हल्द्वानी। उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित ऐतिहासिक रामलीला मैदान से शुरू हुआ एक वाक्य अब राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है. कांग्रेस और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के बीच इस विषय पर जुबानी जंग तेज हो गई है. दरअसल, अगस्त महीने की शुरुआत में आयोजित एक राजनीतिक रैली के बाद मैदान में किए गए धार्मिक अनुष्ठान ने इस पूरे विवाद को जन्म दिया. इस घटना के बाद से ही आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक बयानबाजी का माहौल बना हुआ है.
जनसभा से शुरू हुआ घटनाक्रम
पूरे मामले की शुरुआत 8 अगस्त को हुई, जब कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था. इस कार्यक्रम में भारी संख्या में लोग और कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंचे थे. हालांकि, इस रैली के ठीक तीन दिन बाद, यानी ग्यारह अगस्त को, श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास से जुड़े कुछ लोग मैदान में एकत्र हुए। उन्होंने वहां गंगाजल का छिड़काव किया और हवन का आयोजन किया. संस्था के लोगों ने इसे एक धार्मिक रस्म बताते हुए कहा कि राजनीतिक जमावड़े के बाद स्थल की पवित्रता और स्वच्छता बहाल करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया था.
कांग्रेस का कड़ा विरोध और बढ़ता विवाद
गंगाजल छिड़कने और हवन करने की इस प्रक्रिया को कांग्रेस पार्टी ने बेहद आपत्तिजनक माना और इसका पुरजोर विरोध शुरू कर दिया. कांग्रेस समर्थकों और नेताओं का कहना था कि यह एक समुदाय और उनके नेताओं का अपमान करने की नीयत से किया गया कार्य है. धीरे-धीरे इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया और स्थानीय स्तर का यह मामला एक बड़े राजनीतिक विवाद में तब्दील हो गया. विपक्षी दल इसे सामाजिक सद्भाव को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताने लगे, जिससे माहौल में तनाव बढ़ गया.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का क्या कहना हैं ?
विवाद के तूल पकड़ने पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सरकार और अनुष्ठान करने वाली संस्था पर बात की. उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस पूरे मामले को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है. विपक्षी दल जब भी कोई बयान देते हैं, तो उनके पास न तो कोई ठोस तथ्य होते हैं और न ही कोई सबूत. मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसा कोई वीडियो, अखबार की कटिंग या बैनर मौजूद नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि किसी व्यक्ति विशेष या वर्ग का अपमान किया गया है.
शुद्धीकरण का वास्तविक आधार और तर्क
मुख्यमंत्री धामी ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया कि धार्मिक क्षेत्र में काम करने वाली संस्था ने किसी व्यक्ति को शुद्ध करने के लिए यह रस्म नहीं निभाई थी. इसका उद्देश्य उस स्थान के माहौल को ठीक करना था, जहां कथित तौर पर अनर्गल और उन्मादी नारे लगाए गए थे, जिससे स्थल अपवित्र हो गया था. उन्होंने यह तर्क भी सामने रखा कि इस अनुष्ठान में उसी समुदाय और वर्ग के पांच से अधिक लोग शामिल थे. ऐसे में यह सवाल ही नहीं उठता कि लोग अपनी ही जाति या वर्ग के खिलाफ कोई काम करेंगे. उन्होंने जनता से अपील की कि वे इस तरह की भ्रामक बातों में न आएं, क्योंकि लोग सच्चाई को अच्छी तरह समझते हैं.







