नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से स्पेस डॉकिंग एक्सपेरीमेंट (स्पैडेक्स) को सफलतापूर्वक लांच किया। इस मिशन के सफल प्रक्षेपण पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने खुशी जताते हुए कहा कि भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिन्होंने स्वदेशी रूप से विकसित डॉकिंग तकनीक के माध्यम से अंतरिक्ष डॉकिंग की क्षमता हासिल की है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने ट्वीट में कहा, “भारत अब उन चार देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिन्होंने अपने स्वदेशी विकसित भारतीय डॉकिंग सिस्टम के माध्यम से अंतरिक्ष डॉकिंग को संभव किया है। यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।”
उन्होंने यह भी बताया कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, और यह गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए रास्ते खोलने वाली है।
क्या है स्पैडेक्स मिशन का मकसद ?
स्पैडेक्स मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष में दो उपग्रहों को डॉक करना है, जो भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर साबित होगा। इस मिशन के तहत अंतरिक्ष में डॉकिंग प्रक्रिया की परीक्षण किया जाएगा, जो मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए अत्यंत आवश्यक है।
2025 में होगा एनवीएस-02 उपग्रह लांच
इसरो अब जनवरी 2025 में एनवीएस-02 उपग्रह को जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (जीएसएलवी) के जरिए लांच करने की तैयारी कर रहा है। इस मिशन से भारतीय नेविगेशन सिस्टम (NAVIC) की क्षमताओं में और सुधार होगा। इससे पहले, 29 मई 2023 को, जीएसएलवी-एफ12 रॉकेट के जरिए एनवीएस-01 उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था, जिसमें स्वदेशी परमाणु घड़ी शामिल थी।
चंद्रयान-4 मिशन: चंद्रमा की ओर फिर एक कदम
इसरो प्रमुख एस. सोमनाथ ने चंद्रयान-4 मिशन के बारे में भी जानकारी दी, जिसमें विभिन्न मॉड्यूल शामिल हैं, जिन्हें अलग-अलग समय पर लॉन्च किया जाएगा और फिर एकीकृत किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य चंद्रमा पर जाना, वहां उतरना और सफलतापूर्वक पृथ्वी पर वापस आना है। डॉकिंग प्रक्रिया 7 जनवरी 2025 तक पूरी होने की उम्मीद है।
बताया, आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “यह वर्ष 2024 की शुरुआत में भारत के लिए ऐतिहासिक था। सबसे पहले, भारत ने एडीटिया मिशन के जरिए सूर्य की ओर अपना पहला मिशन भेजा, और अब स्पैडेक्स मिशन के साथ देश ने एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ाया है। यह मिशन भारतीय डॉकिंग तकनीक का एक महत्वपूर्ण कदम है, और इसे प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण से जोड़ा जा सकता है।”
उन्होंने बताया कि गगनयान मिशन के परीक्षण भी अब लगभग पूर्ण हो चुके हैं, और अगले साल एक महिला रोबोट के साथ ड्रेस रिहर्सल आयोजित किया जाएगा।
भविष्य के मिशनों में उठाये जायेंगे महत्वपूर्ण तकनीकी कदम
इसरो के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुरेंद्रन एन ने कहा, “स्पैडेक्स एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी प्रदर्शन है, जो भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों, विशेषकर मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए अत्यंत उपयोगी होगा।”
भारत ने अपनी स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं से साबित कर दिया है कि वह अब अंतरिक्ष क्षेत्र में न केवल आत्मनिर्भर है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरा है।







