नई दिल्ली: अमेरिका की शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट ने पिछले वर्ष अडानी के शेयरों को बड़ा नुकसान पहुंचाया था। जिस तरह से फर्म ने अडानी ग्रुप पर फर्जी कंपनियों के जरिए शेयर की कीमतों में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था, उसकी वजह से अडानी ग्रुप के शेयर को भारी नुकसान हुआ था।
यहां तक कि गौतम अडानी दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की टॉप 10 की लिस्ट से भी बाहर हो गए थे। हालांकि अडानी ग्रुप की ओर से इन तमाम आरोपों को खारिज कर दिया गया था। लेकिन एक बार फिर से अडानी ग्रुप के साथ सेबी चीफ को लेकर हिंडनबर्ग ने बड़े दावे किए हैं, जिसकी वजह से हिंडनबर्ग रिसर्च एक बार फिर से चर्चा में है।
क्या करता है हिंडनबर्ग रिसर्च
हिंडनबर्ग रिसर्च की बात करें तो यह फर्म फोरेंसिक वित्तीय जांच के लिए जानी जाती है। हिंडनबर्ग रिसर्च दावा करता है कि वह कॉर्पोरेट धोखाधड़ी को उजागर करने का काम करता है। फर्म कंपनियों में अनियमितताओं, अनैतिक प्रबंधन प्रथाओं, अघोषित लेनदेन और नियामक मुद्दों की पहचान करने के लिए कंपनियों का फंडामेंटल विश्लेषण करती है।
अडानी ग्रुप को लेकर खुलासे से पहले भी हिंडनबर्ग रिसर्च ने दुनियाभर की कई कंपनियों को लेकर अहम खुलासे किए हैं। कंपनी ने कई कंपनियों से जुड़ी अनियमितता को उजागर किया है।
17 कंपनियों का बंटाधार
पिछले 7 वर्षों में हिंडनबर्ग ने 17 कंपनियों के भीतर गड़बड़ियों को उजागर किया है। हिंडनबर्ग के खुलासे की वजह से इन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। यहां तक कि कुछ कंपनियों के पदाधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज हुए तो कुछ को इस्तीफा तक देना पड़ा।
आइए डालते हैं ऐसी ही कुछ कंपनियों पर एक नजर, जोकि हिंडनबर्ग रिसर्च के खुलासे के बाद बुरी तरह से प्रभावित हुईं और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ा।
निकोला
वर्ष 2020 में निकोला से जुड़े मामले में हिंडनबर्ग ने कथित धोखाधड़ी का खुलासा किया था, जिसके बाद निकोला के संस्थापक और अध्यक्ष को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
WINS फाइनेंस
वर्ष 2020 में WINS फाइनेंस में गड़बड़ी का खुलासा किया था, जिसके बाद कंपनी को डीलिस्ट कर दिया गया था। कंपनी की सहयोगी संस्था जोकि चीन में थी, उसके 350 मिलियन आरबीएम को सीज कर दिया गया था, जिसकी जानकारी कंपनी ने निवेशकों को नहीं दी थी।
जीनियस ब्रांड
वर्ष 2020 में ही हिंडनबर्ग ने जीनियस ब्रांड को लेकर खुलासा किया था, जिसके बाद कंपनी के शेयर धड़ाम हो गए थे। कंपनी के शेयर 6.86 डॉलर पर ट्रेड कर रहे थे, लेकिन हिंडनबर्ग के खुलासे के बाद शेयर के दाम 1.50 डॉलर तक पहुंच गए थे। कंपनी पर आरोप था कि मीडिया के जरिए स्टॉक को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाई गई।
ब्लूम एनर्जी
हिंडनबर्ग ने दावा किया था कि कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट में कई मिलियन डॉलर के कर्ज की जानकारी नहीं दी है। सर्विस अग्रीमेंट को लेकर कंपनी की गड़बड़ियों को उजागर किया गया था। 2020 में हिंडनबर्ग के आर्टिकल के चलते कंपनी को भारी नुकसान हुआ था। यहां तक कि फोर्ब्स ने भी इसके बाद कंपनी को लेकर खुलासे किए थे।
यांगेट रिवर पोर्ट एंड लॉजिस्टिक
चीन की बिलियन डॉलर मार्केट वाली कंपनी को लेकर हिंडनबर्ग ने 2018 में खुलासा किया था। कंपनी के अंदर जो अहम संपत्तियां होने का दावा किया जा रहा था, वो असल में थी ही नहीं। इसके साथ ही कंपनी के भीतर कई गड़बड़ियों का हिंडनबर्ग ने खुलासा किया था। इस खुलासे के 6 महीने के बाद कंपनी नैसडैक से डीलिस्ट हो गई थी। कंपनी को 98 फीसदी मार्केट कैप का नुकसान हुआ था।
लिबर्टी हेल्थ साइंसेज
हिंडनबर्ग ने कंपनी के भीतर गलत विलय को उजागर किया था। अफरिया के साथ हुए समझौते में गड़बड़ियों के सामने आने के बाद लिबर्टी के चार डायरेक्टर को इस्तीफा देना पड़ा था। इसमे सीईओ और सीएफओ भी शामिल थे।
पर्शिंग गोल्ड
हिंडनबर्ग ने कंपनी से जुड़े एक अहम व्यक्ति को लेकर आर्टिकल पब्लिश किया था। जिसमे कई तरह के आरोप लगाए गए थे। बाद में कंपनी के इस अधिकारी के खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। आरोप था कि इस व्यक्ति ने कई फर्जी स्कीम चलाई थी।
आरडी लीगल
हिंडनबर्ग के फाउंडर नेट एंडर्सन ने 2016 में आरडी लीगल से जुड़ी रिपोर्ट को रेगुलेटरी एजेंसी SEC के साथ साझा की थी। जिसके बाद आरडी लीगल के खिलाफ मुकदमा चला और यह आरडी लीगल यह केस हार गया। जिसके बाद कंपनी के फाउंडर को जुर्माने के साथ सस्पेड कर दिया गया।
ओपको हेल्थ
कंपनी के भीतर आपराधिक लिंक को हिंडनबर्ग ने 2017 में उजागर किया था। जिसके बाद 2018 में कंपनी के चेयरमैन के खिलाफ फर्जीवाड़े का केस शुरू हुआ था और कंपनी का भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
एचएफ फूड
वर्ष 2020 में ही हिंडनबर्ग ने एचएफ फूड के भीतर शेयरों के गलत आवंटन का मामला उजागर किया था। इसके साथ ही कई अघोषित लेनदेन का खुलासा किया गया था। इसके चलते कंपनी को 339.9 मिलियन डॉलर का नुकसान एक ही तिमाही में हो गया था।
इसके अलावा हिंडनबर्ग पोलैरिटी टीई, रियॉट ब्लॉकचेन, आफरिया, स्माइल डायरेक्ट क्लब, प्रिडिक्टिव टेक्नोलॉजी ग्रुप, एससी वर्क्स, चायना मेटल रिसोर्सेज यूटिलाइजेशन कंपनियों से जुड़ी अनियमितता को उजागर कर चुका है।







