नई दिल्ली. दिल्ली का राजनीतिक तापमान अब तेजी से बढ़ने लगा है. कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने दिल्ली के पूर्व सीएम और ‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल पर बड़ा हमला बोला है. माकन ने केजरीवाल को भ्रष्टाचारी तो कहा ही साथ में राष्ट्रविरोधी भी करार दे दिया. कैग रिपोर्ट (CAG Report) का हवाला देते हुए माकन ने केजरीवाल पर दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को चौपट करने का आरोप लगाकर डिबेट करने की खुली चुनौती दे दी. क्रिकेट की भाषा में कहें तो बीजेपी पहले से ही केजरीवाल पर ‘यॉर्कर पर यॉर्कर’ फेंक रही थी. ऐसे में माकन ने डिबेट की चुनौती देकर केजरीवाल पर ‘बाउंसर’ फेंककर गेंद ‘आप’ के पाले में डाल दिया है. क्योंकि, अरविंद केजरीवाल अक्सर विपक्षी नेताओं को डिबेट की खुली चुनौती देते रहे हैं.
अजय माकन ने आरोप लगाया है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने दिल्ली के अस्पतालों में 382 करोड़ रुपये का घोटाला किया है. माकन ने दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट होने के कई कारण गिनाए. माकन ने कहा है कि बीते 10 वर्षों में केजरीवाल ने सिर्फ 3 अस्पताल बनाएं, जिनका काम की शुरुआत कांग्रेस शासन में हुई थी. केजरीवाल के शासनकाल में इन तीनों अस्पताल की कुल लागत में से 382.52 करोड़ रुपये बढ़ गई. इंदिरा गांधी अस्पताल 5 साल की देरी से और 314.9 करोड़ अतिरिक्त खर्चे से बनकर तैयार हुई. बुराड़ी अस्पताल पूरा होने में 6 साल की देरी हुई और लागत से 41.26 करोड़ रुपये अधिक खर्च हुए. मौलाना आजाद डेंटल कॉलेज अस्पताल फेस-2 में 3 साल की देरी हुई और 26.36 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हुए.
कांग्रेस ने बोला केजरीवाल पर जोरदार हमला
माकन ने कहा है कि केजरीवाल सरकार ने अपने शासनकाल में 15 प्लॉट अधिग्रहित किए, जिन पर अस्पताल और डिस्पेंसरियां बननी थीं. मगर एक भी काम शुरु नही किया गया. अरविंद केजरीवाल कोविड महामारी में केन्द्र सरकार से मिले बजट का इस्तेमाल नही कर पाए. केन्द्र सरकार से 635.62 करोड़ बजट मिला, जिसका 56.74 प्रतिशत 360.64 करोड़ खर्च ही नही किया. जबकि, कोविड महामारी में लोग दवाई, ऑक्सीजन, बेड की कमी से दम तोड़ रहे थे.
दिल्ली के अस्पतालों का ये हाल
दिल्ली के अस्पतालों में साल 2016 से लेकर 2021 तक 32000 बेड बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन सिर्फ 3.86 प्रतिशत 1,235 बेड ही बढ़ा पाए. इतना ही नहीं दिल्ली के 9 सरकारी अस्पतालों में बेड ओक्यूपेंसी का औसत 101-189 प्रतिशत का है, मतलब एक बेड पर दो मरीज रहते हैं.
कैग रिपोर्ट में हुआ ये खुलासा
दिल्ली के चार अस्पतालों एलएनजेपी, चाचा नेहरु बाल चिकित्सालय, राजीव गांधी सुपर स्पेशिलिटी और जनकपुरी स्पेशिलिटी अस्पतालों में कैग रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर घोटाला की बात है. एलएनजेपी में मेजर बर्न सर्जरी का एक ऑपरेशन थिएटर है, जो काम नही कर रहा है. यहां ऑपरेशन के लिए 12 महीने का वेटिंग है. 12 ईसीजी मशीनों में से 5 काम नहीं कर रहे हैं. चाचा नेहरु बच्चों का अस्पताल है यहां भी बच्चों की सर्जरी के लिए 12 महीनों का वेटिंग है.
एक बेड पर दो से तीन मरीज
दिल्ली के 27 अस्पतालों में से आईसीयू 14 में नही है. ब्लड बैंक 16 में नहीं है. ऑक्सीजन सुविधा 8 में नहीं है, मोर्चुरी 15 में नहीं हैं और एम्बुलेंस सर्विस 12 अस्पतालों में नहीं है. दिल्ली के अस्पतालों में 21 प्रतिशत नर्सों की कमी है. कुछ अस्पतालों में कमी 34 प्रतिशत है. 30 प्रतिशत कमी पॅरामेडिकल स्टॉफ की है. स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की 30 प्रतिशत कमी है और नॉन स्पेशलिस्ट डाक्टरों की 28 प्रतिशत की कमी है.
माकन ने कहा है कि दिल्ली अस्पातलों में बड़े पैमाने पर घोटाला हुए हैं. ऐसे में भ्रष्टाचार को खत्म करने की बात करने वाले अरविंद केजरीवाल कैग रिपोर्ट विधानसभा में क्यों नहीं पेश किया? अन्ना आंदोलन के वक्त यही केजरीवाल कैग रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते नहीं थकते थे. फिर अरविंद केजरीवाल कैग रिपोर्ट पर क्यों नहीं बोल रहे हैं







