वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया का सबसे संवेदनशील समुद्री गलियारा अब सिर्फ व्यापारिक मार्ग नहीं, बल्कि वैश्विक ताकतों की टकराहट का विस्फोटक केंद्र बनता जा रहा है. होर्मुज स्ट्रेट में फंसे करीब 1600 जहाज इस बात का संकेत हैं कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई लाइन पर कितना बड़ा संकट मंडरा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ लॉन्च किया था, लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मिशन महज 48 घंटे में ही बिखर गया. सिर्फ दो जहाजों को एस्कॉर्ट किया जा सका और उसके बाद पूरा ऑपरेशन ठहर गया.
अब हालात ऐसे हैं कि बड़ी शिपिंग कंपनियां अकेले ट्रांजिट का जोखिम लेने को तैयार नहीं हैं. जहाजों पर हमले, ड्रोन खतरे और समुद्री विस्फोटों ने इस रणनीतिक जलमार्ग को ‘मैरिटाइम वॉर ज़ोन’ में बदल दिया है. तेल, गैस और व्यापार से जुड़ी वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माने जाने वाले इस रास्ते पर बढ़ता तनाव दुनिया के लिए आर्थिक झटका बन सकता है.
इसी बीच दक्षिण कोरियाई जहाज पर हुए धमाके ने हालात को और विस्फोटक बना दिया. अमेरिका की ओर से इशारों में ईरान पर आरोप लगाए गए, लेकिन तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया. दक्षिण कोरिया में ईरानी दूतावास ने बयान जारी कर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अब “सुरक्षा संघर्ष क्षेत्र” बन चुका है और यहां की परिस्थितियां पहले जैसी नहीं रहीं. ईरान ने साफ किया कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों का नतीजा है.
ईरान का बयान सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी भी माना जा रहा है. तेहरान ने कहा कि जो जहाज तय नियमों, चेतावनियों और समन्वय को नजरअंदाज करेंगे, वे खुद जोखिम उठाएंगे. यानी ईरान अब अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दे रहा है कि होर्मुज में गुजरने वाला हर जहाज उसकी निगरानी और शर्तों के दायरे में रहेगा.
विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ समुद्री सुरक्षा का मामला नहीं, बल्कि अमेरिका-ईरान शक्ति संघर्ष का नया मोर्चा है. अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक अस्थिर रहता है, तो इसका असर तेल की कीमतों, वैश्विक सप्लाई चेन और एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर सीधे दिखाई देगा. दुनिया फिलहाल उस जलमार्ग को देख रही है, जहां एक छोटी चिंगारी भी वैश्विक आर्थिक तूफान में बदल सकती है.







