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दत्तात्रेय होसबाले बोले- अगर हम 30,000 मस्जिदों को खोदना शुरू कर दें…

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
April 13, 2025
in राष्ट्रीय
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Dattatreya Hosabale
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नई दिल्ली: भारत में नए मंदिर-मस्जिद विवाद तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसा कोई सप्ताह नहीं जाता जब किसी नए शहर में मंदिर के नीचे मस्जिद होने का दावा सामने न आए और तनाव बढ़ जाए। हालात इतने नाजुक हो गए हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी इससे चिंतित दिखाई दे रहा है। RSS ने पहले अयोध्या, मथुरा और काशी जैसे बड़े मंदिर-मस्जिद विवादों में ही हिंदू पक्ष के दावों का समर्थन किया था। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कई बार मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज को रोकने की अपील की है। अब संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी इसी तरह की चिंता जताई है।

होसबाले ने पूछा है कि अगर हम 30,000 मस्जिदों को खोदना शुरू कर दें, यह दावा करते हुए कि वे मंदिरों को तोड़कर बनाई गई हैं, तो भारत किस दिशा में जाएगा? उन्होंने RSS की कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका ‘विक्रमा’ को दिए एक इंटरव्यू में पूछा, ‘क्या इससे समाज में और अधिक शत्रुता और नाराजगी नहीं पैदा होगी? क्या हमें एक समाज के रूप में आगे बढ़ना चाहिए या अतीत में फंसे रहना चाहिए? कथित तौर पर नष्ट किए गए मंदिरों को पुनः प्राप्त करने के लिए हमें इतिहास में कितना पीछे जाना चाहिए?’

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राम मंदिर आंदोलन पर भी बोले होसबाले

RSS के शताब्दी वर्ष के मौके पर हुए इस इंटरव्यू में होसबाले ने कई विषयों पर संगठन के विचार स्पष्ट किए। इनमें से कई विचार भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ से जुड़े अन्य संगठनों के विचारों से मेल नहीं खाते हैं।

मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज पर होसबाले ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन RSS ने शुरू नहीं किया था। RSS के स्वयंसेवक सांस्कृतिक महत्व के कारण इस आंदोलन में शामिल हुए थे।

उन्होंने कहा, ‘उस समय, विश्व हिंदू परिषद और धार्मिक नेताओं ने तीन मंदिरों का उल्लेख किया था। अगर कुछ RSS स्वयंसेवक इन तीन मंदिरों को फिर से प्राप्त करने के प्रयासों में शामिल होना चाहते थे, तो RSS ने इसका विरोध नहीं किया। लेकिन अब स्थिति बहुत अलग है।’

संघ को भी सता रही दुश्मनी और नफरत की चिंता

उन्होंने पूछा, ‘देश में 30,000 मस्जिदों के नीचे मंदिरों के दावे हैं। अगर हम इतिहास को पलटने के लिए उन सभी को खोदना शुरू कर दें, तो क्या इससे समाज में और अधिक दुश्मनी और नफरत नहीं पैदा होगी?’

होसबाले ने कहा कि मस्जिदों के नीचे मंदिरों की खोज करने से हम अस्पृश्यता को खत्म करने, युवाओं में जीवन मूल्यों को स्थापित करने, संस्कृति की रक्षा करने और भाषाओं को संरक्षित करने जैसे अधिक महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने से वंचित रह जाएंगे।

‘हिंदू धर्म की जड़ों को जगाने से दूर होगी चिंता’

उन्होंने कहा, ‘जब मंदिरों की बात आती है, तो क्या किसी इमारत में जो अब एक मस्जिद है, कोई दिव्यता है? क्या हमें इमारत में हिंदू धर्म की तलाश करनी चाहिए, या हमें उन लोगों में हिंदू धर्म को जगाना चाहिए जो खुद को हिंदू नहीं मानते हैं? इमारतों में हिंदू धर्म के अवशेषों की खोज करने के बजाय, अगर हम समाज में हिंदू धर्म की जड़ों को जगाते हैं, तो मस्जिद का मुद्दा अपने आप हल हो जाएगा।’

भारतीय मुसलमानों के लिए संघ का संदेश

होसबाले ने दावा किया कि भारत में लोग एक ही नस्ल के हैं और हिंदू धर्म अनिवार्य रूप से मानवतावाद है। उन्होंने कहा, ‘भारतीय मुसलमानों ने अपनी धार्मिक प्रथाओं को बदल दिया होगा, लेकिन उन्हें अपनी राष्ट्रीय और सांस्कृतिक जड़ों को नहीं छोड़ना चाहिए। यह RSS का रुख है।’

हालांकि, उन्होंने कहा कि मुसलमानों या ईसाइयों को हिंदू होने के लिए अपना धर्म छोड़ने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमें दूसरों की पूजा के तरीकों से कोई विरोध नहीं है, जब तक कि यह इस देश की संस्कृति के खिलाफ न हो।’

होसबाले ने कहा कि RSS ने हमेशा शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनी मातृभाषा को बढ़ावा दिया है। ‘हम मानते हैं कि बच्चों के लिए सीखना आसान और अधिक स्वाभाविक है जब उन्हें उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जा रहा हो।’

उन्होंने कहा कि शिक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने को न केवल एक व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में देखा जाना चाहिए, बल्कि संस्कृतियों को संरक्षित करने के साधन के रूप में भी देखा जाना चाहिए। ‘अंग्रेजी के प्रति आकर्षण समझ में आता है। लेकिन हमें एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है।’

भाषा विवाद पर भी बोले संघ के नेता

होसबाले ने ऐसी आर्थिक योजनाएं बनाने का भी आह्वान किया जो क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षित लोगों के लिए नौकरियां प्रदान करें। उन्होंने कहा, ‘बुजुर्गों, न्यायाधीशों, शिक्षा विशेषज्ञों, लेखकों, राजनेताओं और धार्मिक नेताओं को इस पर सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए। तीन-भाषा फॉर्मूले का उचित कार्यान्वयन 95% समस्या का समाधान कर सकता है। समस्याएं तब पैदा होती हैं जब भाषा का राजनीतिकरण किया जाता है। हमारे देश ने हजारों वर्षों से भाषाई विविधता के भीतर एकता बनाए रखी है।’

सियासी दलों को लेकर संघ के नेता ने कही बड़ी बात

होसबाले ने कहा कि यह गलत है कि किसी विशेष राजनीतिक समूह से संबंधित लोगों को देशभक्त के रूप में पहचाना जाए और दूसरों को गद्दार कहा जाए। ‘देशभक्ति और राष्ट्रवाद सामान्य लक्षण हैं।’

उन्होंने कहा, ‘देश में कई राजनीतिक दलों का अस्तित्व इसकी एकता में बाधा नहीं है। हालांकि, राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से, हम सभी को कुछ सार्वभौमिक सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।’ होसबाले से पूछा गया कि क्या RSS का केवल एक राजनीतिक दल का समर्थन करना एक समस्या है। उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि RSS केवल एक राजनीतिक दल का समर्थन करता है।

उन्होंने कहा, ‘स्वयंसेवक किसी भी सामाजिक या राजनीतिक व्यवस्था में काम करने के लिए स्वतंत्र हैं। स्वयंसेवक स्वाभाविक रूप से उन दलों के साथ जुड़ते हैं जिनके RSS के साथ संबंध हैं।’ उन्होंने कहा कि ‘अन्य दलों को स्वयंसेवकों को RSS और उनकी पार्टी दोनों का हिस्सा बनने की अनुमति देनी चाहिए।’

उन्होंने कहा कि RSS के स्वयंसेवकों के अल्पसंख्यकों, जाति, एकता, धर्मांतरण और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों पर कुछ विश्वास हैं, जो उनके लिए ऐसी पार्टी में काम करना मुश्किल बना देंगे जो इन सिद्धांतों के खिलाफ है। ‘जबकि कई राजनीतिक दलों ने खुले तौर पर RSS के साथ संपर्क में नहीं रहने का विकल्प चुना, संगठन ने दलों के नेताओं के साथ संपर्क बनाए रखा है।’

उन्होंने कहा, ‘RSS ने बार-बार कहा है कि वह राजनीति में प्रवेश नहीं करना चाहता है। हालांकि, जैसे-जैसे समय बदलता है, हमें अनुकूल होना चाहिए।’

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