नई दिल्ली। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वालों को हर महीने अपनी सैलरी से एक निश्चित रकम भविष्य निधि खाते यानी पीएफ अकाउंट में डालनी होती है. यह पैसा रिटायरमेंट के बाद पेंशन और भविष्य को सुरक्षित रखने के काम आता है. इस खाते की देखरेख कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ करता है, जो हर साल जमा की गई रकम पर गारंटीड ब्याज देता है. यही वजह है कि इसमें जमा पैसा साल दर साल बढ़ता जाता है. यहां तक की जानकारी तो लगभग हर नौकरीपेशा को होगी, लेकिन क्या आप पीएफ ट्रस्ट के बारे में जानते हैं. यहां जमा किए गए पैसे पर पीएफ खाते के मुकाबले 2 फीसदी ज्यादा ब्याज मिलता है.
पीएफ खाते पर अभी 8.15 फीसदी का सालाना ब्याज मिल रहा है. ईपीएफओ पीएफ ट्रस्ट में जमा की गई रकम पर इससे 2 फीसदी ज्यादा ब्याज देने की ही अनुमति देता है. इसका मतलब है कि अगर किसी कर्मचारी ने अपना पैसा पीएफ ट्रस्ट में जमा किया है तो उसे सालाना 10.15 फीसदी से ज्यादा का ब्याज नहीं दिया जा सकता है. हालांकि, आपको देखकर यही लग रहा होगा कि 10 फीसदी से ज्यादा रिटर्न भी कोई कम नहीं होता, लेकिन जब आप पीएफ ट्रस्ट के बारे में जानेंगे तो यह रिटर्न कम लगने लगेगा. चलिए बात करते हैं पीएफ ट्रस्ट की.
क्या होता है पीएफ ट्रस्ट
आपको यह तो पता है कि सामान्य स्थिति में कर्मचारी की सैलरी से एक निश्चित राशि काटी जाती है, जिसमें नियोक्ता का हिस्सा भी शामिल होता है और यह पूरी रकम कर्मचारी के पीएफ खाते में जाती है. लेकिन, कुछ बड़ी कंपनियां अपना खुद का एग्जेम्प्ट पीएफ ट्रस्ट चलाती हैं, जहां वे कर्मचारियों की पीएफ राशि को अपने पास रखती हैं और अलग-अलग संपत्तियों में निवेश करती हैं. इससे पीएफ क्लेम जल्दी निपट जाते हैं और इंटरनल मैनेजमेंट भी बेहतर होता है, लेकिन कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने या बदलने पर अपना पीएफ खाता ट्रांसफर करना जरूरी होता है.
ईपीएफओ ने बदले हैं नियम
EPFO ने नियमों में कुछ बदलाव करते हुए सभी पीएफ ट्रस्ट्स के लिए अनिवार्य ऑडिट की बाध्यता हटा दी है और अब जोखिम आधारित ऑडिट सिस्टम लागू किया है. अब ध्यान उन संस्थानों पर दिया जाएगा जो हाई-रिस्क में आते हैं या नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. पहले सभी पीएफ ट्रस्ट्स को अनिवार्य ऑडिट से गुजरना पड़ता था. जोखिम आधारित ऑडिट के साथ-साथ EPFO ने कंपनियों के लिए यह भी सीमा तय कर दी है कि वे EPFO द्वारा तय सालाना ब्याज दर से 2 फीसदी से ज्यादा ब्याज ऑफर नहीं कर सकती हैं.
ईपीएफओ ने क्यों लगाया कैप
ईपीएफओ ने यह प्रावधान कंपनियों को उनके पीएफ ट्रस्ट के लिए बहुत ज्यादा ब्याज दरें घोषित करने से रोकने के लिए लाया गया है. कुछ मामलों में कंपनियां 34 फीसदी तक रिटर्न की पीएफ खाते पर देने लगती थीं. हालांकि, कंपनियां स्वेच्छा से अपने पीएफ ट्रस्ट की छूट छोड़ सकती हैं, जबकि कुछ मामलों में अदालतें भी ऐसी छूट रद्द करने का आदेश दे सकती हैं. छूट रद्द होने के बाद संस्थानों को कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी. उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी भविष्य निधि बैलेंस सही तरीके से जमा किए जाएं और निष्क्रिय या गैर-केवाईसी खातों को निर्धारित समय सीमा के भीतर ट्रांसफर किया जाए. ऐसा कर्मचारियों के जमा किए पैसों को जोखिम से बचाने के लिए किया गया है.







