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Home राष्ट्रीय

अंतरराष्ट्रीय संदर्भ, वैश्विक व्यापार चुनौतियां और भारत की रणनीति

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
March 13, 2026
in राष्ट्रीय, विशेष
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भारत का व्यापार
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prahlad sabnaniप्रहलाद सबनानी 


नई दिल्ली : अमेरिका में 20 जनवरी 2025 को डॉनल्ड ट्रम्प ने 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली थी। ट्रम्प के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद से ही पूरी दुनिया में, विशेष रूप आर्थिक क्षेत्र में भारी उथल पुथल दिखाई दी है। ट्रम्प ने “मेक अमेरिका ग्रेट अगेन” – अमेरिका को पुनः महान बनायें – के नारे के साथ यह राष्ट्रपति चुनाव जीता था। अतः उन्होंने अमेरिका को एक बार पुनः विश्व के विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करने का बीड़ा उठाया है।

इस उद्देश्य की प्राप्ति हेतु उन्होंने विभिन्न देशों से अमेरिका को होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर टैरिफ लगाने का निर्णय लेते हुए, इस निर्णय को शीघ ही लागू भी कर दिया। उनका सोचना था कि उनके इस निर्णय से विभिन्न उत्पादों के निर्यातक अमेरिका में इन उत्पादों को निर्यात करने के प्रति निरुत्साहित होकर इन उत्पादों का उत्पादन अमेरिका में ही प्रारम्भ कर देंगे। इस कार्य को यदि धीमे धीमे एवं संरचित रूप से किया जाता तो सम्भव है कि पूरे विश्व में अफरा तफरी जैसा माहौल नहीं बनता। परंतु, ट्रम्प ने कुछ देशों (चीन, आदि) से विभिन्न वस्तुओं के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर 500 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी एवं अन्य देशों को भी लगातार इस प्रकार की धमकी देना प्रारम्भ कर दिया।

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ट्रम्प ने भारत से अमेरिका को होने वाले विभिन्न वस्तुओं के निर्यात पर भी 25 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया एवं 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ यह कहते हुए लगाया कि भारत, रूस से कच्चे तेल का आयात करता है एवं इसे प्रसंस्कृत करने के उपरांत यूरोपीय देशों को पेट्रोल एवं डीजल के रूप में निर्यात करता है। इस प्रक्रिया में ट्रम्प ने यह निष्कर्ष निकाला भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल को खरीदने से रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले को बल मिलता है और भारत इस युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से फंडिंग कर रहा है। इस प्रकार, भारत से अमेरिका को होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर दिनांक 27 अगस्त 2025 से 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया गया है। इससे भारत के पूंजी (शेयर) बाजार में हाहाकर मच गया एवं विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारत से अपने निवेश को निकाल रहे हैं।

ट्रम्प अमेरिका में होने वाले विभिन्न वस्तुओं के आयात पर लगाए गए टैरिफ पर ही नहीं रुके बल्कि अपनी साम्राज्यवादी सोच को पुनः लागू करने के उद्देश्य को भी स्पष्ट रूप से झलका दिया। प्रभुतासम्पन्न देश वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर अमेरिका में लाया गया एवं उन पर अमेरिका में मुकदमा चलाया गया। दरअसल, अमरीका की नजर वेनेजुएला के कच्चे तेल के अपार भंडार पर है। जिस पर अमेरिका अपना कब्जा स्थापित करते हुए इसके उपयोग पर अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। साथ ही, डेनमार्क के नियंत्रण में एक द्वीप, ग्रीनलैंड पर अमेरिका अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहता है। इसी प्रकार की धमकियां, मेक्सिको, क्यूबा, ईरान आदि देशों को भी दी गई हैं।

ट्रम्प के उक्त प्रकार के निर्णयों के चलते अब तो वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के बीच आपसी सम्बंधो पर प्रभाव पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। भारत भी अछूता नहीं रहा है एवं हाल ही के समय में भारत के अमेरिका के साथ सम्बन्धों में कुछ खटास आई है। अन्यथा, कुछ समय पूर्व तक भारत एवं अमेरिका एक दूसरे के रणनीतिक साझेदार माने जाते रहे हैं।

विदेशी व्यापार के मामले में अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा साझीदार रहा है। भारत से अमेरिका को होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्यात के मामले में भी अमेरिका प्रथम स्थान पर हैं। श्री ट्रम्प द्वारा भारत से अमेरिका को होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्यात पर लागू किए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के उपरांत भारत का विदेश व्यापार कुछ हद्द तक विपरीत रूप से प्रभावित हुआ है।

परंतु, भारत ने इस समस्या का हल निकालने की रणनीति पर तुरंत विचार करना प्रारम्भ किया एवं कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते सम्पन्न किए। ताकि, विशेष रूप अमेरिका को होने वाले वस्त्र एवं परिधान, जेम्स एवं ज्वेलरी, समुद्रीय पदार्थ, खिलौना उद्योग एवं चमड़ा उद्योग जैसे श्रम आधारित उद्योगों पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव को तुरंत ही रोका जा सके अथवा कम किया जा सके। अन्यथा, की स्थिति में भारत में बेरोजगारी की समस्या एक ज्वलंत समस्या के रूप खड़ी हो सकती थी।

भारत ने उक्त उत्पादों के निर्यात हेतु रूस, चीन, जापान, आस्ट्रेलिया एवं यूरोपीय यूनियन के 27 सदस्य देशों के रूप में नए बाजार तलाशे एवं इन देशों को उक्त उत्पादों का निर्यात प्रारम्भ किया। वर्ष 2025 में भारत ने विदेशी व्यापार परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों पर गहन वार्ताओं और रणनीतिक अद्यतनों को अंतिम रूप देने का प्रयास किया है।

वर्ष के अंत में, भारत ने यूनाइटेड किगडम, ओमान एवं न्यूजीलैंड के साथ महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौते सम्पन्न किए। इसके साथ ही, अफ्रीकी देशों एवं लैटिन अमेरिकी देशों के साथ भी प्रारम्भिक वार्ताओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। इसका परिणाम यह हुआ है कि नवम्बर एवं दिसम्बर 2025 माह में भारत से विभिन्न वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि दर को बनाए रखने में सफलता मिली है। सितम्बर एवं अक्टोबर 2025 माह में विशेष रूप से अमेरिका को भारत से होने वाले वस्तुओं के निर्यात पर कुछ विपरीत प्रभाव पड़ा था।

27 जनवरी 2026 को तो भारत ने यूरोपीय यूनियन के 27 सदस्य देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देकर इतिहास ही बना डाला है। इस समझौते को “मदर आफ ऑल डील्स” की संज्ञा दी जा रही है। यह मुक्त व्यापार समझौता 18 वर्षों के उपरांत सम्भव हो सका है। अब तो कनाडा के राष्ट्रपति भी मार्च 2026 माह में भारत आने वाले हैं एवं कुछ क्षेत्रों में मुक्त व्यापार समझौते के अंतिम रूप दिए जाने की प्रबल सम्भावना है।

भारत द्वारा विभिन्न देशों के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों का विश्व के अन्य देशों को सकारात्मक संदेश गया है। भारत वसुधैव कुटुम्बकम की भावना के साथ विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते सम्पन्न कर रहा है। इससे, समझौता करने वाले देशों के नागरिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होने की सम्भावनाएं प्रबल हो रही हैं क्योंकि इन देशों में आर्थिक प्रगति के तेज होने के चलते इन देशों में खुशहाली आने की सम्भावनाएं बन रही हैं।

इस दृष्टि से विभिन्न देशों का भारत के प्रति दृष्टिकोण हाल ही के समय में बदला है एवं वे अब भारत की ओर आशाभारी नजरों से देख रहे हैं। भारत एक युवा देश है एवं विभिन्न उत्पादों के लिए भारत एक विशाल बाजार के रूप में विश्व के सामने उपलब्ध है। विशेष रूप से इस धरा के दक्षिणी भाग के देश तो अब भारत के वैश्विक स्तर पर इन देशों का नेतृत्व करने के लिए श्रद्धा के भाव से उम्मीद भारी नजरों से देख रहे हैं।

उक्त वर्णित परिस्थितियों के बीच भारत के सामने भी कुछ समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं। जैसे, अंतरराष्ट्रीय बाजार में डालर की तुलना में भारतीय रुपए की कीमत का लगातार गिरते जाना। एक अमेरिकी डॉलर की तुलना में भारतीय रुपए की क़ीमत 92 रुपए के स्तर को भी पार कर गई है एवं वर्ष 2025 में भारतीय रुपए का लगभग 5 से 6 प्रतिशत के बीच अवमूल्यन हुआ है। दरअसल, यह समस्या, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय पूंजी (शेयर) बाजार से लगातार अपने निवेश को निकालने के चलते खड़ी हुई है। इससे अमेरिकी डॉलर का भारत से बाहर जाने का सिलसिला बढ़ गया है।

इस समस्या के हल हेतु भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की मात्रा को बढ़ाने का प्रयास लगातार कर रहा है। साथ ही, भारत से विभिन्न उत्पादों के निर्यात को भी गति देने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि भारत में अमेरिकी डॉलर के आने की मात्रा में वृद्धि हो। यदि भारत को इन प्रयासों में सफलता मिलती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय रुपए पर दबाव कुछ कम होगा।

ट्रम्प द्वारा हाल ही के समय में लिए गए निर्णयों के चलते वैश्विक स्तर पर प्रारम्भ हुई उथल पुथल को कम करने के लिए आज विश्व के कई देश भारत की ओर ही देख रहे हैं क्योंकि भारत अपने आप को विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाकर इस तरह की समस्याओं का हल निकालने का प्रयास कर रहा है एवं इस कार्य में भारत को कुछ सफलता प्राप्त होती हुई भी दिखाई दे रही है।

भारत के पास युवा शक्ति की बेजोड़ उपलब्धता है, विभिन्न क्षेत्रों में इनके कौशल को विकसित कर, भारत आज पूरे विश्व को श्रमबल उपलब्ध करा सकने की क्षमता रखता है और भारतीय सनातन संस्कृति को “वसुधैव कुटुम्बकम” के भाव के साथ, पूरे विश्व में फैला सकता है ताकि विभिन्न देशों में हो रहे संघर्षों को कम अथवा समाप्त किया जा सके।

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