नई दिल्ली। तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रूट मार्च को अनुमति देने का मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंच गया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य पुलिस से सवाल किया कि जब RSS जम्मू-कश्मीर जैसे आतंकवाद प्रभावित इलाकों में भी मार्च निकाल सकता है, तो तमिलनाडु में उसे हर साल अनुमति देने से क्यों रोका जा रहा है. न्यायमूर्ति वी लक्ष्मीनारायणन ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि राज्य नागरिकों को अपना दुश्मन समझ रही है.
RSS सदस्य वी जी जगदीशन ने इस मामले में याचिका दायर कर पुलिस को रूट मार्च की अनुमति पर विचार करने का निर्देश देने की मांग की थी. याचिका में 18 अक्टूबर, 25 अक्टूबर और 1 नवंबर 2026 को या किसी दूसरी उपयुक्त तारीख पर मार्च निकालने की अनुमति मांगी गई थी. याचिका के मुताबिक, मार्च में संगठन के सदस्य वर्दी पहनकर संगीत बैंड के साथ शामिल होना चाहते थे. इसके बाद सार्वजनिक सभा भी आयोजित की जानी थी.
हर साल सामने आता है मार्च की अनुमति का मुद्दा
लाइव लॉ के मुताबिक, RSS की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन एल राजा ने कहा कि संगठन को हर साल अनुमति के लिए अदालत जाना पड़ता है. यह मामला सिर्फ RSS के मार्च की अनुमति तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक जुलूसों, कानून-व्यवस्था और पुलिस की अनुमति देने की प्रक्रिया से भी जुड़ा है.
RSS की ओर से अदालत में कहा गया कि संगठन को हर साल मार्च निकालने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है. वहीं, राज्य के एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने अनुमति से जुड़ी जगह और सार्वजनिक सभा के नियमों का मुद्दा उठाया. ऐसे में अदालत ने दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने का निर्देश दिया है.
‘ये सरकार किसी भी जुलूस के खिलाफ है’
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति वी लक्ष्मीनारायणन ने सवाल किया ‘अगर वे (RSS) जम्मू और कश्मीर जैसी आतंकवाद प्रभावित जगह पर मार्च निकाल सकते हैं, तो तमिलनाडु पुलिस हर साल उन्हें अनुमति क्यों नहीं देती?’ उन्होंने कहा कि अभी की सरकार किसी भी तरह के जुलूस की परमिशन देने से इनकार रह रही है. इसी वजह से उन्हें अदालत आने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. उन्होंने कहा, ‘यह सरकार किसी भी जुलूस के खिलाफ है. वो द्रविड़ कड़गम और आरएसएस दोनों को अनुमति देने से से इनकार कर रहे हैं.’
सरकार ने क्यों नहीं दी अनुमति?
अदालत ने यह भी कहा कि चाहे कोई भी सरकार बने, आरएसएस को उसके मार्च की अनुमति नहीं दी जा रही है. विजय नारायण ने अदालत को बताया कि अनुमति इसलिए नहीं दी गई, क्योंकि जिन स्थानों पर रूट मार्च और सार्वजनिक सभा आयोजित करने की मांग की गई थी, वो सार्वजनिक सभा के लिए अधिसूचित स्थान नहीं थे. अदालत ने मौखिक तौर पर कहा कि सरकार नागरिकों को अपना दुश्मन मान रही है, इसी वजह से विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार रह रही है.
एन एल राजा ने उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान एन एल राजा ने कहा कि संगठन केवल अपनी स्थापना दिवस मनाना चाहता है, जो विजयदशमी उत्सव के साथ पड़ता है, और एक पदयात्रा करना चाहता है. उन्होंने बताया कि पुलिस यह कहते हुए अनुमति देने से इनकार कर रही है कि पदयात्रा से कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होगी. उन्होंने सवाल किया, ‘RSS जैसी संस्था अदालत में जाकर अनुमति मांग सकती है. लेकिन उन छोटी पार्टियों का क्या जिनके पास अदालत में जाने के लिए संसाधन नहीं है?’
शांतिपूर्ण जुलूस की अनुमति पर रिपोर्ट मांगी
मद्रास हाईकोर्ट ने RSS के रूट मार्च की अनुमति से जुड़े मामले में याचिकाकर्ता पक्ष के पांच सदस्यों को राज्य के लोक अभियोजक जॉन सत्यान से मिलने और शांतिपूर्ण आयोजन का रास्ता निकालने का निर्देश दिया. अदालत ने सुनवाई गुरुवार तक टालते हुए राज्य सरकार से शांतिपूर्ण जुलूस की अनुमति पर रिपोर्ट मांगी. अदालत पहले भी RSS की पदयात्राओं के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर चुकी है, लेकिन 2024 में अनुमति नहीं मिलने पर संगठन को दोबारा अदालत का रुख करना पड़ा था.







