प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने सावन 2025 में होने वाली कांवड़ यात्रा के लिए ‘मुख्यमंत्री धार्मिक उत्सव योजना’ के तहत नई नीति शुरू की है। इसका उद्देश्य कांवड़ यात्रियों की सुविधा, आयोजनों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार को खत्म करना है।
नई कांवड़ नीति की विशेषताएं
सभी कांवड़ शिविरों को 1200 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्रदान की जाएगी। बिजली का खर्च दिल्ली सरकार वहन करेगी, जिससे समितियों पर कोई आर्थिक बोझ न पड़े। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) कांवड़ समितियों को टेंडर प्रक्रिया के बिना सीधे DBT के माध्यम से आर्थिक सहायता दी जाएगी।
सहायता राशि 50,000 रुपये से 10 लाख रुपये तक होगी, जो चार श्रेणियों में विभाजित है। राशि का भुगतान दो किस्तों में: 50% अग्रिम और 50% आयोजन के बाद, निर्धारित समय में कार्य पूरा होने पर।
सिंगल विंडो सिस्टम
समितियों को जिला मजिस्ट्रेट (DM) कार्यालय में आवेदन करना होगा। सभी अनुमतियां 72 घंटे के भीतर सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए दी जाएंगी, जिससे प्रक्रिया तेज और आसान होगी।
रजिस्टर्ड समितियों को 30 जुलाई तक पंजीकरण पूरा करना होगा। सांसद और विधायक समितियों के रजिस्ट्रेशन के लिए सिफारिश कर सकते हैं। प्रक्रिया को सरल बनाने का दावा किया गया है।
सुरक्षा और निगरानी के इंतज़ाम !
SDM स्तर के अधिकारी समितियों की निगरानी करेंगे। आयोजनों की जियो-टैगिंग के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। दिल्ली पुलिस, सिविल डिफेंस, और स्वयंसेवकों के साथ मिलकर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी।
कांवड़ शिविरों में डॉक्टर, सिक्योरिटी, टैंकर, और सैनिटेशन जैसी सुविधाएं दिल्ली सरकार प्रदान करेगी।‘मुख्यमंत्री धार्मिक उत्सव समिति’ का गठन किया जाएगा, जो सभी विभागों के साथ समन्वय स्थापित करेगा।
क्या है नीति का उद्देश्य !
पारदर्शिता और भ्रष्टाचार उन्मूलन: पुरानी टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की शिकायतें थीं। DBT और सिंगल विंडो सिस्टम से इसे खत्म करने का दावा। शिव भक्तों की सुविधा: कांवड़ यात्रियों के लिए बेहतर व्यवस्था और सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि “यह नीति “कम सरकारी हस्तक्षेप, अधिक जनता की सेवा” के सिद्धांत पर आधारित है।
जो कांवड़ यात्रा वर्षों तक अव्यवस्था, अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का शिकार रही वह अब दिल्ली में सेवा, पारदर्शिता और सुशासन का प्रतीक बनेगी।
पूर्ववर्ती सरकारों के समय कांवड़ शिविरों में वित्तीय गड़बड़ियों, अनुमति में देरी, और समितियों के शोषण की कई शिकायतें सामने आती थीं। समितियों… pic.twitter.com/JzVAB0epXF
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) June 24, 2025
दिल्ली में हर साल सावन में लाखों कांवड़ यात्री गुजरते हैं। पहले टेंडर प्रणारी में कुछ लोगों का दबदबा था, जिससे धन सीधे समितियों तक नहीं पहुंचता था। सरकार ने समितियों और यात्रियों के फीडबैक के आधार पर यह नीति तैयार की है। कैबिनेट ने 24 जून को इस नीति को मंजूरी दी।
दिल्ली सरकार की नई कांवड़ नीति कांवड़ यात्रा को सुगम बनाने और समितियों को पारदर्शी सहायता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुफ्त बिजली, DBT और सिंगल विंडो सिस्टम जैसे उपायों से यह यात्रियों और आयोजकों के लिए सुविधाजनक हो सकती है। रजिस्ट्रेशन और निगरानी की प्रक्रिया की सफलता इस नीति के प्रभाव को तय करेगी।







