Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राज्य

कांग्रेस आखिर ढाई दशक से वनवास क्यों झेल रही खंडवा नगर निगम में

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
June 8, 2022
in राज्य
A A
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

अनिल पुरोहित/अशफाक

खंडवा,08 जून (आरएनएस)। क्या खंडवा भाजपा का अभेद्य किला है? निगम परिषद का 25 साल का इतिहास तो यही बताता है। पहली परिषद में अणिमा उबेजा के महापौर चुने जाने के बाद खंडवा में कभी कांग्रेस ने निगम पर कब्जा जमाने में सफलता नहीं पाई। यूँ तो भारतीय जनता पार्टी ही खंडवा विधानसभा क्षेत्र में भी एकतरफा बढ़त बनाए हुए है। पहले हुकुमचद यादव और उसके बाद लगातार देवेंद्र वमा्र को खंडवा ने चुनकर भोपाल पहुंचाया है। एक बार लोकसभा चुनाव में अरुण यादव की कांग्रेस से जीत को छोड़ दें तो लगातार भारतीय जनता पार्टी का ही दबदबा अरसे से खंडवा लोकसभा में भी रहा है। यही हाल जिला पंचायत, जनपद से लेकर मंडी में में रहा है। कांग्रेस हर चुनाव हर मोर्चे पर फिसड्डी साबित हुई है। ऐसे में निगम महापौर चुनाव में कांग्रेस अपनी जीत के लिए क्या तैयारी कर रही है? सुभाष कोठारी के महापौर काल में भाजपा नेताओं का ही विरोधरहा। विधायक देवेंद्र वर्मा से उनकी पटरी कभी नहीं बैठी। उनकी कार्यशैली, नर्मदा पाइपलाइन का बार-बार फूटने का सिलसिला हो या विभिन्न निर्माण कार्येां का बुरा हश्र, कांग्रेस ने कभी विपक्षी दल की भूमिका नहीं निभाई। कांग्रेस कभी निर्माणाधीन स्वीमिंग पूल में हुआ भ्रष्टाचार उठा न सकी। कांग्रेस ने कभी नए बस स्टैण्ड की गुणवत्ता और निर्माण पर सवाल नहीं किया। कभी ट्रांसपेार्ट नगर की हद दर्जे की देरी पर व्यापारियों का साथ दे भाजपा को नहीं घेरा, खुदी हुई सडक़ों पर जनता की तरफ से पैरवी नहीं की। भाजपा ओवरब्रिज की समस्या पर प्रभावी आंदोलन नहीं खड़ा किया।

इन्हें भी पढ़े

यूपी चुनाव : एक्टिव मोड में आई कांग्रेस, खास स्ट्रैटिजी पर है फोकस !

May 19, 2026
Ayushman

गरीबों का ‘सुरक्षा कवच’ बनी आयुष्मान योजना, यूपी में ₹13,315 करोड़ का भुगतान

May 19, 2026
yogi

‘जिम जिहाद’ केस में CM योगी के निर्देश पर बड़ा एक्शन, आरोपियों पर लगा गैंगस्टर एक्ट

May 19, 2026
Here is how CM Yogi met Amit Shah on the soil of Bastar.

छत्तीसगढ़: बस्तर की धरती पर अमित शाह से कुछ इस तरह मिले सीएम योगी

May 19, 2026
Load More

ऐसे तमाम मुद्दे जिन पर भाजपा की निगम परिषद को घेर कर आम जनता की सहानुभूति बंटोरी जा सकती थी, उन पर कांग्रेस की चुप्पी मतदाता के दिलो दिमाग में है। ऐसे में कांग्रेस किस मुंह से महापौर पद पर अपने उम्मीदवार के लिए वोट की अपेक्षा करेगी? कांग्रेस से महापौर पद के लिए दावेदारी जता रहे कांग्रेस नेता श्याम यादव, बलराम वर्मा अथवा अन्य जिम्ममेदारों ने कब निगम से सवाल किए? कांग्रेस ने हार सहते हुए 25 साल में पूरी एक पीढ़ी गुजार दी। नये मतदाताओं को यह पता ही नहीं हे कि कांगे्रस भी कभी जीती थी। ब्राह्मण उम्मीदवार सुनीता सकरगाये हो या अजय ओझा, दोनों ही अच्छे प्रत्याशी कमजोर संगठन के चलते चुनाव हार गए। कांग्रेस में अपने बूते टिकट लाना, अकेले अपने दम पर ही चुनाव लडऩा, परंपरागत माने जाने वाले मुस्लिम मतदाताओं का छिक जाना, दो दशक में आर्थिक रूप से पार्टी और नेताओं का टूट जाना, कार्यकर्ताओं का अभाव, गुटबाजी में घिरी पार्टी की बची खुची ताकत, विरोध करने की आदत न रहना, ये ऐसे मुद्दे हैं जो कांग्रेस का आइना हैं। जो उम्मीदवार चुनाव मैदान में कूदेगा उसे इन सबसे पार होना होगा उसके बाद मतदाता के पास अपनी बात रख पाएगा। भाजपा से समाजसेवी स्वर्गीय ताराचंद अग्रवाल, संघ के साधारण सिपाही सवर्गीय वीरसिंह हिंडोन, मंत्री विजय शाह की पत्नी भावना शाह और जिलाध्यक्ष रहे सुभाष कोठारी के बाद लगातार सफल्ता का पेच लगानने के लिए नए उम्मीदवार पर मंथन तेज हो चला है। निमाड़ में बरसों सर्वमान नेता रहे नंदकुमार सिंह चौहान की अनुपस्थिति में अब कमान खंडवा एमएलए देवेंद्र वर्मा के हाथ है। भाजपा में परंपरागत है महापौर पद के लिए उम्मीदवारों ममें विधायक की इच्छा अहम होती हे, ऐसे में यहां सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के लिए जोर आजमाइश की गुंजाइश नहीं। बुरहानपुर महापौर प्रत्याशी उनकी रजामंदी से तय होना ही है। भाजपा मुख्यालय से जारी कार्यक्रम अनुसार 11 जून को रायशुमारी होगी। उसके बाद तीन नामों का पैनल बनाकर चर्चा होगी। 15 जून तक उम्मीदवार घेाषित होने की संभावना है।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
Arvind Kejriwal AAP

अब खुद पानी की उपलब्धता और आपूर्ति पर नजर रखेंगे सीएम केजरीवाल!

April 3, 2023

जंगल फॉर पोलखोल

January 23, 2024

डॉक्यूमेंट्री के जाल में फंस गईं पार्टियां

January 28, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • भारत-UAE साझेदारी बन सकती है गेमचेंजर!
  • यूपी चुनाव : एक्टिव मोड में आई कांग्रेस, खास स्ट्रैटिजी पर है फोकस !
  • NTA में बड़ा फेरबदल, चार अधिकारियों की हुई नियुक्ति, संभालेंगे अलग-अलग जिम्मेदारी

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.