पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियां बहुत सक्रिय हैं। सीबीआई और ईडी की टीमें कई मामलों की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कई नए मामले इन एजेंसियों के पास आने वाले हैं। केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता के बीच यह सवाल उठा है कि क्या तृणमूल कांग्रेस के नेता ही इन एजेंसियों को खुफिया सूचना दे रहे हैं और पोल खोल रहे हैं? ध्यान रहे ममता सरकार में नंबर दो मंत्री रहे पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी और उनकी करीबी महिला के यहां से 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की जब्ती हुई तो कहा गया कि पैसे रखने के ठिकानों की जानकारी ईडी को किसी तृणमूल नेता ने ही दी थी। पिछले दिनों भाजपा के एक सांसद ने इस तरह की चर्चाओं को कुछ और हवा दी।
पश्चिम बंगाल से भाजपा के सांसद सौमित्र खान ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के नेता भाजपा के बड़े नेताओं से मिल कर उनको दूसरे नेताओं की गड़बडिय़ों की जानकारी दे रहे हैं। सौमित्र खान ने एक नेता का नाम भी लिया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के सचिव कुणाल घोष ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मिल कर दूसरे नेताओं की खुफिया जानकारी दी है। उनका कहना है कि कुणाल घोष जब सारदा चिट फंड घोटाले से जुड़े मामले में जेल में थे तो तृणमूल के नेताओं ने मदद नहीं की थी और उनका मजाक उड़ाया था। वे इससे आहत हैं और इसलिए दूसरे नेताओं की पोल खोल रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि तृणमूल नेताओं के आपसी झगड़े की वजह से भी नेताओं की पोल खुल रही है।






