओर संकेत करती है। हालांकि अंतिम फैसला जनता के वोट से ही तय होगा और आने वाले चुनावों में स्थानीय मुद्दे, गठबंधन, बेरोजगारी, महंगाई और सामाजिक समीकरण भी बड़ी भूमिका निभाएंगे।







