नई दिल्ली। क्या कुछ बड़ा होने वाला है ? क्या कोई आर्थिक संकट आने वाली है? जिस सोने को संकट का सहारा मानते हैं, आरबीआई ताबड़तोड़ उस सोने की ‘घर वापसी’ करवाने में जुटा है. पहले रिजर्व बैंक ने तेजी से अपना गोल्ड रिजर्व बढ़ाया और अब दुनियाभर में रखे अपने सोने को वापस देश लाने की मुहीम में जुटा है. मन में सवाल जरूर उठता है कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि दशकों से विदेशों में सुरक्षित पड़े सोने को अब RBI भारत लाने में क्यों जुट गया है?
दुनिया के टॉप 10 गोल्ड रिजर्व देशों में भारत
दुनिया के टॉप 10 गोल्ड रिजर्व देशों में शामिल भारत के केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर 2025 से मार्च 2026 तक करीब 104.2 मीट्रिक टन सोना विदेशों से ला चुका है, लेकिन अभी भी काफी सोना विदेशी गोल्ड वॉल्ट में जमा है, जिसे वापस लाने की कोशिश की जा रही है. रिजर्व बैंक ने साल 2024 में करीब 74 टन सोने की खरीदारी की. साल 2025 में ये आंकड़ा 94 फीसदी गिरकर 4 टन पर पहुंच गया. पहले सोने की खरीदारी और अब विदेशी तिजोरियों से अपना सोना वापस लाना जा रहा है. पढ़ें- क्या अपनी तिजोरी में जगह नहीं, विदेशों में पड़ा है भारत का 200000 KG सोना,अब अचानक क्यों मची वापस लाने की होड़ ?
भारत ने विदेशों में क्यों रखा सोना?
विदेशों में सोना रणनीतिक और व्यावहारिक वजहों से रखा जाता है. विदेशों में सोना रखने का मकसद वैश्विक बुलियन मार्केट तक आसान पहुंच, ग्लोबल ट्रेड में लेने-देन की सरलता, विषम परिस्थितियों में सोने की सुरक्षा जैसे कई कारण हैं. युद्ध या हमले की स्थिति में विदेशों में रखा सोना सुरक्षित रहता है. प्रकृतिक आपदा के दौरान भी वो सोना सेफ रहता है.
भारत का कितना सोना अभी भी विदेशों में रखा है?
मार्च 2026 तक भारत का कुल गोल्ड रिजर्व 880.52 मीट्रिक टन था. 680.05 टन सोना भारत में रिजर्व बैंक की तिजोरी में रखा है. मार्च 2025 तक भारत का गोल्ड रिजर्व 879.59 मीट्रिक टन था, जिसमें 511.99 मीट्रिक टन सोना देश में रखा था. यानी मार्च 2025 से लेकर मार्च 2026 के बीच भारत 168 मीट्रिक टन सोना विदेशों से वापस अपने देश ला चुका है. भारत के अलावा फ्रांस (129 टन), जर्मनी, पोलैंड, चेक गणराज्य जैसे देश विदेशों में रखा अपना गोल्ड वापस ला रहे हैं.
तीन सालों में भारत कितना सोना विदेशों से वापस ला चुका है?
रिजर्व बैंक की ओर से सोने की स्वदेश वापसी नई नहीं है. बीते तीन सालों से ये प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है. अगर आंकड़ों की बात करें तो…
- साल 2025-26 में 168.06 मीट्रिक टन सोना
- साल 2024-25 में 107.21 मीट्रिक टन
- साल 2023-24 में 103.68 मीट्रिक टन वापस देश लाया गया है.
कहां-कहां जमा है भारत का सोना ?
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अपना सोना देश वापस ला रहा है, लेकिन अभी भी लगभग 197.67 मीट्रिक टन सोना विदेशों में रखा है. बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के पास है भारत सोना रखा है. अगर इसे आंकड़ों में देखें तो मौजूदा वक्त में…
- भारत में 680 मीट्रिक टन सोना है, जो कुल गोल्ड रिजर्व का 77 फीसदी है.
- बैंक ऑफ इंग्लैंड (BOE) और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पास 197.67 मीट्रिक टन यानी कुल गोल्ड रिजर्व का करीब 22 फीसदी रखा है.
- डिपॉजिट के तौर पर भारत ने 2.8 टन यानी करीब 0.3 फीसदी गोल्ड रखा है.
RBI क्यों धड़ाधड़ विदेशों से वापस ला रहा है अपना सोना ?
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अब विदेशों से अपना सोना वापस ला रहा है, जिसके पीछे कई कारण हैं. जिस तरह से जियो पॉलिटिकल टेंशन बढ़ रहा है, एक के बाद एक युद्ध हो रहे हैं. भारत समेत कई देशों विदेशों में रखा अपना सोना वापस ला रहे हैं. अनिश्चितता के माहौल में भारत अपनी संपत्ति पर नियंत्रण चाहता है. विदेशों में रखे सोने पर फ्रीज होने का खतरा मंडराने के डर से उन्हें देश लाया जा रहा है.
साल 2022 में अमेरिका ने रूस के सोने पर प्रतिबंध लगा दिया था.अफगानिस्तान की संपत्तियों को फ्रीज किया जा चुका है. ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए भारत अपना सोना वापस ला रहा है. जब तनाव बढ़ता है तो विदेशों में रखे सोने पर टैक्स लेना पड़ जाता है. अपना सोना अपनी तिजोरी में रखने से आर्थिक संकट से निपटने में मदद मिलती है. आर्थिक संकट के बीच उसका इस्तेमाल आसानी से और तुरंत किया जा सकता है. सोना सिर्फ संपत्ति नहीं बल्कि रणनीतिक सुरक्षा है, ऐसे में अपना सोना अपने देश में रखना देश की अर्थव्यवस्था को ताकत देता है.
सोना को अब भारत क्यों वापस लाया जा रहा?
RBI का अपने देश में ज्यादा से ज्यादा सोना जमा करने का मौजूदा कदम 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद शुरू हुआ था। इन हमलों के चलते US ने रूस के डॉलर में रखे विदेशी मुद्रा भंडार को फ्रीज कर दिया था, जिससे दुनिया भर के सेंट्रल बैंकों का रुझान डॉलर के अलावा दूसरी विदेशी मुद्राओं में एसेट्स रखने की ओर बढ़ गया। आरबीआई का यह कदम भी अपने सोने को सुरक्षित करने के लिए उठाया जा रहा है।
सोने को वापस देश के वॉल्ट में लाकर, RBI बाहरी जोखिमों जिनमें प्रतिबंध, वित्तीय रुकावटें या भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं के प्रति अपनी संवेदनशीलता को कम कर रहा है। बता दें कि विदेशी तिजोरियों से सोना सिर्फ RBI ही नहीं ला रहा है। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक ऐसा कर रहे हैं। कई देशों ने अपनी वित्तीय संप्रभुता को मजबूत करने और विदेशी कस्टोडियन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए सोने को वापस अपने देश में लाना शुरू कर दिया है.







