नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने आज बुधवार को गन्ना किसानों की ओर से लगातार उठाए जा रहे मुद्दों की गंभीरता जांच करने और उनकी चिंताओं को दूर करने को लेकर एक समिति का गठन किया है. नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद की अगुवाई में यह समिति गठित की गई. इस समिति में कृषि आयुक्त के अलावा 2 संयुक्त सचिव को भी शामिल किया गया है.
यह समिति कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों की केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री तथा केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री के साथ हुई बैठक में लिए गए फैसलों के बाद गठित की गई है.
खेती की लागत और मुनाफे की जांच करेगी समिति
नवगठित समिति किसानों की चिंताओं के बीच खेती की लागत और अन्य संबंधित मामलों को ध्यान में रखते हुए गन्ना किसानों को मिलने वाले लाभकारी रिटर्न में बढ़ोतरी की मांग की भी जांच करेगी. इसके अलावा यह समिति चीनी उत्पादन लागत, बाजार से होने वाली कमाई और चीनी मिलों की वित्तीय व्यवहार्यता के संदर्भ में चीनी की पूर्व-मिल न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP) की समीक्षा की मांग पर भी विचार करेगी.
समिति की पड़ताल के दायरे में अन्य प्रमुख क्षेत्रों में चीनी रिकवरी की जांच और रिपोर्टिंग के मौजूदा तरीके, रिकवरी के पारदर्शी सत्यापन को तय करने के उपायों के अलावा और चीनी मिलों में गन्ने की तौल की मौजूदा प्रक्रियाएं (जिसमें कैलिब्रेशन, निरीक्षण और सत्यापन प्रणालियों की पर्याप्तता है) शामिल होंगी.
किसानों के प्रतिनिधि और चीनी मिल संघ से मंथन
समिति मशीनों से काटे गए गन्ने के वजन में कटौती से संबंधित मौजूदा प्रक्रियाओं की भी जांच करेगी और मशीनीकृत कटाई से होने वाले वास्तविक नुकसान (यदि कोई हो) का भी आकलन करेगी. यह किसानों को देय गन्ना मूल्य पर मौजूदा प्रक्रियाओं के वित्तीय प्रभाव का मूल्यांकन करेगी और आवश्यक समझे जाने वाले किसी भी अन्य संबंधित मामले पर विचार कर सकती है.
समिति सभी हितधारकों, जिनमें किसानों के प्रतिनिधि, चीनी मिल संघ, राज्य सरकारें और अन्य विशेषज्ञ या संगठन शामिल हैं, से जरूरत के हिसाब से सलाह-मशविरा करेगी. समिति को सक्षम प्राधिकारी को अपनी रिपोर्ट, जिसमें उसके निष्कर्ष और विशिष्ट सिफारिशें शामिल होंगे, जल्द से जल्द सौंपने को कहा गया है.
समिति में कौन-कौन होंगे शामिल
नवगठित समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर रमेश चंद, जो एक प्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री और सार्वजनिक नीति विशेषज्ञ हैं. प्रोफेसर साल 2015 से 2026 तक नीति आयोग के सदस्य के रूप में रहे, इससे पहले उन्होंने ICAR-NIAP के निदेशक के रूप में काम किया. उन्हें 15वें वित्त आयोग के सदस्य के रूप में भी काम करने का अनुभव है. उनके पास कृषि क्षेत्र में विकास, किसानों के मुद्दों, खाद्य सुरक्षा, कृषि बाजारों और मूल्य निर्धारण नीति को लेकर काम करने का खासा अनुभव है.
प्रोफेसर रमेश चंद की अगुवाई वाली समिति में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त को शामिल किया गया है. साथ ही खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (चीनी) और उपभोक्ता मामले विभाग के संयुक्त सचिव (विधिक माप विज्ञान) को सदस्य के तौर पर रखा गया है.
पिछले दिनों केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी की अगुवाई में हुई बैठक में कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा की गई. किसानों की ओर से उठाए गए मुद्दों में गन्ने की कीमत के अलावा, उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी), चीनी की कीमतें, रिकवरी दर, वजन में गड़बड़ी, कटाई का समय, बर्बादी और किसानों को भुगतान शामिल थे.







