देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी राशन वितरण प्रणाली में चौंकाने वाला घपला सामने आया है. दरअसल, प्रदेश में मौजूद 23 लाख से अधिक राशन कार्ड धारकों की जांच में 18 हजार 600 राशन कार्ड धारक ऐसे पाए गए हैं, जो राशन लेने के लिए पात्र नहीं थे. ऐसे में इन 18 हजार 600 परिवारों के राशन कार्ड को निरस्त कर दिया गया है. प्रदेश भर में मौजूद राशन कार्ड धारकों का अप्रैल, मई और जून में सत्यापन किया गया. इसमें इन अपात्र परिवारों की जानकारी सामने आई.
राशन कार्ड धारकों के सत्यापन में पता चला कि हजारों की संख्या में ऐसे परिवार पाए गए हैं, जो बड़े-बड़े बंगलो में रह रहे हैं और उनके पास गाड़ियां भी हैं. बावजूद इसके वह फ्री का राशन या फिर सब्सिडी वाले राशन को सालों से ले रहे थे. प्रदेश में इस तरह के मामले सबसे अधिक नैनीताल, देहरादून, उधम सिंह नगर और पौड़ी जिले में सामने आए हैं. ऐसे में राशन वितरण व्यवस्थाओं पर सवाल भी खड़े होने लगे हैं. यही वजह है कि खाद्य विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में समय-समय पर सत्यापन अभियान चलाने का निर्णय लिया है, ताकि अपात्रों के राशन कार्ड को समय से निरस्त किया जा सके.
उत्तराखंड में अमीर खा रहे थे गरीबों का राशन
कितना है कोटा: इसके अलावा एक पहलू यह भी है कि भारत सरकार और राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा अधिनियम के तहत उत्तराखंड के लिए अधिकतम 14 से 15 लाख सफेद और गुलाबी कार्ड बनाने का कोटा निर्धारित है. इसके अलावा, करीब 10 लाख पीला कार्ड बनाने का कोटा है. कुल मिलाकर उत्तराखंड में 24 लाख राशन कार्ड बनाए जा सकते हैं. जबकि वर्तमान समय में उत्तराखंड राज्य में 23.35 लाख राशन कार्ड धारक मौजूद है.
नहीं बन रहे नए राशन कार्ड: दरअसल, उत्तराखंड में बड़ी संख्या में राशन कार्ड धारकों की संख्या होने के कारण जरूरतमंदों के नए राशन कार्ड नहीं बन पा रहे थे, क्योंकि भारत सरकार के नियम के तहत राशन कार्ड निरस्त होने के सापेक्ष ही नए राशन कार्ड जारी करने की व्यवस्था थी. लेकिन लोग अपात्र होने के बावजूद भी अपना राशन कार्ड निरस्त नहीं करवा रहे थे.
बड़े स्तर पर चलाया गया सत्यापन अभियान: ऐसे में प्रदेश में नया राशन कार्ड बनवाने के लिए बढ़ते आवेदनों का बोझ और पुराने राशन कार्ड धारकों की संख्या कोटे के बराबर होने के कारण राज्य सरकार ने राशन कार्ड धारकों का सत्यापन करने का निर्णय लिया. समय-समय पर राशन कार्ड धारकों का सत्यापन किया गया. बावजूद इसके बड़ी संख्या में अपात्र राशन कार्ड धारकों के राशन को निरस्त नहीं किया जा सका. इसके अलावा तमाम ऐसी शिकायतें भी सरकार के सामने आती रही कि लोग अपात्र होने के बावजूद भी फ्री या फिर सब्सिडी वाले राशन का लाभ उठा रहे हैं. जिसको देखते हुए उत्तराखंड में 28 अप्रैल से 29 जून के बीच बृहद स्तर पर सत्यापन का अभियान चलाया गया. जिसमें हजारों की संख्या में ऐसे परिवार पाए गए जो अपात्र थे.
कौन हैं गुलाबी, सफेद और पीला कार्ड के पात्र लोग? उत्तराखंड खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने गुलाबी कार्ड श्रेणी में उत्तराखंड में 12 लाख राशन कार्ड निर्धारित किए हैं. इसके लिए वर्तमान मासिक आय सीमा 15 हजार रुपए से कम की रखी गई है. इसी तरह, सफेद कार्ड यानी सबसे गरीब परिवारों के लिए आरक्षित इस श्रेणी में अधिकतम 1.84 लाख राशन कार्ड निर्धारित हैं, जिसकी मासिक आय सीमा 4 हजार रुपए तक तय है. इसके अलावा, पीला कार्ड श्रेणी में करीब 10 लाख राशन कार्ड आते हैं. इसके लिए 5 लाख रुपए तक की वार्षिक आय वाले परिवार पात्र होते हैं. यही वजह है कि सरकार, किसी भी अपात्र या फर्जी कार्ड को हटाने और सिर्फ जरूरतमंदों को ही सूची में बनाए रखने के लिए लगातार सत्यापन अभियान चला रही है.
23 लाख से ज्यादा राशन कार्ड होल्डर्स: उत्तराखंड में कुल राशन कार्ड होल्डर्स की संख्या 23.35 लाख से अधिक है. जिसमें पीला कार्ड धारकों की संख्या करीब 9 लाख 35 हजार, गुलाबी कार्ड धारकों की संख्या करीब 1 लाख 84 हजार और राज्य खाद्य योजना यानी बीपीएल (सफेद कार्ड) धारकों की संख्या करीब 12 लाख 15 हजार है. लेकिन 28 अप्रैल से 29 जून 2026 के बीच 8 चरणों में हुए सत्यापन के दौरान पाया गया कि 18 हजार 600 राशन कार्ड धारक ऐसे हैं, जिनके जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है. बावजूद इसके ये हजारों परिवार फ्री या फिर सब्सिडी वाले राशन का लाभ ले रहे थे. जिसके चलते पात्र लाभार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. लिहाजा इन सभी अपात्र राशन कार्ड धारकों के राशन कार्ड को निरस्त कर दिया गया.
भारत सरकार करती है कार्ड की संख्या निश्चित: दरअसल, राज्य में राशन कार्ड की एक संख्या भारत सरकार की ओर से निश्चित है. ऐसे में नया राशन कार्ड तभी जारी किया जा सकता है, जब गलत राशन कार्ड धारकों के राशन कार्ड को निरस्त किया जाए. इसके लिए प्रदेश भर में विशेष अभियान चलाया गया जिसमें जिला प्रशासन को भी शामिल किया गया. ऐसे में प्रदेश भर में 18 हजार 600 राशन कार्ड को निरस्त किया गया है.
राशन कार्ड निरस्त करने का कारण: प्रदेश भर में अभियान के तहत जो 18 हजार 600 राशन कार्ड निरस्त किए गए हैं, उसके पीछे की मुख्य वजह, संबंधित परिवार का इनकम बढ़ना है. परिवार के किसी सदस्य की सरकारी नौकरी लगना, परिवार के कार्ड धारक की मृत्यु होना और इनकम टैक्स बेनेफिशियरी शामिल है. लिहाजा, वर्तमान समय में इन वजहों को देखते हुए राशन कार्ड को निरस्त किया गया है. किसी परिवार के आय में वृद्धि होने की जानकारी जिला प्रशासन को इस अभियान में शामिल करने के बाद स्थानीय लेवल पर जांच कर मिली है. ऐसे में जांच समिति की ओर से दिए गए सुझाव के आधार पर ही राशन कार्ड को निरस्त किया गया है.
उत्तराखंड में 28 अप्रैल से 29 जून 2026 के बीच अभी राशन कार्ड वेरिफिकेशन को लेकर चलाए गए अभियान के दौरान 18 हजार 600 राशन कार्ड को निरस्त किया गया है. ऐसे में यह अभियान क्या भविष्य में भी जारी रहेगा? इसके सवाल पर आयुक्त ने कहा कि,
जिलावार अपात्र पाए गए राशनकार्डो की संख्या
- देहरादून जिले में 2886 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- टिहरी गढ़वाल जिले में 1515 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- हरिद्वार जिले में 1576 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- पौड़ी गढ़वाल जिले में 1798 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- रुद्रप्रयाग जिले में 317 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- उत्तरकाशी जिले में 449 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- चमोली जिले में 1063 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- नैनीताल जिले में 4247 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- बागेश्वर जिले में 225 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- अल्मोड़ा जिले में 463 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- उधम सिंह नगर जिले में 1926 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- पिथौरागढ़ जिले में 1573 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
- चंपावत जिले में 562 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.







