नई दिल्ली। फ्रांस में आयोजित G7 Summit के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ हुआ मौजूदा समझौता केवल एक प्रारंभिक ढांचा (Framework Agreement) है और अभी अंतिम रूप से लागू नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आगे की वार्ताएं बेहद महत्वपूर्ण होंगी और यदि वे असफल रहीं तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है। ट्रंप ने कहा कि समझौते के ज्ञापन (Memorandum of Understanding) में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों पक्ष 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंच सकते हैं, लेकिन साथ ही यह भी माना कि प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है।
Donald Trump ने संकेत दिया कि यदि ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे हटता है या वार्ता विफल हो जाती है, तो अमेरिका के पास सैन्य विकल्प खुले रहेंगे। हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष, हमले और जवाबी कार्रवाई हो चुकी है, जिसके बाद यह समझौता युद्धविराम और व्यापक शांति की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। हालांकि ट्रंप समझौते को लेकर आशावादी दिखे, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। तेहरान का कहना है कि प्रतिबंधों में राहत और अन्य शर्तों पर अभी और चर्चा की जरूरत है।
G7 नेताओं ने इस समझौते का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर भी व्यापक बातचीत की मांग की है। कई पश्चिमी देशों का मानना है कि केवल परमाणु कार्यक्रम पर समझौता पर्याप्त नहीं होगा। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले 60 दिन निर्णायक साबित होंगे। यदि वार्ता सफल रहती है तो मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है, लेकिन यदि बातचीत टूटती है तो अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का खतरा फिर बढ़ सकता है।







