नई दिल्ली: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद विश्व व्यापार के मोर्चे पर भारत लगातार प्रगति के पथ पर बढ़ता चल रहा है। खाड़ी के मुल्कों में बार-बार तनाव की वजह से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों की अस्थिरता के बावजूद भारत का विश्व व्यापार में लगातार बढ़ता योगदान सराहनीय रहा है।
भारत आज इलेक्ट्रोनिक्स, दवाई और कृषि उत्पादों के मामले में विश्व व्यापार में अपना एक खास स्थान बना चुका है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन के साथ हालिया मुक्त व्यापार समझौतों ने देश के आर्थिक संबंधों में भी विस्तार किया है और इसे ज्यादा बड़ा बाजार भी उपलब्ध करवा रहा है।
भारत का विश्व व्यापार आजादी के बाद और अब
1947 से लेकर 1990 की शुरुआत तक भारतीय अर्थव्यवस्था को बहुत ही संकुचित रखने की कोशिश की गई थी। यह वक्त ‘लाइसेंसी राज व्यवस्था’ के नाम से ज्यादा कुख्यात रहा है। इस दौरान हमने संरक्षणवादी व्यापार को अपना रखा था। लेकिन, 1991 के बाद उदारीकरण के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था अप्रत्याशित रूप से गतिशील नजर आने लगी।
‘लाइसेंसी राज’ से छुटकारा मिल गया, व्यापार करना आसान हुआ, विदेशी निवेश में तेजी से वृद्धि होने लगी और देश बाजार की जरूरतों के मुताबिक नीतियां अपनाने की ओर अग्रसर हुआ।
विश्व व्यापार में भारत के विकास की तस्वीर
2023-24 के आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों को देखें तो यह बदलाव स्पष्ट रूप से नजर आता है। मसलन, 1980 में सिर्फ कमोडिटी सेक्टर में विश्व व्यापार में भारतीय निर्यात का योगदान मात्र 0.4% था। जो कि 1985 में बढ़कर 0.5% हुआ। 1990 तक यही स्थिति बनी हुई थी। लेकिन, साल 2000 से इसमें बढ़ोतरी (0.7%) नजर आने लगी और 2022 तक यह बढ़कर 1.8% तक हो चुकी थी।
विश्व व्यापार संगठन ने भी माना लोहा
विश्व व्यापार संगठन (WTO) के एक आंकड़े के मुताबिक तमाम वैश्विक संघर्षों के बावजूद पिछले वित्त वर्ष (2023-24) में फरवरी महीने तक ही भारत का माल निर्यात 394.99 बिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा है। वहीं डिजिटल तौर पर दी जानी वाली सेवाओं में भारत का भारत का अंतरराष्ट्रीय योगदान 2019 के 4.4% से बढ़कर 2023 में 6% हो चुका है।
संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास (UNTCTAD) ने दिखाई बढ़ते भारत की तस्वीर
विश्व व्यापार में भारत की बुलंदियों का अंदाजा संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। इसकी वेबसाइट के अनुसार 2024 की पहली तिमाई में ही विश्व व्यापार को मुख्य तौर पर चीन, भारत और अमेरिका ने ही संचालित किया है। इस दौरान भारत ने विश्व व्यापार में 7% की बढ़ोतरी दर्ज की है। वहीं अमेरिका की विकास रफ्तार सिर्फ 3% रही है। हमसे आगे सिर्फ चीन है, जो 9% की रफ्तार से बढ़ा है।
सर्विस सेक्टर में बढ़ रहा है भारतीय निर्यात का दबदबा
भारत के विश्व व्यापार को बढ़ाने में सर्विस सेक्टर सबसे प्रमुख भूमिका निभा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में सर्विस सेक्टर में भारत का निर्यात 11% की रफ्तार से बढ़ा है।
आईटी और इलेक्ट्रोनिक्स के क्षेत्र में भारत का निर्यात
इन सेवाओं में आईटी और आईटी से जुड़ी सेवाएं, पर्यटन, स्वास्थ्य से जुड़ी चीजें शामिल हैं। सरकार के आंकड़े के मुताबिक 2022 में 14 लाख मेडिकल टूरिस्ट उपचार के लिए भारत पहुंचे थे।
वहीं इलेक्ट्रोनिक उत्पादों में भारत का निर्यात 2017-18 में मात्र 2% था, जो 23-24 में बढ़कर 6.5% हो गया। जबकि, इंजीनियरिंग उत्पादों, जैसे की मशीन, वाहन, जेनरेटर और ट्रांसफॉर्मर के निर्यात में भी भारी इजाफा देखा जा रहा है।
दवाई निर्यात के क्षेत्र में भी भारत की बन रही है खास पहचान
भारत ने दवाई निर्यात में भी अप्रत्याशित सफलता प्राप्त की है और वित्त वर्ष 24 में इसमें 10% का उछाल आया है और यह बढ़कर 28 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। इसी तरह से कपड़ा निर्यात भी पिछले वित्त वर्ष में फरवरी तक 30.96 बिलियन अमेरिकी डॉलर का हो चुका है।
कृषि उत्पादों की बात करें तो गैर-बासमती चावल, गेहूं और अन्य चीजों के निर्यात पर प्रतिबंधों के बावजूद भी इस क्षेत्र में भारत के निर्यात में भारी इजाफा देखा गया है। इनमें मसाले, फल, सब्जियों, तिलहन और तंबाकू का निर्यात भी शामिल है।







