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Home राष्ट्रीय

क्‍या भारत ने अमेर‍िका को सबक सिखाने की ठान ली?

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
August 10, 2025
in राष्ट्रीय, विश्व, व्यापार
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india-us trade deal
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नई दिल्ली: अमेर‍िकी राष्‍ट्रपत‍ि डोनाल्‍ड ट्रंप ने भारत पर एक के बाद एक टैर‍िफ लगाकर सोचा होगा क‍ि शायद कुछ ही द‍िनों में भारत उनकी शर्तें मान लेगा. रूस से तेल लेना बंद कर देगा. अमेर‍िका से मनचाही ट्रेड डील करने पर मजबूर होगा. लेकिन भारत की ओर ऐसा जवाब आया है क‍ि ट्रंप के पास ख‍िस‍ियान के अलावा कुछ नहीं बचा.

अब तो सरकार खुलेआम उनकी दादाग‍िरी को चुनौती दे रही है. पहले पीएम मोदी ने कहा, भारत क‍िसी भी क‍ीमत पर अपने क‍िसानों के ह‍ितों से समझौता नहीं करेगा. सुबह राजनाथ सिंह ने कहा-कुछ लोग बॉस बनने की कोश‍िश कर रहे हैं. अब केंद्रीय पर‍िवहन मंत्री नितिन गडकर भी कह बैठे-आर्थिक रूप से संपन्न देश दादागिरी करते हैं. तो क्‍या भारत ने अमेर‍िका को सबक सिखाने का ठान ल‍िया है?

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हर कीमत चुकाने के ल‍िए तैयार हूं
हमारे ल‍िए अपने क‍िसानों का ह‍ित प्राथमिकता है. भारत अपने क‍िसानों-पशुपालकों और मछुआरे भाई बहनों के ह‍ितों के साथ कभी समझौता नहीं करेगा. मैं जानता हूं क‍ि इसकी क‍ितनी बड़ी कीमत चुकानी होगी, लेकिन मैं इसके ल‍िए तैयार हूं.

कुछ लोग बॉस समझते हैं
कुछ लोग खुद को दुनिया का बॉस समझते हैं…उन्हें भारत का विकास पसंद नहीं आ रहा है. कई लोग कोशिश कर रहे हैं कि भारत में बनी चीजें, भारतीयों के हाथों से बनी चीजें उन देशों में बनी चीजों से ज्यादा महंगी हो जाएं, ताकि जब चीजें महंगी हो जाएं, तो दुनिया उन्हें न खरीदे. यह कोशिश की जा रही है. लेकिन मैं पूरे व‍िश्वास के साथ कह रहा हूं क‍ि अब दुनिया की कोई भी ताकत भारत को दुनिया की एक बड़ी ताकत बनने से नहीं रोक सकती.

अमीर देश दादागिरी करते हैं
आज जो दादागिरी करते हैं वो इसलिए करते हैं क्योंकि वो आर्थिक रूप से संपन्न हैं, इसलिए करते हैं क्योंकि उनके पास तकनीक है. अगर उनसे अच्छी तकनीक और संसाधन हमारे पास आएंगे तो हमें दादागिरी नहीं करनी है. हमारी संस्कृति कहती है कि विश्व का कल्याण हो. हमें अगर विश्व गुरु बनना है तो हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को उस दिशा में काम करना होगा. मुझे नहीं लगता कि हमें किसी के पास जाना पड़ेगा.

इस तेवर के मायने समझ‍िए
पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी तीनों का लहजा साफ था क‍ि भारत अब पीछे हटने वाला नहीं है. यह संदेश कई मायनों में अहम है.

पहला, भारत ने स्पष्ट कर दिया कि वह ट्रेड वॉर में भी आत्मनिर्भरता और घरेलू उद्योग की रक्षा के लिए कठोर कदम उठा सकता है.

दूसरा, यह सिर्फ आर्थिक लड़ाई नहीं, बल्कि ज‍ियोपोल‍िटि‍कल वॉर भी है कि भारत अपनी शर्तों पर साझेदारी चाहता है, न कि दबाव में झुकना

तीसरा, सरकार के तीन बड़े नेताओं की एक जैसी आक्रामक लाइन लेने का मतलब है कि यह महज व्यक्तिगत बयान नहीं, बल्कि सरकार की सोच का हिस्सा है.

एक्‍सपर्ट बोले-अमेर‍िका और ट्रंप को सीधा मैसेज
अमेरिका के लिए यह एक सख्त संकेत है कि भारत के साथ संबंध अब बराबरी के आधार पर ही चलेंगे. इसका असर न सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक मंचों पर भारत की बातचीत की पोजीशन भी मजबूत होगी. साफ है क‍ि भारत अब सिर्फ बचाव नहीं, बल्कि पलटवार की रणनीति अपना रहा है. ट्रेड और डिप्‍लोमेसी एक्‍सपर्ट डॉ. अरविंद मोहन के मुताबिक, भारत का यह रुख बताता है कि अब हम ‘रूल टेकर’ नहीं, बल्कि ‘रूल मेकर’ की भूमिका में आना चाहते हैं. अमेरिका को भी यह समझना होगा कि साझेदारी तभी टिकेगी जब दोनों पक्ष बराबरी से मेज़ पर बैठेंगे। यह सिर्फ आर्थिक टकराव नहीं, बल्कि रणनीतिक आत्मविश्वास का प्रदर्शन है.

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