प्रकाश मेहरा
एग्जीक्यूटिव एडिटर
नई दिल्ली: इजरायल और ईरान के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच, ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को विशेष रूप से भारतीय नागरिकों की निकासी के लिए खोल दिया है। इस कदम के तहत, ईरान की राष्ट्रीय एयरलाइन महान एयर के तीन चार्टर्ड विमानों के जरिए करीब 1000 भारतीय छात्रों को दिल्ली लाया जा रहा है। यह कदम भारत की कूटनीतिक पहल और ईरान के सहयोग का परिणाम है, जिसे भारत सरकार की ऑपरेशन सिंधु योजना के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
पहली उड़ान आज रात दिल्ली में
पहला विमान, जिसमें सैकड़ों भारतीय छात्र सवार हैं, 20 जून को रात 11 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेगा। दो अन्य उड़ानें शनिवार (21 जून 2025) को सुबह और शाम को दिल्ली पहुँचेंगी। ये उड़ानें मशहद (Mashhad) से दिल्ली के लिए संचालित की जा रही हैं।
भारत सरकार ने इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए ऑपरेशन सिंधु शुरू किया है। इसके तहत पहले ही 110 भारतीय छात्रों (जिनमें 90 कश्मीरी शामिल हैं) को 17 जून को तेहरान से आर्मेनिया के येरेवन (Yerevan) ले जाया गया था, जहाँ से वे 19 जून को दिल्ली पहुँचे। अब ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को खोलकर भारतीय छात्रों की सीधी निकासी की सुविधा प्रदान की है।
ईरान का सहयोग
ईरान की सरकार ने भारत के साथ मिलकर निकासी प्रक्रिया को तेज किया है। ईरान के दूतावास के उप-प्रमुख जावेद होसैनी ने कहा, “हम भारत के साथ निकासी में सहयोग कर रहे हैं। भारतीय नागरिकों को पहले सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया और अब उनकी वापसी के लिए व्यवस्था की गई है।” ईरान ने केवल भारत के लिए अपने हवाई क्षेत्र को खोलने की घोषणा की, जो दोनों देशों के बीच मजबूत कूटनीतिक संबंधों को दर्शाता है।
क्या हैं स्थिति और चुनौतियाँ
इजरायल के “ऑपरेशन राइजिंग लायन” के तहत 13 जून 2025 से शुरू हुए हमलों ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया, जिसके बाद ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया था। इस संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ, और एयर इंडिया सहित कई एयरलाइनों को अपनी उड़ानें रद्द करनी पड़ीं या मार्ग बदलना पड़ा। भारतीय छात्रों को पहले तेहरान और अन्य प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया, क्योंकि मिसाइल हमलों और बमबारी ने निकासी को जोखिम भरा बना दिया था।
तेहरान में भारतीय दूतावास ने छात्रों और अन्य भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर (+98 9128109115, +98 9128109109) जारी किए हैं और भारतीय नागरिकों से स्थानीय अधिकारियों के सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करने की अपील की है।
उड़ानें संचालित करना मुश्किल
इजरायल ने ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिसमें कई प्रमुख वैज्ञानिक और सैन्य कमांडर मारे गए हैं। जवाब में, ईरान ने “ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस III” के तहत इजरायल पर सैकड़ों बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलें दागीं, जिससे तेल अवीव और अन्य शहरों में भारी तबाही हुई। इस संघर्ष ने मध्य पूर्व के हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है, जिससे निकासी और उड़ानें संचालित करना मुश्किल हो गया है।
भारत की कूटनीति
भारत ने इस संकट में तटस्थ रुख अपनाया है और शांति व संवाद की अपील की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि “वह स्थिति पर नजर रख रहा है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के इजरायली हमलों की निंदा वाले बयान से खुद को अलग कर लिया, जो उसकी संतुलित कूटनीति को दर्शाता है।
करीब 10,000 भारतीय नागरिक ईरान में हैं, जिनमें 1,500-2,000 छात्र शामिल हैं। इनमें से 1,000 को आज और कल दिल्ली लाया जा रहा है। हवाई क्षेत्र की स्थिति: ईरान ने विशेष रूप से भारतीय उड़ानों के लिए हवाई क्षेत्र खोला है, लेकिन सामान्य वाणिज्यिक उड़ानें अभी भी बंद हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात की थी, जिसके बाद कश्मीरी छात्रों की निकासी को प्राथमिकता दी गई।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित
इजरायल-ईरान युद्ध के बीच ईरान का अपने हवाई क्षेत्र को भारत के लिए खोलना एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों को दर्शाता है। ऑपरेशन सिंधु के तहत 1000 भारतीय छात्रों की दिल्ली वापसी आज रात से शुरू हो रही है, और यह प्रक्रिया शनिवार तक जारी रहेगी। भारत सरकार और ईरान का सहयोग इस संकट में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा रहा है।







