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Home राज्य

उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण… भगत ‘दा’ को पद्म भूषण !

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
February 11, 2026
in राज्य, विशेष
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Bhagat
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प्रकाश मेहरा
उत्तराखंड डेस्क


देहरादून : गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने सार्वजनिक जीवन में उत्कृष्ट योगदान के लिए उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र/गोवा के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म भूषण’ से अलंकृत करने की घोषणा की। इस घोषणा के साथ ही उत्तराखंड में खुशी और गर्व की लहर दौड़ गई। राज्य के राजनीतिक, सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने इसे “देवभूमि का सम्मान” बताया।

“एक छोटे से कार्यकर्ता को इतना बड़ा सम्मान”

सम्मान की घोषणा के बाद भगत सिंह कोश्यारी ने गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा, “मुझे पद्म भूषण का सम्मान मिला है, उसके लिए मैं राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करता हूं। एक छोटे से कार्यकर्ता को इतना बड़ा सम्मान मिला है, जिसकी मैंने कभी कामना नहीं की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक किसान के बेटे को इतना ऊंचा सम्मान दिया है। हम सबको अपने-अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा से काम करना चाहिए ताकि 2047 तक भारत जगतगुरु और विश्व में नंबर वन देश बन सके।”

उनकी इस प्रतिक्रिया में विनम्रता और राष्ट्र निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट झलकती है। दशकों तक संगठन और शासन में सक्रिय रहने वाले कोश्यारी ने इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय जनसेवा के प्रति समर्पण की स्वीकृति बताया।

उत्तराखंड से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर

भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून 1942 को बागेश्वर जिले के नामती चेताबागड़ गांव में हुआ। साधारण किसान परिवार में जन्मे कोश्यारी ने संघर्ष और मेहनत के दम पर सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई।

छात्र राजनीति से शुरुआत

राजनीति में उनकी सक्रियता छात्र जीवन से ही शुरू हो गई थी। 1961 में वे अल्मोड़ा कॉलेज के छात्रसंघ महासचिव चुने गए। आपातकाल (1975-77) के दौरान उन्होंने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया, जिसके चलते उन्हें लगभग 19 महीने जेल में रहना पड़ा। इस दौर ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और जनसंघ/भाजपा की विचारधारा से उनका जुड़ाव और मजबूत हुआ। उन्होंने अल्मोड़ा से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में अध्ययन किया।

संगठन और शासन में अहम भूमिकाएं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े भगत सिंह कोश्यारी ने भारतीय जनता पार्टी में कई महत्वपूर्ण दायित्व निभाए। उत्तराखंड भाजपा के पहले प्रदेश अध्यक्ष। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद कैबिनेट मंत्री।30 अक्टूबर 2001 से 1 मार्च 2002 तक उत्तराखंड के दूसरे मुख्यमंत्री। 2002–2007: विधानसभा में नेता विपक्ष।2007–2009: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष। 2008–2014: राज्यसभा सदस्य। 2014: नैनीताल से लोकसभा सांसद। इसके बाद: महाराष्ट्र के राज्यपाल तथा गोवा का अतिरिक्त प्रभार। लंबे संगठनात्मक अनुभव और प्रशासनिक समझ के चलते उन्हें संवैधानिक पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और संवैधानिक परिस्थितियों में भूमिका निभाई।

उत्तराखंड में विकास की पहचान

उत्तराखंड राज्य गठन के शुरुआती दौर में कोश्यारी ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और विकास की दिशा तय करने में योगदान दिया। शिक्षा, सड़क, ऊर्जा और पर्वतीय क्षेत्रों के विकास जैसे मुद्दों को उन्होंने प्राथमिकता दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि “सीमित कार्यकाल के बावजूद उन्होंने राज्य की नीतिगत दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संगठन के स्तर पर उनकी पकड़ और कार्यकर्ताओं से संवाद उनकी ताकत मानी जाती रही है।

जनसेवा का सम्मान

पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि दशकों की राष्ट्रसेवा, संगठन निर्माण और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय योगदान की मान्यता है। उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने इस घोषणा का स्वागत किया। कई सामाजिक संगठनों ने भी इसे पर्वतीय अंचल से निकले नेतृत्व की राष्ट्रीय पहचान बताया।

2047 का संकल्प और आगे की राह

अपने वक्तव्य में कोश्यारी ने 2047 तक भारत को “जगतगुरु और संपन्न राष्ट्र” बनाने का लक्ष्य दोहराया। उनका यह संदेश केवल राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक के लिए प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है। पद्म भूषण से अलंकृत भगत ‘दा’ का जीवन संघर्ष, संगठन, शासन और राष्ट्रसेवा की एक लंबी यात्रा का प्रतीक है। साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों तक पहुंचने का उनका सफर आज युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। देवभूमि उत्तराखंड के लिए यह सचमुच गौरव का क्षण है — जब एक ‘छोटे कार्यकर्ता’ की निष्ठा और समर्पण को राष्ट्र ने सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक से सम्मानित किया है।

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