प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड का एक बहुचर्चित और संवेदनशील मामला है, जिसने पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा और कार्यस्थल पर यौन शोषण जैसे मुद्दों को उजागर किया। यह मामला 18 सितंबर 2022 को पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर ब्लॉक में स्थित वनंत्रा रिजॉर्ट में हुआ, जहां 19 वर्षीय अंकिता भंडारी, जो रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी, की हत्या कर दी गई थी। कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (एडीजे कोर्ट) में इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है, और 30 मई 2025 को फैसला सुनाया जाएगा।
अंकिता की हत्या… विशेष सेवा का दबाव
अंकिता भंडारी (जन्म: 11 नवंबर 2003) ने इंटरमीडिएट के बाद देहरादून से होटल प्रबंधन में छह महीने का डिप्लोमा किया था। 28 अगस्त 2022 को उन्होंने वनंत्रा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम शुरू किया। आरोप है कि रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य ने अंकिता पर “विशेष सेवा” (अनैतिक कार्य) के लिए दबाव डाला, जिसे अंकिता ने ठुकरा दिया। इसके बाद 18 सितंबर 2022 को पुलकित आर्य ने अपने दो कर्मचारियों, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता के साथ मिलकर अंकिता की हत्या कर दी और उसका शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया। सात दिन बाद, 24 सितंबर 2022 को पुलिस ने शव बरामद किया।
आरोप और कानूनी प्रक्रिया
आरोपी: मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, जो वनंत्रा रिजॉर्ट का मालिक और बीजेपी से निष्कासित नेता विनोद आर्य का बेटा है, पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 201 (साक्ष्य छुपाना), 354(ए) (छेड़छाड़ और लज्जा भंग), और अनैतिक देह व्यापार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए। अन्य दो आरोपी, सौरभ भास्कर (रिजॉर्ट मैनेजर) और अंकित गुप्ता (सहायक प्रबंधक), पर भी धारा 302, 201 और अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत आरोप हैं।
मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया, जिसने 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में 97 गवाह नामित किए गए, जिनमें से 47 की गवाही कोर्ट में दर्ज की गई। 28 मार्च 2023 से कोटद्वार के एडीजे कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई, जो लगभग दो साल तक चली। 19 मई 2025 को अंतिम सुनवाई में अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अवनीश नेगी ने दलील दी कि मामले को मजबूती से साबित किया गया है और आरोपियों को कठोरतम सजा दी जाए। अदालत ने फैसला 30 मई 2025 के लिए सुरक्षित रखा।
मुख्य गवाह और विवाद
मुख्य गवाह विवेक आर्य ने कोर्ट में बताया कि “सौरभ भास्कर ने अंकिता के साथ कई बार दुष्कर्म का प्रयास किया था, और पुलकित आर्य भी उसका शारीरिक शोषण करता था। हालांकि, बचाव पक्ष ने विवेक के बयानों में विरोधाभास होने का दावा किया। अंकिता की मां और कुछ कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि मामले में किसी प्रभावशाली “वीआईपी” की संलिप्तता थी, लेकिन पुलिस जांच में इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिला। एसआईटी ने कहा कि “वीआईपी” शब्द रिजॉर्ट में विशेष सेवा मांगने वाले मेहमानों के लिए इस्तेमाल होता था।
आशुतोष नेगी नामक पत्रकार ने आरोप लगाया कि “बीजेपी विधायक रेनू बिष्ट के निर्देश पर रिजॉर्ट में बुलडोजर चलाकर सबूत नष्ट किए गए। इसकी सीबीआई जांच की मांग को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।”
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव
इस हत्याकांड ने उत्तराखंड में भारी आक्रोश पैदा किया। स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे, और रिजॉर्ट में तोड़फोड़ हुई। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और गणेश गोदियाल ने इसे चुनावी रैलियों में उठाया, बीजेपी सरकार पर चुप्पी और देरी का आरोप लगाया। अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने भावुक अपील की कि उनकी बेटी के हत्यारों को फांसी दी जाए।
परिवार और समाज की मांग
अंकिता के माता-पिता ने बार-बार न्याय की गुहार लगाई है। उनके पिता ने कहा, “हम चाहते हैं कि तीनों आरोपियों को हमारे सामने फांसी हो।” यह मामला केवल अंकिता का नहीं, बल्कि हर उस लड़की की सुरक्षा और आत्मसम्मान की लड़ाई बन गया है। सोशल मीडिया और सड़कों पर लोग #JusticeForAnkitaBhandari के साथ न्याय की मांग कर रहे हैं।
महिलाओं की सुरक्षा और न्यायिक प्रणाली
30 मई 2025 को कोटद्वार कोर्ट में होने वाला फैसला इस मामले का अंतिम चरण है। पूरे देश की निगाहें इस पर टिकी हैं, क्योंकि यह न केवल अंकिता के परिवार, बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा और न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता का सवाल है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड ने उत्तराखंड और देश भर में महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थल पर शोषण, और प्रभावशाली लोगों के दबाव जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर किया। 30 मई का फैसला न केवल इस मामले में न्याय का प्रतीक होगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि समाज में ऐसी घटनाओं के खिलाफ कितना सख्त रुख अपनाया जाता है।







