नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की बीजेपी सरकार पर सरकारी स्कूलों में किताबों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। अब दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इन आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली शिक्षा विभाग की प्रगति को रोकने के लिए करने के लिए आम आदमी पार्टी ‘हूट एंड शूट’ राजनीति का सहारा ले रही है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान किताब, टेंडर से जुड़ा आदेश, मापने के लिए एक स्केल भी दिया। उन्होंने कहा कि तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर इन आरोपों की सच्चाई को परखा जा सकता है।
उन्होंन पार्टी की अंदरूनी खींचतान की ओर इशारा करते हुए कहा, उनकी पार्टी में नए ‘छोटू’ आ गए हैं। पुराने और बड़े छोटुओं की प्रासंगिकता नए और छोटे छोटुओं से अधिक बनी रहे, इसलिए बेरोजगार नेता अपनी राजनीतिक दुकान चलाने के लिए झूठ फैला रहे हैं। बड़े छोटुओं और छोटे छोटुओं की इसी अंदरूनी लड़ाई में ये नेतृत्वविहीन नेता निराधार आरोप लगाते फिर रहे हैं। कक्षा 8 की हिंदी किताब ‘मल्हार’ की खरीद को लेकर लगाए गए आरोपों पर जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री ने वर्तमान सरकार की खरीद प्रक्रिया की तुलना पिछली AAP सरकार के कार्यकाल में हुई खरीद से की।
आशीष सूद ने कहा, आम आदमी पार्टी ने एनसीईआरटी द्वारा पुस्तक 65 रुपए में बेचे जाने को लेकर सवाल उठाए, जबकि दिल्ली सरकार ने ‘मल्हार’ पाठ्यपुस्तक 28.61 रुपए में खरीदी। उन्होंने कहा किसाल 2022 में पिछली AAP सरकार के कार्यकाल में समान आकार की गृह विज्ञान किताब की छपाई 55 रुपए में कराई गई थी, जो अभी की कीमत से लगभग दोगुनी है।
मंत्री ने बताया कि टेंडर में किताबों का आकार 17.1 सेंटीमीटर × 24.1 सेंटीमीटर तय किया गया था, जो तय मानक के अनुरूप है। उन्होंने पत्रकारों से उपलब्ध कराए गए स्केल की मदद से किताबों का माप लेकर खुद इसकी पुष्टि करने की अपील की। मंत्री ने कहा, पिछली आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में कुछ किताबों की कीमत 110 और 133 रुपए तक थी, जबकि अभी की सरकार ने अधिकतम किताब की कीमत 51 तक सीमित रखा है।
जांच के बाद सख्त कार्रवाई की चेतावनी
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि समीक्षा पूरी होने के बाद जानबूझकर गलत जानकारी फैलाने और जनता को गुमराह करने के मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या था आप का आरोप?
आप के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने शुक्रवार को आरोप लगाया था कि दिल्ली के सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए मुफ्त किताबों की छपाई में 40 फीसदी कमीशन लिया गया। पार्टी ने दावा किया कि इन किताबों की छपाई घटिया कागज पर की गई। उन्होंने दावा किया कि कक्षा एक से आठ तक के छात्रों के लिए छापी गई किताबें टेंडर में बताई गई शर्तों के मुताबिक नहीं थीं।







