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भारत के ल‍िए संजीवनी बना ईरान-अमेरिका सीजफायर!

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 9, 2026
in विश्व
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iran-us ceasefire
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नई दिल्ली:  ईरान और अमेरिका के बीच 14 दिनों के सीजफायर से भारत को तात्कालिक तौर पर बड़ा फायदा मिलने जा रहा है. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों का संकट टला है, बल्कि खाड़ी देशों में रहने वाले करोड़ों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार अब पहले से अधिक आश्वस्त है. विदेश मंत्रालय के सूत्रों की मानें तो यह 14 दिन भारत के लिए ‘ऑपरेशनल’ तौर पर बेहद महत्वपूर्ण हैं.

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय फारस की खाड़ी और होर्मुज में फंसे उसके मालवाहक जहाज थे. युद्ध की स्थिति में होर्मुज के पश्चिम में स्थित फारस की खाड़ी एक डेथ ट्रैप बन गई थी. भारत के 16 जहाज वहां फंसे हुए थे, जिन पर लगातार हमले का खतरा मंडरा रहा था. अब इस 14 दिनों के सीजफायर ने एक सेफ कॉर‍िडोर द‍िया है. उम्मीद है कि इन द‍िनों में ये सभी 16 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से भारतीय तटों पर पहुंच जाएंगे.

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LPG और कच्चे तेल की आपूर्ति

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में खाड़ी देशों पर निर्भर है. सरकार के मुताब‍िक- सीजफायर की वजह से LPG यानी रसोई गैस की सप्‍लाई में बाधा आ रही थी, वह अब फिर से पटरी पर लौट आएगी. जहाजों की बेरोकटोक आवाजाही से भारत में ईंधन की कीमतों और स्टॉक पर पड़ने वाला दबाव कम होगा.

1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा

खाड़ी के देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं. पिछले 40 दिनों की जंग के दौरान 8 भारतीयों की मौत ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है. सीजफायर के कारण उन देशों के हवाई मार्ग फिर से खुल गए हैं, जो युद्ध की वजह से ‘नो फ्लाई जोन’ बन चुके थे. इससे खाड़ी देशों से भारतीयों की भारत वापसी हो पाएगी.

युद्ध के साये में जी रहे भारतीय प्रवासियों और उनके परिवारों के लिए यह 14 दिन किसी बड़े सुकून से कम नहीं हैं. भारत की प्राथमिकता अब यह है कि इस सीजफायर को स्थायी शांति में बदला जाए ताकि भविष्य में किसी भारतीय नागरिक को अपनी जान न गंवानी पड़े.

ईरान के भीतर वर्तमान में लगभग 7500 भारतीय मौजूद हैं. संघर्ष विराम का सबसे बड़ा रणनीतिक लाभ इन्हीं भारतीयों को सुरक्षित निकालने में मिलेगा.

नया रूट बना आर्मेनिया और अजरबैजान

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, ईरान के दक्षिणी हिस्से में बड़ी संख्या में भारतीय मछुआरे और नाविक फंसे हुए थे. युद्ध के कारण वे देश के उत्तरी हिस्से तक नहीं पहुंच पा रहे थे, जहां से निकलना आसान होता है. अब संघर्ष विराम के बाद स्थितियां बदल गई हैं: दक्षिणी ईरान में फंसे भारतीय अब सड़क मार्ग से उत्तर की ओर बढ़ सकते हैं. भारतीय दूतावास ने निर्देश जारी किए हैं कि लोग जल्द से जल्द समन्वय स्थापित करें. अब इन भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित भारत वापस लाया जा सकता है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, भारत इस स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए है. भारतीय दूतावास लगातार ईरान में फंसे नागरिकों के संपर्क में है. सरकार की प्राथमिकता है कि संघर्ष विराम के इस समय का अधिकतम लाभ उठाकर हर एक भारतीय को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए. मछुआरों और नाविकों के लिए विशेष कोऑर्डिनेशन डेस्क काम कर रही है ताकि उन्हें भौगोलिक चुनौतियों और युद्ध के मलबे से बचाकर निकाला जा सके.

चुनौतियां बरकरार, लेकिन उम्मीद कायम

भले ही यह 14 दिन भारत को बड़ी राहत दे रहे हैं, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक ‘पॉज बटन’ है, ‘स्टॉप बटन’ नहीं. पश्चिम एशिया की चुनौतियां अभी भी जटिल हैं. भारत के लिए चुनौती यह है कि अगर 14 दिन बाद फिर से संघर्ष शुरू होता है, तो वह अपने रणनीतिक हितों की रक्षा कैसे करेगा?

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