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Home राज्य

भ्रष्टाचार, विकास योजनाएं और भारत के गांव

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
September 19, 2025
in राज्य, विशेष
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Uttar Pradesh vidhansabha chunav
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सतीश मुखिया


हाथरस/ मथुरा : भारत गांवों का देश है और आज भी 70% आबादी के गांवों में निवास करती है । केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने हेतु विभिन्न योजनाओं को लागू किया जा रहा है लेकिन यह योजनाएं धरातल पर लागू होती हुई दिखाई नहीं पड़ती है।

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ग्रामीण विकास मंत्रालय, जल मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा ग्राम पंचायतों में रहने वाले निवासियों के सर्वांगीण विकास हेतु भारी मात्रा में पंचायत निधि के रूप में धनराशि आवंटित की जा रही है जिससे यह पंचायतें अपना विकास कर सकें और अपने खर्च स्वयं वहन कर सके लेकिन पंचायत स्तर पर यह देखने में आ रहा है कि जनपद स्तर से कार्य योजना लागू होने के बाद भूतल पर यह योजनाएं सही तरीके से लागू नहीं हो पाती जिस कारण गांव के विकास में अड़चन पैदा होती है ।

ग्राम पंचायत के विकास की जिम्मेदारी प्रधान और ग्राम विकास अधिकारी की होती है लेकिन आपसी सामजस्य सही से न बैठने के कारण विकास की गाड़ी का पहिया उतर जाता है और जिस पंचायत का विकास होना चाहिए था वह पंचायत विकास के रास्ते पर आगे ना बढ़कर पीछे की ओर बढ़ती हुई दिखाई देती है । जिसमें भाई भतीजाबाद, जाति, धर्म, संप्रदाय और स्थानीय राजनीति मुख्य भूमिका निभाती है ।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से वादा किया वह उसको भरसक निभाने की कोशिश कर रहे हैं और सबका साथ, सबका विकास के नारे के साथ समानता का संदेश दे रहे है। इन दोनों के द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत ग्राम पंचायत के विकास हेतु धनराशि उपलब्ध कराई जा रही है लेकिन जिला स्तर के अधिकारियों द्वारा सही तरीके से इस धनराशि का उपयोग न होने के कारण विकास कार्यों में स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता सामने आ रही है।

uttar pradesh vidhansabha chunav

उत्तर प्रदेश में अगले 6 महीने में पंचायत चुनाव 2026 के चुनाव होने को है और कुछ ही समय में पंचायत के बस्ती जमा होना शुरू हो जाएंगे लेकिन सवाल वहीं खड़ा है कि जिन पंचायत के विकास हेतु सरकार द्वारा प्रत्येक 5 वर्ष में चुनाव कराया जाता है क्या वास्तव में इन चुनाव प्रक्रिया के तहत चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा जनता की समस्याओं का निराकरण सही तरीके से किया जाता है और वह अपना इन पंचायत के विकास में सत प्रतिशत योगदान दे पाते हैं ।रहे हैं ।ऐसा नहीं है कि सभी प्रधान गलत है कुछ प्रधान अलग करना चाहते हैं लेकिन शासन प्रशासन और स्थानीय स्तर पर पूर्ण सहयोग न मिलने के कारण वह इन कार्य योजनाओं को सही तरीके से लागू कर पाने में असमर्थ साबित होते हैं।

आज राजनीति के बदलते परिदृश्य में ग्राम प्रधान होना अपने आप में एक बड़ी बात है और समाज में यह राजनीतिक रसूख / रुतबा कायम करता है । आज के समय में प्रधान के चुनाव में भागीदारी करना बहुत महंगा हो गया है इसीलिए प्रधान/ पंचायत के प्रथम व्यक्ति/ प्रतिनिधियों द्वारा अपने चुनावी खर्चों को निकालने हेतु विकास योजनाओं में अप्रत्यक्ष रूप से हेर फेर को अंजाम देना शुरू कर दिया है ।उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विकास हेतु विभिन्न योजनाओं को चलाया जा रहा है जिसमें मॉडल पंचायत, सौर ऊर्जा, आंगनवाड़ी, स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा, अंत्येष्टि स्थल विकास योजना, पंचायत घरों का निर्माण, पुस्तकालयों का निर्माण, अमृत सरोवर योजना, सामुदायिक शौचालय, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, नलकूपों की स्थापना, सामुदायिक केन्द्, गौशाला, कचरा से कंचन कचरा केन्द्र, नाली आदि का निर्माण कार्य प्रमुख रूप से शामिल है, लेकिन प्रधान, ग्राम सचिव, रोजगार सेवको के द्वारा इन योजनाओं को धरातल पर सही तरीके से क्रियान्वित नहीं किया जाता।

इनमें आधे से अधिक योजनाओं को तो सिर्फ कागजो पर दिखाकर पंचायत निधि का दुरुपयोग कर लिया जाता है और मनरेगा के तहत बाहर नौकरी कर रहे स्थानीय निवासियों के फर्जी जॉब कार्ड बनाकर उनके खातों से अंगूठा लगाकर अवैध, फर्जी तरीके से धन-निकासी करना एक आम बात है जिसकी विभिन्न पंचायत में लगातार शिकायत है प्राप्त होती रहती हैं। जिस कारण उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज विभाग को भारी भरकम मात्रा में राजस्व की हानि होती है। ऐसा नहीं है कि जिला मुख्यालय में बैठे उच्च अधिकारियों को इन सब मामलों का संज्ञान नहीं होता है लेकिन मेरे दोस्त यह भारत है, यहां कुछ चले या ना चले, लेकिन जुगाड़ जरूर चलता है।

अनुज कुमार मिश्र खंड विकास अधिकारी हसायन
अनुज कुमार मिश्र खंड विकास अधिकारी हसायन

सभी अधिकारी और कर्मचारी गलत नहीं है लेकिन कुछ भ्रष्टाचारी रूपी मिठाई लेकर अधिकारी अपनी आंखों को बंद कर लेते हैं । जब कोई जागरूक नागरिक इन मुद्दों को लेकर के उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर और सूबे के ग्रामीण विकास मंत्रालय की कमान संभाल रहे केशव प्रसाद मौर्य उपमुख्यमंत्री, पंचायत राज विभाग के मुख्य विकास अधिकारी, पंचायत राज अधिकारी, डीसी (मनरेगा ), जिला विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी के कार्यालय में इनकी शिकायत करता है तब उनकी नींद खुलती है । वह बार-बार शिकायत करने के बाद जांच कमेटी का गठन करते हैं फिर उसके बाद मौके पर AC कार्यालय से बाहर निकलकर जमीन पर आकर भौतिक सत्यापन करने का कष्ट उठाते हैं और फिर उसके बाद शुरू होती है जांच प्रक्रिया जो जांच लगातार चलती रहती हैं।

इन सब के बीच पंचवर्षीय योजना बदल जाती है और जांच अधिकारियों का तबादला दूसरे जनपदों में हो जाता है। इस बीच उस जागरूक नागरिक को विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित करवाया जाता है लेकिन देशभक्ति के जज्बात में डूबा वह पागल व्यक्ति अपने घर परिवार की ओर ना देखते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाता रहता है और कई बार उसमें अपने प्राणों को न्यौछावर कर काल के गर्त में समा जाता है फिर उसके बाद अगला चुनाव आ जाता है।

देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पुरानी नहीं है लेकिन कैसे जोड़ तोड करके विकास कार्यों की योजनाओं में से धनराशि को निकालना/ खुर्द बुर्ध करके भारत के संघीय ढांचे को कमजोर किया जा रहा है। यह एक यक्ष प्रश्न हम सब भारतीयों के सामने खड़ा है लेकिन हम सब लोग दूसरे के घर में मंगल पांडे चाहते हैं अपने घर में नहीं। जब हमारी टीम ने पंचायत में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता को लेकर के कुछ मामलों को देखा तब हाथरस के कुछ मामले निकलकर सामने आए यह सिर्फ उदाहरण मात्र है !

Case: 01
ग्राम पंचायत : गुतहरा, विकासखंड: हसायन
निर्माण कार्य हेतु ईट रोड़ी और तालाब सफाई हेतु बार-बार अवैध तरीके से Rs1.70 और Rs 1.60 लाख धनराशि निकासी की शिकायत स्थानीय नागरिक पंकज कुमार द्वारा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आइजीआरएस पोर्टल के माध्यम से जन शिकायत की गई। जिसकी जांच लगातार चल रही है ।

Case:02
ग्राम पंचायत: लोधीपुर पट्टी देवरी
विकासखंड: हसायन
ग्राम पंचायत के विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के खिलाफ 9 सूत्रीय माँग पत्र स्थानीय निवासी विपिन कुमार द्वारा विकासखंड अधिकारी, हसायन कार्यालय हाथरस को दिया गया। जिसकी जांच ADO प्रेम किशोर यादव, अवर अभियंता हिमांशु सिंह और ग्राम विकास अधिकारी की कमेटी जांच कर रही है ।

Case : 03
ग्राम पंचायत: मोहब्बतपुर
विकासखंड :हाथरस
शिकायत कर्त्ता: अंकित सिंह
ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों के लिए अवैध धन निकासी और मनरेगा में बाहर नौकरी कर रहे स्थानीय नागरिकों के फर्जी जॉब कार्ड बनाकर उनके खाते से रोजगार सेवक द्वारा धन निकासी की शिकायत जिला पंचायत कार्यालय हाथरस में की गई। जिसकी जांच सत्येंद्र शर्मा, लोकपाल द्वारा की जा रही है ।

Case :04
ग्राम पंचायत: देवर पनाखर विकासखंड :सिकंदराराऊ
शिकायतकर्ता: पंकज कुमार आदि
इस ग्राम पंचायत में इस पंचवर्षीय योजना के दौरान पंचायत निधि से विकास कार्यों में हुई वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ वर्ष 2020 से लगातार शिकायतें जिला मुख्यालय के विभिन्न विभागों में की जा रही है ।

इन पंचायत के विकास कार्यों में हुए भ्रष्टाचार , वित्तीय अनियमितता, फर्जीवाड़ा को लेकर के जब हमारी टीम के द्वारा जिला मुख्यालय में पदस्थ अधिकारियों से दूरभाष पर उनका पक्ष जानना चाहा तब उनमें से कई लोगों का फोन बजता रहा, उठाया नहीं, आउट ऑफ कवरेज एरिया बताता रहा और कुछ अधिकारियों ने कहा कि जांच प्रक्रिया चल रही है उसके बाद ही कुछ जानकारी आपको दी जा सकती है ।

pandit deendayal upadhyay

एक तरफ केंद्र सरकार और राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास का वादा देश के लाल किले से करती है और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मिशन अंत्योदय को ध्यान में रखते हुए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के सर्वांगीण विकास हेतु समग्र संसाधनों को लगा करके उस अंतिम व्यक्ति को पंक्ति के पहले स्थान पर लाना चाहती है लेकिन कवि अदम गोंडवी ने सही ही कहा है कि-

तुम्हारी फाइलों में
गांव का मौसम गुलाबी है ।
मगर यह आंकड़े झूठे हैं
यह दावा किताबी है ॥

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