नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार 1 दिसंबर 2025 से शुरू हो रहा है. इस बार सरकार अपने बड़े सुधारों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, खासकर नागरिक परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने वाले कानून को पेश करने के साथ. वहीं, विपक्ष 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची (इलेक्टोरल रोल) की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर सरकार को घेरने की योजना बना रहा है. तीन हफ्ते चलने वाला यह सत्र बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी-नीत एनडीए की बड़ी जीत के बाद हो रहा है. माना जा रहा है कि इस जीत से सरकार के सुधार एजेंडे को और तेज़ी मिलेगी, क्योंकि मानसून सत्र लगभग बेनतीजा रहा था.
शीतकालीन सत्र में कुल 15 बैठकें होंगी. सरकार का प्रमुख बिल ‘द एटॉमिक एनर्जी बिल, 2025’ है, जो देश में परमाणु ऊर्जा के उपयोग और नियमन का ढांचा तय करेगा. इसके साथ ही हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल और अन्य आठ विधेयक भी पेश किए जाने की योजना है. सरकार को पहले ही चंडीगढ़ के लिए राष्ट्रपति को सीधे नियम बनाने का अधिकार देने वाले प्रस्तावित कानून को विरोध के कारण पीछे हटाना पड़ा है. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने रविवार को सभी दलों के फ्लोर लीडरों की बैठक बुलाई है, ताकि सत्र के दौरान बेहतर समन्वय बनाया जा सके.
विपक्ष का किन मुद्दों पर रहेगा फोकस?
विपक्ष SIR के मुद्दे के साथ-साथ दिल्ली की वायु प्रदूषण की समस्या को भी संसद में उठाने की तैयारी में है. सरकार जिन अहम विधेयकों को लाने जा रही है, उनमें हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अधिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता देने के लिए नया ढांचा तैयार करता है. यह उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए एक पारदर्शी मान्यता और स्वायत्तता प्रणाली लागू करेगा. नेशनल हाईवे (अमेंडमेंट) बिल का लक्ष्य राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है.
किस कानून में होगा बदलाव?
इसी तरह कॉरपोरेट लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 कंपनियों के कानून 2013 और LLP एक्ट 2008 में बदलाव करके कारोबार करना आसान बनाने का प्रावधान करेगा. सरकार सिक्योरिटीज मार्केट्स कोड बिल, 2025 भी लाने वाली है, जो SEBI एक्ट, डिपॉजिटरी एक्ट और सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट रेगुलेशन एक्ट को मिलाकर एक नया संयुक्त कानून बनाएगा. इसके अलावा मध्यस्थता (Arbitration) और सुलह कानून में भी बदलाव की तैयारी है. कानून मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की एक टिप्पणी और धारा 34 में संशोधन की आवश्यकता को देखते हुए इसे विशेषज्ञ समिति के पास भेजा गया है, जिसके आधार पर नया संशोधन प्रस्ताव तैयार होगा.







