प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नोएडा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में नोएडा में हिन्दू समाज की एकता, सांस्कृतिक चेतना और आत्मगौरव को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भव्य हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में बीते रविवार को नोएडा के सेक्टर-12 और सेक्टर-56 में दो बड़े हिन्दू सम्मेलनों का सफल आयोजन हुआ। आगामी 15 फरवरी तक नोएडा में कुल 140 हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन प्रस्तावित है।

सेक्टर-12 में हुआ सांस्कृतिक एवं वैचारिक संगम
सेक्टर-12 में आयोजित सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पद्म सिंह मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने संघ की सौ वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए समाज में पंच परिवर्तन के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता गोपी शाह महाराज ने की। उन्होंने हिंदुत्व की विशेषताओं, वर्तमान चुनौतियों तथा उनके समाधान पर प्रेरक उद्बोधन दिया।
कार्यक्रम में सामाजिक संस्था नेह नीड के बच्चों द्वारा शिव तांडव, भगवान श्रीराम की जीवनी तथा पर्यावरण संरक्षण पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियाँ दी गईं। वहीं रामचरित मानस सुंदरकांड समिति द्वारा भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।
सम्मेलन समिति की अध्यक्षा ऋतू चौहान ने हिन्दू समाज की एकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन बृजेश चौहान ने किया। विश्व हिन्दू परिषद के जिला महामंत्री दिनेश महावर ने कार्यक्रम में सहयोग हेतु प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
सेक्टर-56 में समाज मार्गदर्शन पर केंद्रित सम्मेलन
सेक्टर-56 स्थित सामुदायिक केंद्र में आयोजित दूसरे सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य गुणवंत सिंह कोटारी मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने समाज को मार्गदर्शन देते हुए संघ के पिछले सौ वर्षों के संघर्ष, सेवा और राष्ट्र निर्माण की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य मिथिलेश मिश्रा (भागवत मर्मज्ञ) ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विजय कुमार (प्रसिद्ध उद्योगपति) तथा विशिष्ट अतिथि ज्ञानेन्द्र अवाना (सेवानिवृत्त पुलिस उपयुक्त) रहे।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से जागी सामाजिक चेतना
सम्मेलनों के अंतर्गत 108 कुंडीय यज्ञ, वैदिक मंत्रोच्चार एवं विभिन्न धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों से क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ-साथ सामाजिक चेतना का भी व्यापक संचार हुआ।
इन सम्मेलनों के माध्यम से हिन्दू समाज को संगठित करने, सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण तथा सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने का सार्थक प्रयास किया गया।







