नई दिल्ली : आम आदमी पार्टी (आप) ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की अगुआई में इंडिया गठबंधन के साथ उतरने का फैसला किया है। पार्टी अब कांग्रेस के साथ सीटों के बंटवारे पर मंथन में जुटी है। कांग्रेस से पहले दौर की बैठक में अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह सिर्फ दिल्ली और पंजाब में नहीं लड़ेगी। ‘आप’ ने कांग्रेस से दिल्ली-पंजाब समेत 5 राज्यों में हिस्सेदारी मांगी है। अरविंद केजरीवाल सरकार में मंत्री और पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल गोपाल राय ने मंगलवार को इसका खुलासा किया।
गोपाल राय ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अभी कांग्रेस से सीटों को लेकर बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अभी उन्होंने कांग्रेस के सामने प्रस्ताव रखा है कि उनकी पार्टी पांच राज्यों में लड़ना चाहती है। राय ने कहा, ‘सकारात्मक बातचीत चल रही है। अभी सीटों को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। 5 राज्यों में आम आदमी पार्टी चाहती है कि गठबंधन में हम साथ मिलकर चुनाव लड़ें। यह प्रस्ताव रखा गया है। कांग्रेस पार्टी भी अपने हाईकमान-संगठन से बात करेगी। फिर अगले मीटिंग में सीटों पर बात होगी।’
गोपाल राय ने कहा कि सभी राज्यों में क्या स्थिति होगी उस पर आधिकारिक फैसला लेने की जरूरत है। इसके लिए तैयारी करके दोनों दलों की अगली बैठक होगी जिसमें सीटों पर बातचीत हो सकती है। उन्होंने साफ किया कि आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से कहा है कि वह दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गोवा और गुजरात में सीटें चाहती है।
कांग्रेस और ‘आप’ के नेताओं ने लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे पर चर्चा के लिए सोमवार को बैठक की। ‘आप’ की तरफ से संदीप पाठक, सौरभ भारद्वाज और आतिशी ने हिस्सा लिया तो कांग्रेस नेता की ओर से गठबंधन समिति के संयोजक मुकुल वासनिक, राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जैसे नेता मौजूद थे। बैठक के बाद वासनिक ने कहा कि चुनाव से संबंधित कई मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा, ‘हमने आगामी चुनावों के लिए कई मुद्दों को लेकर बैठक की। बातचीत जारी रहेगी और हम फिर मिलेंगे। उसके बाद ही हम सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला लेंगे। हर चीज पर विस्तार से चर्चा हुई। हम एक साथ चुनाव लड़ेंगे। हम भाजपा को शिकस्त देंगे।’
आम आदमी पार्टी दिल्ली और पंजाब में सत्तारूढ़ है और उसने गोवा और गुजरात विधानसभा चुनाव में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। हरियाणा में भी अरविंद केजरीवाल की पार्टी काफी मेहनत कर रही है। हालांकि, पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी को सिर्फ पंजाब में एक सीट पर सफलता मिली थी। इससे पहले 2014 लोकसभा चुनाव में ‘आप’ को चार सीटों पर जीत मिली थी। अपने सबसे बड़े गढ़ दिल्ली में पार्टी लोकसभा चुनाव में खाता नहीं खोल सकती है।







