सतीश मुखिया
मथुरा:जयगुरुदेव आश्रम में आयोजित पांच दिवसीय वार्षिक भण्डारा सत्संग मेला के पहले दिन राष्ट्रीय उपदेशक बाबूराम और सतीश चन्द्र ने श्रद्धालुओं को मानव तन, सतगुरु की महिमा को बताया और बाबा जयगुरुदेव महाराज के वचन वाणियों को याद कराया। बाबूराम ने ‘‘पढ़ना लिखना चातुरी यह तो बात सहल, काम दहन मन वश करन, गगन चढ़न मुश्किल।’’ पंक्ति को उद्धृत करते हुये कहा कि पढ़ाई-लिखाई और नौकरी व चतुराई करना आसान काम है लेकिन काम यानि वासनाओं को खत्म करना, मन को वश में करना और जीवात्मा को शब्द (नाम) के साथ जोड़ना ये तीन काम करना बहुत मुश्किल है।
हम लोग बड़े भाग्यशाली हैं, यह अनमोल मानव तन मिला हुआ है और सत्गुरु का सानिध्य प्राप्त हुआ है। यदि ये तीन काम नहीं किये तो मानव जीवन बेकार हो जायेगा। मानव तन की महिमा का वर्णन नहीं किया जा सकता है। देवता इस तन को पाने के लिये याचना करते हैं, लेकिन मिलता नहीं है। इस तन में दसवां दरवाजा है जिसका भेद सत्गुरु के सत्संग में मिलता है। यह दसवां दरवाजा गुरु की दया कृपा से जब खुल जाता है तो जीवात्मा शब्द को पकड़ कर अपने निजघर सतलोक पहुंच जाती है। जन्म मरण के बन्धन से सदा के लिये छुटकारा पा जाती है। जब भी साधक अपने गुरु आदेश के पालन से अलग होने लगता है तो उसके पतन की शुरुआत हो जाती है।
इसलिये बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के द्वारा चलाये गये शाकाहार-सदाचार, मद्यनिषेध के प्रचार अभियान में निरन्तर लगे रहें। जब तक आप ईमानदारी और मेहनत से घर, दुकान, दफ्तर का काम करते रहे तब तक खुशहाल थे। बुरी संगत से परमार्थ चला जाता है। इसलिये सत्य का संग अधिक से अधिक करना चाहिये।
सतीश चन्द्र ने कहा कि सतयुग, त्रेता और द्वापर ये तीनों युग ब्रह्म निरंजन के अधीन हैं। इनमें उनकी शक्तियां अवतरित होती हैं। केवल कलयुग में संतों को अधिकार मिला हुआ है। जब तक संत संकेत नहीं करेंगे युग परिवर्तन नहीं होगा। बाबा जयगुरुदेव जी महाराज ने कलयुग में कलयुग के जाने और कलयुग में सतयुग के आने की भविष्यवाणी की है। बाबा जी ने काशी में यज्ञ कराकर शंकर भगवान को खुश किया और जीवों कोे समझाने के लिये समय मांग लिया।







