नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान की लड़ाई के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से जहां दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं मुसीबत में घिरी हैं. अमेरिका से चीन तक की सरकार को स्थिति से निपटने के लिए अपने नागरिकों पर महंगे तेल का बोझ डालना पड़ा, वहीं भारत इन सभी चुनौतियों के बीच हिमालय जैसा अडिग खड़ा है. अब तो विश्व बैंक ने भी उसकी तारीफ के कसीदे गढ़ने शुरू कर दिए हैं. विश्व बैंक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में जो बताया, उसे सुनकर तो हर भारतीय का सीना 56 इंच का हो जाएगा.
विश्व बैंक ने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया में क्या हो रहा, उससे भारत को ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला. भारत मौदूगा एनर्जी संकट का सामना करने के लिए बेहतर स्थिति में है. उसके पास पर्याप्त बफर है, जिसमें बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार, मजबूत राजकोषीय स्थिति और कम महंगाई सबसे बड़ा हथियार है. यह सभी मिलकर भारत को ग्लोबल चुनौतियों से लड़ने के लिए सक्षम बनाएंगे. विश्व बैंक ने कहा कि भारत ने पिछले वित्तवर्ष में भी कारोबारी अस्थिरता का अच्छी तरह से सामना किया, जिसमें टैरिफ वार के साथ निर्यात पर आया जोखिम भी शामिल था.
क्यों है विश्व बैंक को इतना भरोसा
विश्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक (दक्षिण एशिया) सेबास्टियन एकार्ड ने कहा कि भारत के पास मजबूत नीति बफर, उच्च विदेशी मुद्रा भंडार, जरूरत पड़ने पर समर्थन देने के लिए राजकोषीय गुंजाइश, कम महंगाई और मजबूत विकास की गति है. उसकी ग्रोथ सकारात्मक नीतियों पर आधारित है, जिसमें यूरोपीय यूनियन के साथ मुक्त व्यापार समझौता, नया श्रम कानून आदि शामिल हैं. ये सभी चीजें विकास की गति को मजबूत करती हैं. वैश्विक चुनौतियों के बावजूद हम देखते हैं कि भारत और यह क्षेत्र अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बहुत मजबूत प्रदर्शन कर रहा है.
विकास दर को लेकर भी पूरा यकीन
इससे पहले विश्व बैंक ने बुधवार को जारी अपनी साउथ एशिया इकोनॉमिक अपडेट रिपोर्ट में कहा था कि भारत की विकास दर वित्तवर्ष 2025 में 7.1 फीसदी से बढ़कर वित्तवर्ष 2026 (अप्रैल 2025-मार्च 2026) में 7.6 फीसदी होने का अनुमान है. इसका कारण मजबूत घरेलू मांग और निर्यात में मजबूती लाना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्तवर्ष 2027 में विकास दर घटकर 6.6 फीसदी रह सकती है, जिस पर पश्चिम एशिया के ताजा संकट का सबसे ज्यादा असर पड़ा है. विश्व बैंक के प्रमुख अर्थशास्त्री ऑरेलियन क्रूज ने कहा कि भारत वित्तवर्ष 2026 में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहा, जबकि उसके निर्यात पर वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक शुल्क लगाए गए.
महंगे क्रूड का सबसे ज्यादा जोखिम
क्रूज ने कहा कि अभी तक भारत ने बहुत म जबूत प्रदर्शन और लचीलापन दिखाया है, लेकिन मौजूदा स्थिति बड़ा व्यापारिक झटका साबित हो सकती है. यही वजह है कि भारत की विकास दर चालू वित्तवर्ष में करीब 1 फीसदी तक नीचे जा सकती है. विश्व बैंक ने यह अनुमान कच्चे तेल की कीमत 90 से 100 डॉलर के बीच बने रहने के आधार पर जताया है. अगर क्रूड सस्ता होता है तो भारत की विकास दर में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है.







