नई दिल्ली। पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होगी. इस दिन मां दुर्गा के भक्त घटस्थापना कर नौ दिनों तक उनकी पूजा-अर्चना करेंगे. नवरात्रि के पहले दिन धार्मिक महत्व के साथ-साथ ग्रहों की चाल भी ज्योतिष के लिहाज से चर्चा में रहेगी. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन चंद्रमा कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे. तुला राशि में बुध और शुक्र पहले से मौजूद होंगे.
ऐसे में यहां तीनों ग्रहों की युति से त्रिग्रही योग बनेगा. ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना जाता है. बुध को बुद्धि, संवाद, व्यापार और तर्क क्षमता से जोड़ा जाता है, जबकि शुक्र सुख-सुविधाओं, प्रेम, कला और भौतिक सुखों के कारक माने जाते हैं. ऐसे में इन तीनों ग्रहों का एक राशि में होना 3 राशि वालों के लिए नए बदलाव लेकर आ रहा है.
तुला राशि में बनेगी तीन ग्रहों की युति
11 अक्टूबर को चंद्रमा तुला राशि में गोचर करेंगे. इस राशि में बुध और शुक्र की मौजूदगी के कारण तीनों ग्रह एक साथ आ जाएंगे. इसी स्थिति को त्रिग्रही योग कहा जाता है. ज्योतिष में किसी राशि में तीन ग्रहों की युति को महत्वपूर्ण माना जाता है.
त्रिग्रही योग से इन 3 राशियों को होगा फायदा!
कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए यह त्रिग्रही योग कुछ मामलों में अनुकूल रह सकता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान कामकाज से जुड़ी किसी अच्छी खबर की उम्मीद कर सकते हैं. नौकरी करने वाले लोगों को अपने काम की सराहना मिल सकती है या किसी नए अवसर पर विचार करने का मौका मिल सकता है. परिवार में बातचीत और आपसी तालमेल बेहतर बनाने के लिए भी यह समय उपयोगी माना जा सकता है.
धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए यह योग नई योजनाओं और अवसरों की ओर ध्यान दिला सकता है. ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, नौकरी, कारोबार या किसी नई योजना से जुड़े लोगों को आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं. जो लोग लंबे समय से किसी काम को शुरू करने की सोच रहे हैं, वे उससे जुड़ी तैयारी को आगे बढ़ा सकते हैं. इस दौरान संपर्क और बातचीत की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है. किसी पुराने परिचित से बातचीत या किसी नए व्यक्ति से मुलाकात आगे के लिए उपयोगी साबित हो सकती है.
मकर राशि
मकर राशि के जातकों के लिए त्रिग्रही योग को मेहनत और जिम्मेदारियों से जुड़े मामलों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा सकता है. नौकरीपेशा लोगों को अपने काम में सुधार करने या वरिष्ठ अधिकारियों के सामने अपनी क्षमता दिखाने का अवसर मिल सकता है. वहीं, कारोबार करने वाले लोग अपनी योजनाओं की समीक्षा कर आगे की रणनीति बना सकते हैं.






