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टैरिफ के बावजूद आर्थिक क्षेत्र में अमेरिका से आगे निकलता शेष विश्व

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 30, 2026
in विशेष, विश्व
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india-us trade deal
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prahlad sabnaniप्रहलाद सबनानी


नई दिल्ली: दिनांक 20 जनवरी 2025 को डॉनल्ड ट्रम्प अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति बनाए गए थे। वर्ष 2024 में ट्रम्प ने अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव “Make America Great Again” अर्थात “अमेरिका को पुनः महान बनाएं”, नारे के साथ जीता था। वर्ष 2025 का पूरा वर्ष भर पूरे विश्व ने ट्रम्प को अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में कार्य करते हुए देखा। लगभग पूरा 2025 का वर्ष ट्रम्प ने विभिन्न देशों से अमेरिका को होने वाले उत्पादों के आयात पर टैरिफ लगाते हुए बिताया और मित्र देशों सहित कई देशों से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर भारी भरकम टैरिफ लगाए। ट्रम्प का सोचना था कि टैरिफ को बढ़ाकर वे अन्य देशों से अमेरिका को होने वाले निर्यात को कम करेंगे और इससे अमेरिका में ही इन उत्पादों का उत्पादन प्रारम्भ हो जाएगा।

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ट्रम्प का संभवत: यह सोचना था कि उनका यह प्रयास अमेरिका को महान बनाते हुए शेष विश्व को विपरीत रूप से प्रभावित करेगा। परंतु, वर्ष 2025 में अमेरिका एवं शेष विश्व के आर्थिक क्षेत्र के आंकडें देखने पर ध्यान में आता है कि अमेरिका के मित्र राष्ट्रों सहित विभिन्न देशों से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर लगाए गए टैरिफ का असर अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर लगभग नहीं के बराबर पड़ा है। बल्कि, इसका खामियाजा अमेरिका के नागरिकों को भुगतना पड़ा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से अमेरिका में उत्पादों की कीमतों में बेतहाशा बृद्धि दर्ज हुई है, इससे मुद्रा स्फीति में वृद्धि तेज हुई है एवं अमेरिकी नागरिकों को विभिन्न उत्पादों को बढ़ी हुई कीमतों दरों पर खरीदना पड़ रहा है।

अमेरिकी नागरिक पिछले 5 वर्षों की तुलना में आज खाद्य सामग्री पर 30 प्रतिशत अधिक खर्च कर रहे हैं। अमेरिका में उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें 22 प्रतिशत से बढ़ चुकी हैं। खाद्य पदार्थों एवं मकान की कीमतों में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई हैं। अमेरिका में मुद्रा स्फीति की दर भी 3 से 4 प्रतिशत के बीच बनी हुई है, जो पिछले कई वर्षों की तुलना में बहुत अधिक है। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से परेशान हो रहा है अमेरिकी नागरिक, न कि अन्य कोई देश। श्री रुचिर शर्मा, भारतीय मूल के अमेरिकी लेखक एवं फायनैन्शल टाइम्स के स्तम्भ लेखक, ने अपने एक साक्षात्कार में कई आंकडें दिए हैं, जिनका प्रयोग इस लेख को तैयार करने में किया गया है।

अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों से अमेरिका को होने वाले आयात पर लगाए गए टैरिफ के पश्चात अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर कम होती हुई दिखाई दे रही है। वर्ष 2024 में अमेरिका में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 2.8 प्रतिशत की रही थी जो वर्ष 2025 में घटकर 2.1 प्रतिशत हो गई। जबकि वैश्विक स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर दोनों वर्षों, 2024 एवं 2025, में 2.8 प्रतिशत बनी रही है। वर्ष 2025 में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में किसी प्रकार की कमी दृष्टिगोचर नहीं हुई है।

भारत में सकल घरेलू उत्पाद में वर्ष 2024 में वृद्धि दर, 6.5 प्रतिशत की रही थी, जो वर्ष वर्ष 2025 में बढ़कर 7.2 प्रतिशत की हो गई। वर्ष 2024 में उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से 52 प्रतिशत देशों की प्रति व्यक्ति सकल उत्पाद में वृद्धि दर अमेरिका की तुलना में अधिक रही थी जबकि वर्ष 2025 में 76 प्रतिशत देशों की प्रति व्यक्ति सकल उत्पाद में वृद्धि दर अमेरिका की तुलना में अधिक रही है। वर्ष 2025 में उभरती अर्थव्यवस्थाओं में आर्थिक विकास दर तेज गति बढ़ती हुई पाई गई है। इस प्रकार, अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर लगाए गए टैरिफ के बावजूद शेष विश्व में सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर अमेरिका से अधिक रही है। इस प्रकार अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ का प्रभाव अन्य देशों के विकास पर विपरीत रूप से नहीं पड़ा है।

अमेरिका के पूंजी (शेयर) बाजार में भी वर्ष 2025 में निवेशकों को अपने निवेश पर कम आय प्राप्त हुई है। अमेरिका में निवेशकों द्वारा पूंजी (शेयर) बाजार में किए गए निवेश पर 18 प्रतिशत की आय का अर्जन हुआ है। जबकि, यूरोप में निवेशकों को 35 प्रतिशत, उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में निवेशकों को 34 प्रतिशत, अमेरिका को छोड़कर शेष विश्व में निवेशकों को 32 प्रतिशत एवं चीन में निवेशकों को 31 प्रतिशत की आय अर्जित हुई है।

इस प्रकार, अमेरिका की तुलना में अन्य देशों में पूंजी (शेयर) बाजार में निवेशकों को लगभग दुगनी आय अर्जित हुई है। अमेरिकी नागरिकों का पूंजी (शेयर) बाजार में निवेश तुलनात्मक रूप से अधिक है। अमेरिकी नागरिकों का जायदाद में निवेश 30 प्रतिशत है जबकि शेयर बाजार में 32 प्रतिशत निवेश है। चीन के नागरिकों का जायदाद में निवेश 55 प्रतिशत एवं शेयर बाजार में निवेश केवल 11 प्रतिशत है। इसी प्रकार, यूरोप के नागरिकों का निवेश क्रमश: 57 प्रतिशत एवं 16 प्रतिशत है। भारतीय नागरिकों के निवेश क्रमश: 50 प्रतिशत एवं 7 प्रतिशत है।

अमेरिका द्वारा अन्य देशों से अमेरिका में होने वाले आयात पर लगाए गए टैरिफ के चलते अमेरिका का राजकोषीय घाटा वर्ष 2024 के सकल घरेलू उत्पाद के 6.9 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2025 में 6 प्रतिशत हो गया है। एक रीसर्च प्रतिवेदन में यह तथ्य उभरकर भी सामने आया है कि टैरिफ के कारण अमेरिका में उत्पादों की कीमतों में वृद्धि हुई है एवं टैरिफ का लगभग 96 प्रतिशत भाग अमेरिकी नागरिकों द्वारा वहन किया गया है। इसके कारण अन्य देशों से अमेरिका को निर्यात कम नहीं हुए हैं।

यूरोप का राजकोषीय घाटा वर्ष 2024 के 3.1 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025 में 3.2 प्रतिशत हो गया है। उभर रही अर्थव्यवस्थाओं का राजकोषीय घाटा वर्ष 2024 के 4.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025 में 4.8 प्रतिशत हो गया है। पूर्व में विभिन्न देशों का राजकोषीय घाटा लगभग 3 प्रतिशत तक रहता आया है जबकि वर्तमान परिस्थितियों के मध्य, विभिन्न देशों का राजकोषीय घाटा बढ़ते हुए 6 प्रतिशत के स्तर तक रहने लगा है। यह स्थिति वित्तीय क्षेत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

वर्ष 2025 में विदेशी व्यापार में वृद्धि दर भी अमेरिका की तुलना में अन्य देशों में अधिक रही है। अमेरिका को छोड़कर शेष विश्व के निर्यात में वर्ष 2019 से 2024 के दौरान औसत 5 प्रतिशत की वृद्धि रही थी जो वर्ष 2025 में बढ़कर 6.4 प्रतिशत की हो गई है। जबकि अमेरिका से निर्यात में वृद्धि दर इसी अवधि के दौरान 4.6 प्रतिशत से गिरकर 4.1 प्रतिशत रह गई है। टैरिफ का अमेरिका से अन्य देशों को होने वाले निर्यात पर विपरीत प्रभाव पड़ा है जबकि अन्य देशों ने आपस में नए बाजारों की तलाश करते हुए अपने विदेशी व्यापार, विशेष रूप से निर्यात, में वृद्धि दर्ज की है।

कई देशों ने आपस में मुक्त व्यापार समझौते सम्पन्न किए हैं, इससे भी विभिन्न देशों के बीच विदेशी व्यापार में वृद्धि दर्ज हुई है। अमेरिका से अन्य देशों को निर्यात के कम होने के चलते अमेरिका में चालू व्यापार खाता घाटा 1.3 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका में आज भी उत्पादन की तुलना में उपभोग बहुत अधिक मात्रा में हो रहा है।

अमेरिका की टैरिफ नीति के चलते अमेरिका पुनः महान (MAGA) बनता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। परंतु, विश्व के अन्य कई देश जरूर महान बनते हुए दिखाई दे रहे हैं। अतः टैरिफ का असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को विपरीत रूप से प्रभवित करता हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि विश्व में अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। इस प्रकार, ट्रम्प इस धरा को महान बनाने (Make Earth Great Again – MEGA) में अपना योगदान करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

वैश्विक स्तर पर विपरीत परिस्थितियों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। भारत का राजकोषीय घाटा प्रति वर्ष लगातार कम हो रहा है। यह वर्ष 2024 में 5.5 प्रतिशत था, जो वर्ष 2025 में 4.8 प्रतिशत हो गया एवं अब वर्ष 2026 में घटकर 4.4 प्रतिशत रहने की सम्भावना व्यक्त की जा रही है। भारत को यदि विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बनाना है तो हमें भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 12 से 14 प्रतिशत वृद्धि के स्तर को प्राप्त करना होगा, जैसा कि चीन ने लम्बे समय तक अपनी अर्थव्यवस्था को इस दर पर आगे बढ़ाने में सफलता अर्जित की थी।

सकल घरेलू उत्पाद में यह महत्वाकांक्षी वृद्धि दर हासिल करना कोई असम्भव कार्य नहीं है। अमेरिका यदि भारत का सहयोग करने को तैयार नहीं है तो भारत को अन्य बाजार तलाशते हुए विभिन्न उत्पादों के निर्यात को बढ़ाना होगा। आज भारतीय अर्थव्यस्था मुख्यतः आंतरिक उपभोग पर आधारित है, जबकि उत्पादों के निर्यात को भी आज तेजी से बढ़ाने की आवश्यकता है। भारत द्वारा निर्यात के सामर्थ्य का उपयोग बहुत कम स्तर पर किया है।

 

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