प्रकाश मेहरा
स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की प्रचंड जीत और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की हार के बीच मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के ऐलान ने नई बहस छेड़ दी है। चुनाव परिणामों के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने हार के लिए बीजेपी और चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी। इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इससे नई सरकार के शपथ ग्रहण पर कोई असर पड़ेगा।”
संवैधानिक स्थिति क्या कहती है ?
विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी राज्य में नई सरकार के गठन के लिए मौजूदा मुख्यमंत्री का इस्तीफा देना एक स्थापित परंपरा है, लेकिन यह पूरी तरह अनिवार्य बाधा नहीं है। संविधान के तहत राज्यपाल के पास यह अधिकार होता है कि वे बहुमत हासिल करने वाले दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करें।
यदि वर्तमान सरकार बहुमत खो चुकी है, तो राज्यपाल उनसे सदन में बहुमत साबित करने को कह सकते हैं। असफल रहने पर मुख्यमंत्री को पद छोड़ना पड़ता है।
क्या शपथ ग्रहण रुक सकता है ?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “शपथ ग्रहण पूरी तरह रुकना मुश्किल है। हालांकि, मौजूदा हालात में कुछ समय के लिए प्रक्रिया में देरी जरूर हो सकती है। राज्यपाल की भूमिका यहां निर्णायक होगी, जो संवैधानिक दायरे में रहकर अगला कदम तय करेंगे।
बीजेपी और टीएमसी के बीच टकराव
ममता बनर्जी का यह रुख साफ तौर पर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश माना जा रहा है। इससे राज्य में बीजेपी और टीएमसी के बीच टकराव और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर यदि राज्यपाल इस पर कोई सख्त कदम उठाते हैं।फिलहाल सभी की निगाहें राज्यपाल के अगले कदम पर टिकी हैं। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नई सरकार का गठन होना तय माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक खींचतान के चलते यह प्रक्रिया कितनी सहज रहती है, यह देखने वाली बात होगी।






