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Home राज्य

CJI चंद्रचूड़ बोले- ’35A ने छीन लिए थे लोगों के तीन मूल अधिकार’

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 28, 2023
in राज्य
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CJI Chandrachud
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केंद्र सरकार के आर्टिकल 370 और 35 A को निरस्त किए जाने के फैसले के खिलाफ सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि संविधान में आर्टिकल 35A के जोड़े जाने के चलते लोगों के तीन मूल अधिकार छिन गए थे. इसके तहत जम्मू कश्मीर के ‘स्थायी निवासियों’ को मिले विशेषाधिकार के चलते बाकी लोगों के जम्मू कश्मीर में रोजगार पाने, वहां जमीन खरीदने और वहां जाकर बसने के अधिकार का हनन हुआ.

सीजेआई ने कहा कि आर्टिकल 16(1) के तहत एक सीधा अधिकार है, जो छीन लिया गया वह राज्य सरकार के तहत रोजगार था. सीजेआई ने कहा कि राज्य सरकार के तहत रोजगार विशेष रूप से आर्टिकल 16(1) के तहत प्रदान किया जाता है, इसलिए जहां एक ओर आर्टिकल 16(1) को संरक्षित रखा गया, वहीं 35A ने सीधे तौर पर उस मौलिक अधिकार को छीन लिया और इस आधार पर किसी भी चुनौती से सुरक्षा दी जाती थी.

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इसी तरह, आर्टिकल 19 – यह देश के किसी भी हिस्से में रहने और बसने के अधिकार को मान्यता देता है. इसलिए 35A द्वारा सभी तीन मौलिक अधिकार अनिवार्य रूप से छीन लिए गए. साथ ही साथ न्यायिक समीक्षा की शक्ति छीन ली गई.

2019 में सरकार ने निरस्त कर दिया था आर्टिकल 370

आर्टिकल 35A जम्मू कश्मीर की विधानसभा को स्थायी नागरिक की परिभाषा तय करने और उन्हें वहां नौकरी, जमीन खरीदने में विशेषाधिकार देता था. साल 2019 में सरकार ने आर्टिकल 370 को खत्म करने के साथ-साथ 35A को भी निरस्त कर दिया था. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में आर्टिकल 370 और 35A को निरस्त किए जाने के फैसले पर सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल एसजी मेहता और इस फैसले के खिलाफ दलील पेश करने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए.

सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए मेहता ने कहा कि जम्मू कश्मीर में भारतीय संविधान में किया गया कोई भी संशोधन जम्मू-कश्मीर पर तब तक लागू नहीं होता था जब तक कि आर्टिकल 370 के रास्ते उसे लागू नहीं किया जाता. उदाहरण के लिए, भारत के संविधान में संशोधन किया गया और आर्टिकल 21A- शिक्षा का अधिकार जोड़ा गया. यह 2019 तक जम्मू-कश्मीर पर कभी लागू नहीं हुआ, क्योंकि इस रूट का पालन ही नहीं किया गया था. एसजी मेहता ने कहा, यहां तक ​​कि “अखंडता” शब्द भी लागू नहीं किया गया था.

एसजी मेहता ने कहा कि यह 2019 तक हुआ. मेहता ने कोर्ट से इस मामले को जम्मू-कश्मीर के लोगों के नजरिए से देखने का आग्रह किया और कहा कि यहां जिस चीज पर आपत्ति जताई गई है वह सत्ता का संवैधानिक प्रयोग है, जो मौलिक अधिकार प्रदान करता है. संपूर्ण संविधान लागू करता है. जम्मू-कश्मीर के लोगों को बराबरी पर लाता है. यह उन सभी कानूनों को लागू करता है जो जम्मू-कश्मीर में कल्याणकारी कानून हैं, जो पहले लागू नहीं किए गए थे.

अब आ रहा है निवेश, लोगों को मिल रहा रोजगार

उन्होंने आगे कहा कि अब राज्य में निवेश आ रहा है. अब पुलिसिंग केंद्र के पास होने से पर्यटन शुरू हो गया है. जम्मू-कश्मीर में परंपरागत रूप से ज्यादा बड़े उद्योग नहीं थे. वे कुटीर उद्योग थे. आय का स्रोत पर्यटन था. अभी 16 लाख पर्यटक आए हैं. नए-नए होटल खुल रहे हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है.

उन्होंने आगे कहा कि 2019 तक, जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के न्यायाधीश “राज्य के संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा” की शपथ लेते थे. जबकि उन पर भारत का संविधान लागू करने का दायित्व था, लेकिन उन्होंने जो शपथ ली वह जम्मू-कश्मीर के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त कर रही थी.

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