Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राष्ट्रीय

न्याय पंचायत में अरावली पर विमर्श

उत्तरी कर्नाटक के गदग जिले में आयोजित अखिल भारतीय पंचायत परिषद के 18वें राष्ट्रीय सम्मेलन में पारंपरिक न्याय पंचायत को बढ़ावा देने के साथ शक्तियों के हस्तांतरण की मांग और "नो मोर टाइड फंडिंग" जैसा नारा लगता है: कौशल किशोर

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 5, 2026
in राष्ट्रीय, विशेष
A A
aravalli case
16
SHARES
547
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

कौशल किशोर


नई दिल्ली:  उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच अरावली विवाद का स्वतः संज्ञान लेकर पिछले फैसले पर रोक लगाती है। इसकी वजह से थार रेगिस्तान को उत्तर में दिल्ली से लेकर पश्चिम में अहमदाबाद तक पहुंचने की संभावना बढ़ती है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत के साथ इस पीठ में जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने नए निर्देश के अनुसार अब अरावली जिलों में खनन पर पहले की तरह ही प्रतिबंध लागू रहेंगे।

इन्हें भी पढ़े

skyroot vikram-1

अंतरिक्ष में भारत की ऊंची छलांग! 2030 तक $45 अरब का होगा स्पेस मार्केट

August 28, 2026
modi cabinet 2024

केंद्रीय मंत्रिपरिषद फेरबदल, इन नए चेहरों को मिल सकता है मौका

August 27, 2026
pm modi

पीएम मोदी ने ‘खेलो इंडिया डायलॉग’ में एथलीटों से किया संवाद, बोले-‘मुझे देश के युवाओं की शक्ति पर भरोसा’

August 27, 2026
indus water treaty

सिंधु जलसंधि से न‍िकलने से भारत को रोक नहीं सकते अंतरराष्‍ट्रीय कानून, पाकिस्तान की बोलती बंद?

August 27, 2026
Load More

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अरावली की पहाड़ियों की परिभाषा को समीक्षा की ज़रूरत है। इस काम के लिए उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति को काम सौंपने की बात हुई। इसमें पारिस्थितिक और हाइड्रोलॉजिकल प्रभावों का आकलन समेत पर्यावरण से जुड़े पहलु शामिल हैं। इस मामले में सरकार हाल के जन आंदोलनों को याद करते हुए बैकफुट की ओर रुख करने को मजबूर प्रतीत होती। अखिल भारतीय पंचायत परिषद के 18वें राष्ट्रीय अधिवेशन में जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जैसे पर्यावरणविदों की अपील का असर है कि अरावली के गांवों और समुदायों में न्याय पंचायतें सक्रिय हो गई है।

उन्होंने महत्वपूर्ण सवाल उठाया है। अरावली की नई परिभाषा पर बात कर न्याय पंचायत की अवधारणा का जिक्र किया। यह एहसास गहरा होता है कि न्याय की गारंटी फैसले पर आकर कैसे सिमट जाती है। इस पर सवाल उठाया जा सकता है कि क्या पुरानी पहाड़ियों में से एक अरावली दो अरब साल पुरानी है या नहीं? लेकिन यह बात सवाल से परे है कि इस अरावली की श्रृंखला 600 – 700 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए दिल्ली और अहमदाबाद को जोड़ती है। थार रेगिस्तान को राजस्थान के सीमित क्षेत्रों में समेटती है। गुजरात, हरियाणा और राजस्थान के अन्य हिस्सों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी को भी इसने रेगिस्तान बनने से बचाया है। जस्टिस एम.एन. वेंकटचलैया का उन्होंने ज़िक्र किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल पहले के उस फैसले में इसकी निंदा की थी, जब राजस्थान की सरकार 100 मीटर की गाइडलाइन को लागू करने की कोशिश में थी।

अरावली की पारिस्थितिक संरचनाओं को फिर से परिभाषित करने के लिए रिटायरमेंट से तीन दिन पहले पूर्व चीफ जस्टिस बी.आर. गवई की अध्यक्ष ता वाली पीठ ने वह फैसला सुनाया है। इसमें 100 मीटर से नीचे लक्ष्मण रेखा खींच कर माइनिंग की सीमा तय किया है।

पंचायत परिषद अधिवेशन: अखिल भारतीय पंचायत परिषद के 18वें राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन कर्नाटक के मुख्य मंत्री सिद्धारमैया के बदले पर्यटन, कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच.के. पाटिल ने किया। उत्तरी कर्नाटक के गदग जिले में सहकारिता आंदोलन चलाने के कारण हुलकोटी के पाटिल लंबे समय से चर्चा में हैं। दो दिनों का यह आयोजन नागवी गांव में स्थित महात्मा गांधी ग्रामीण विकास और पंचायत राज विश्वविद्यालय के परिसर में संपन्न हुआ।

यह कार्यक्रमों की ऐसी श्रृंखला है जो एक ओर गांव और पंचायत के लोगों का कुंभ मेला प्रतीत होता है तो दूसरी ओर ‘ए ग्रामर ऑफ पॉलिटिक्स’ में प्रस्तावित हेरॉल्ड लास्की के स्व-शासन की शताब्दी। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के विद्वान की वह किताब 1925 में प्रकाशित हुई थी। और इसके पहले राष्ट्रीय राजधानी में 2008 में आखिरी बार ऐसा ही सम्मेलन हुआ था। इसका उद्घाटन तत्कालीन लोक सभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने किया था। 1958 में पहली बार झारखंड में देवघर के समीप स्थित जसीडीह में जयप्रकाश नारायण, बलवंतराय मेहता के साथ पंडित बिनोदानंद झा ने यह परंपरा शुरू किया था। उन दिनों जसीडीह बिहार का हिस्सा होता था।

पंचायत को समर्पित अपने उद्घाटन भाषण में कर्नाटक के पर्यटन, कानून व संसदीय मामलों के मंत्री एच.के. पाटिल ब्रिटेन के प्रधान मंत्री रहे विंस्टन चर्चिल को उद्धरित करते हैं। लॉर्ड ब्रिकेनहेड की चुनौती याद दिलाते हैं। मोदी और योगी जैसे भाजपा नेताओं के हाथों से सरकारी काम-काज में पारदर्शिता हेतु शीर्ष पुरस्कार प्राप्त करने के कारण सुर्खियों में रहे पाटिल महात्मा गांधी को समर्पित इस ग्रामीण विकास और पंचायत राज विश्वविद्यालय की स्थापना और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके साथ में खड़े हैं कर्नाटक के नीति व योजना आयोग के उपाध्यक्ष डी.आर. पाटिल। उन्होंने 29 विभागों से जुड़ी शक्तियों के शीघ्र हस्तांतरण को पंचायत का अधिकार करार दिया है। इसके साथ ही बाल गंगाधर तिलक की तरह नारा बुलंद करते हुए संघर्ष का आह्वान करते हैं।

स्वतंत्रता संग्राम का लोकप्रिय नारा ‘स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ गढ़ने वाले मराठा और केसरी के संपादक तिलक का वर्णन 115 साल पहले शक्तिशाली ब्रिटिश पत्रकारों में शामिल रहे वैलेंटाइन शिरोल ने किया था। उनके लिए भारतीय राष्ट्रीय क्रांति के जनक की उपमा दी गई थी। इसे ध्यान में रखते हुए अखिल भारतीय पंचायत परिषद की महापंचायत में राज्यों की स्थिति पर मध्यावधि सर्वेक्षण की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किया है। इसके परिणामस्वरूप विभिन्न राज्यों में काम कर रही परिषद और राज्य के संबंधित विभागों से सभी प्रमुख मापदंडों पर गहन परीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का प्रस्ताव पारित किया गया है।

पाटिल ने जल पुरुष राजेंद्र सिंह और गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष ए. अन्नामलाई को आमंत्रित किया था। गांधी की 1909 में छपी हिंद स्वराज के साथ ही 2015 से संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में शामिल रहे सतत विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) का जायजा लेने के वास्ते। न्याय की उद्दात अवधारणा का पतन व फैसले की राजनीति पर चर्चा छिड़ी। इसमें गांव और पंचायत के कर्तव्यों को फिर से दोहराया गया। अच्छे काम की पहचान और सराहना से लेकर बुराइयों की निंदा और दंड तक विचार हुआ।

अन्नामलाई गांधी के हिंद स्वराज का उल्लेख करते हैं। फिर बैलगाड़ी से दफ्तर पहुंचने वाले योजना आयोग के सदस्य जे.सी. कुमारप्पा के इस्तीफे की कहानी सुनाते हैं। भारतीय कला और संस्कृति के प्रवक्ता रहे श्रीलंकाई मूल के तमिल आनंद कुमारस्वामी को याद करते हैं। प्राणजीवन मेहता, मानवविज्ञानी निर्मल कुमार बोस और आदिवासी के समर्थक ठक्कर बापा जैसे बुद्धिजीवियों की याद बरबस दिलाते हैं।

परिषद के नेता सुबोध कांत सहाय के सहयोगी अनिल शर्मा व ध्यान पाल सिंह अहम प्रस्ताव प्रस्तुत करते हैं। गांधी युग के बाद ग्राम स्वराज के समर्थक रहे जयप्रकाश नारायण, डॉ. लाल सिंह त्यागी, पं. बिनोदानंद झा, एस.के. डे और बलवंतराय मेहता को याद करते हैं। राम कृष्ण हेगड़े मॉडल के साथ एस. निजलिंगप्पा, सुचेता कृपलानी और के. कामराज जैसे नेताओं के सौजन्य से 1966 में शुरू किए स्कूल ऑफ़ स्टेट्समैनशिप का जिक्र करते हैं। ध्यान पाल सिंह कहते कि शहर में रहने वाले नागरिक होते और गांव में रहने वाले ग्रामीण कहलाते।

भारत के संविधान का अनुच्छेद 5 नागरिकता और राष्ट्रीयता को परिभाषित करता है। यह ग्रामीण और आदिवासियों को नागरिक में बदलने का खेल है। उनकी असली पहचान चुराने का मामला है। साथ ही इन लोगों को नागरिक होने का दावा करने के लिए मजबूर करती है। ग्रामीण और आदिवासी की सही पहचान हो सके इसके लिए उन्होंने संविधान संशोधन की मांग दोहराया है। स्पष्ट किया है कि ऐसे संशोधन के अभाव में हिंद स्वराज का जिक्र करने का किसी को कोई हक नहीं है।

अनिल शर्मा ने न्याय पंचायत पर ज़ोर दिया। पंचायती न्याय का तरीका सिखाने वाले का जिक्र करते हुए अक्षपाद गौतम, उद्योतकर, वात्स्यायन, प्रभाकर और उदयन का नाम लेते हैं। पश्चिम बंगाल के नदिया ज़िले में हुगली नदी के किनारे लगभग एक हज़ार साल पहले नव्य न्याय का नबद्वीप स्कूल स्थापित किया गया। पुराने चतुष्पाठी केंद्र का पुनरुद्धार भी प्रस्तावों में शामिल है। न्याय मीमांसा में लगे वाचस्पति की याद आती। पंचायत के बेहतर कामकाज के लिए इस स्कूल को फिर से शुरू करने के मकसद से 5 सदस्यों वाली विशेषज्ञ समिति का प्रस्ताव पारित किया है।

समापन सत्र का नेतृत्व करते हुए वेंकटराव घोरपड़े ने अध्यक्षीय भाषण में इन कार्यक्रमों को स्पॉन्सर करने के लिए पंचायत राज मंत्री प्रियंका खड़गे की सराहना करते हैं। उन्होंने “नो मोर टाइड फंडिंग” का नारा बुलंद किया। कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में यह कोई मुश्किल सवाल नहीं है, लेकिन भारत के कई अन्य हिस्सों में शहरी और ग्रामीण इलाकों में स्थानीय पंचायत इतने सक्षम नहीं हैं। कम से कम प्लानिंग के मामले में।

एच.के. पाटिल कर्नाटक में 2013 से 2018 तक ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री थे। अलग ग्रामीण विकास और पंचायती राज विश्वविद्यालय की स्थापना उनके महत्वपूर्ण कार्यों में एक है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के व्यापक विकास के लिए 2025 की शुरुआत में इसे महात्मा गांधी को समर्पित किया था। उन्होंने प्रतिबद्धता जताई कि विश्वविद्यालय को इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए रिसर्च और डेवलपमेंट प्रोजेक्ट चलाने में सक्षम हो। न्याय पंचायत से संबंधित ट्रेनिंग कार्यक्रम इस कड़ी में अगला शैक्षणिक प्रयोग हो सकता है।

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और लेबर पार्टी के नेता हेरोल्ड लास्की स्थानीय स्वशासन के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने एस.के. डे, कृष्ण मेनन और नेहरू को प्रभावित किया। राजनीति के व्याकरण पर उनकी किताब पंचायती राज के छात्रों के लिए एक सार्थक कोर्स मटेरियल साबित हो सकती है। गंगाेश उपाध्याय व डा. किर्त्यानंद झा न्याय की हज़ार साल पुरानी परंपरा के दो विपरीत छोर पर खड़े हैं। कुछ साल पहले ही बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और मिथिला यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर डा. झा परलोक सिधार चुके हैं। ऐसे में ऑल इंडिया रेडियो के पूर्व प्रोड्यूसर और एडिटर सुरेंद्र झा भारतीय न्याय परंपरा को ज़िंदा करने के लिए समर्पित विशेषज्ञों की टीम का नेतृत्व करने में सक्षम हो सकते हैं।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल

जगदीप धनखड़: सही पसंद

July 25, 2022
Nitish Kumar

बिहार के बदले सियासी समीकरण और नीतीश के बयान वायरल क्यों?

January 29, 2024

नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति नागपुर की छमाही बैठक एवं पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न

May 23, 2026
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • किन सब्जियों को साथ खाने से हो जाती है पथरी? दूर कर लीजिए सारे शक
  • अंतरिक्ष में भारत की ऊंची छलांग! 2030 तक $45 अरब का होगा स्पेस मार्केट
  • ग्रहण मोक्ष के बाद घर और मंदिर में गंगाजल कैसे छिड़कें? जानिए इसका महत्व

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.