नई दिल्ली। दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस की इमारतों के खंभों में आती दरारें अबूझ पहले बनी हुई हैं। ये दरारें चौड़ी होती जा रही हैं, लेकिन इसका वास्तविक कारण अब भी नहीं पता है, क्योंकि वर्षों से बनी इस समस्या का अब तक किसी विशेषज्ञ संस्था से जांच नहीं कराई गई है। अब यह समस्या गंभीर होती जा रही है और जी-20 सम्मेलन के आयोजन के मद्देनजर जब इस बाजार का संरक्षण व सुंदरीकरण कराया जा रहा है तब इन दरारों के कारण का पता कराने और मरम्मत की मांग तेज हो गई है।
पिछले महीने एनडीएमसी के अधिकारियों के साथ व्यापारियों की बैठक में यह मांग उठाई गई तथा इसके लिए आइआइटी दिल्ली जैसे विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद लेने व दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन (डीएमआरसी) को भी साथ लेने की सलाह दी गई है, क्योंकि दरारें केवल खंभों में नहीं, बल्कि इमारतों में भी आई हैं।
खंभों पर टिका है इमारतों का गलियारा और पहला तल
इन खंभों पर कनॉट प्लेस की खूबसूरत इमारतों का गलियारा और पहला तल खड़ा है। अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1933 में तैयार यह बाजार 90 वर्ष पुराना है। मामले से जुड़े लोगों के अनुसार मामला जवाबदेही पर अटका है। नई दिल्ली नगर पालिका परिषद और दुकानदार एक-दूसरे पर इसके रखरखाव की जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
कारोबारियों के संगठन नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन का आरोप है कि दुकानदार खंभों की मरम्मत कार्य कराना चाहे तो भी एनडीएमसी की ओर से अवरोध खड़ा किया जाता है। कनॉट प्लेस की इमारतों में 3,000 खंभों में से 1,000 में दरारें देखी जा रही हैं।
जी व एच ब्लाक में दरारें ज्यादा
एनडीटीए के महासचिव विक्रम बधवार का दावा है कि खंभों के साथ ही इमारतों में दरारों का यह सिलसिला मेट्रो रेल सेवा के आने के बाद से शुरू हुआ है। कनॉट प्लेस में मेट्रो रेल सेवा वर्ष 2004-05 में पहुंची है।
पीली और नीली लाइन वाली भूमिगत मेट्रो सेवा कनॉट प्लेस के ए, बी, सी, ई, एफ, जी, एच व एम समेत कुल 16 ब्लाक के नीचे से गुजरती हैं। जी व एच ब्लाक के खंभों में ये दरारें ज्यादा हैं, क्योंकि पंचकुइयां की तरफ मेट्रो ट्रेन निकलती है। ऐसे में इसका बड़ा कारण मेट्रो ट्रेनों के गुजरने से होने वाला कंपन हो सकता है।
हम विशेषज्ञ नहीं
बधवार विक्रम बधवार ने कहा कि हम कोई विशेषज्ञ नहीं हैं। मेट्रो लाइन के गुजरने से खंभों व इमारतों में दरार के कयास हैं। इसके वास्तिवक कारणों का पता लगाना और मरम्मत अति आवश्यक है। इसलिए इसमें तेजी से पहल होनी चाहिए। फिलहाल, एनडीएमसी अधिकारियों ने इस संबंध में सवाल किए जाने पर कहा कि, यह उनका नहीं, बल्कि दुकानदारों का ही मामला है। वे मामले को देखें।







