नई दिल्ली। RSS प्रमुख मोहन भागवत ने अखिल भारतीय विहार सेवा समूह के 14वें वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लिया. RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, हर खुशी अधूरी रह जाती है. हर आकांक्षा के साथ किसी न किसी तरह का नुकसान जुड़ा होता है. हर निष्ठा किसी न किसी दूसरी अलग निष्ठा से टकराती है. अतिवाद है, संतुलन नहीं है, बीच का रास्ता नहीं है और इसी वजह से दुनिया परेशान है.
उन्होंने कहा, दुनिया जानती है कि आगे का रास्ता भारत से निकलेगा. क्योंकि एक समय करीब 3,000 वर्षों तक भारत ने बिना किसी देश पर विजय हासिल किए, बिना किसी का धर्म परिवर्तन कराए और बिना किसी मुद्दे पर किसी पर हमला किए, दुनिया को सुख और शांति का रास्ता दिखाया. इसीलिए दुनिया को हमसे उम्मीदें हैं.
‘कई जन्मों तक तपस्या करनी पड़ती है’
मोहन भागवत ने कहा, अगर समर्पण किसी नेक और दिव्य लक्ष्य, किसी सुंदर उद्देश्य या किसी पवित्र मकसद के प्रति हो, तो यह व्यक्ति के जीवन को स्वर्ग बना सकता है. आप भाग्यशाली हैं कि आपको ऐसे उद्देश्य के लिए खुद को समर्पित करने का अवसर मिला है. वरना जीवन में ऐसा सार्थक कार्य पाने के लिए कई जन्मों तक तपस्या करनी पड़ती है. शायद आपने अपने किसी पिछले जन्म में भी ऐसा किया होगा.
उन्होंने भारत की ज्ञान की समृद्ध परंपराओं का जिक्र किया, जिनमें वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, भगवद गीता, जैन आगम, त्रिपिटक, गुरु ग्रंथ साहिब और संतों की शिक्षाएं शामिल हैं. उन्होंने कहा, “हमारे देश के पास ज्ञान का एक बहुत बड़ा खजाना है, जिसकी आज दुनिया को जरूरत है. भक्ति की शक्ति से ईश्वर के करीब पहुंचा जा सकता है.” भागवत ने कहा कि इस ज्ञान को आगे बढ़ाने वालों के जीवन और परंपराओं को बचाए रखना न केवल एक धार्मिक जिम्मेदारी है, बल्कि मानवता की सेवा भी है.







