नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बैठक आयोजित करने का उद्देश्य केवल औपचारिक चर्चा करना नहीं, बल्कि क्षेत्र की जमीनी हकीकत और अग्रिम इलाकों की वास्तविक परिस्थितियों को करीब से समझना भी है. राजनाथ सिंह ने कहा कि आज ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है. ऐसे में भारतीय सेनाओं को वर्तमान के साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए भी तैयार रखना आवश्यक है.
स्वर्णनगरी जैसलमेर के होटल फोर्ट रजवाड़ा में मंगलवार को रक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति की बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के अलावा समिति के कई सदस्य और अन्य अधिकारी एवं संबंधित लोगों ने हिस्सा लिया. बैठक का मुख्य विषय भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण है. इस दौरान देश की रक्षा तैयारियों, आधुनिक युद्ध तकनीक, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, सैन्य क्षमताओं और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को लेकर विस्तार से चर्चा की जा रही है.
सीमावर्ती क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति समझने का अवसर : बैठक में रक्षा मंत्री ने कहा कि संसद सत्र के दौरान संसदीय समिति की बैठक के लिए समय निकालना काफी मुश्किल होता है. कई बार एक घंटे की बैठक करना भी कठिन हो जाता है. ऐसे में संसद सत्र से बाहर इस तरह की बैठकों से सभी सदस्यों को आपस में बातचीत और विचार-विमर्श के लिए पर्याप्त समय मिलता है.
उन्होंने कहा कि जैसलमेर जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में बैठक आयोजित करने से क्षेत्र की जमीनी वास्तविकताओं और अग्रिम इलाकों की स्थिति से भी अवगत होने का अवसर मिलता है. समिति के सदस्यों के सुझावों के अनुसार ही इस क्षेत्र का चयन कर बैठक आयोजित की गई है. उन्होंने कहा कि परामर्शदात्री समिति की बैठकों में सदस्यों की ओर से दिए जाने वाले सुझाव सभी के लिए काफी उपयोगी और फायदेमंद साबित होते हैं.
बदलते वैश्विक हालात में सेना का आधुनिकीकरण जरूरी : राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण आज के वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में बेहद प्रासंगिक विषय है. दुनिया में तेजी से हो रहे भू-राजनीतिक बदलाव भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को भी प्रभावित कर रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध और इजराइल-ईरान संघर्ष जैसी घटनाओं ने आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति और नई चुनौतियों को सामने रखा है.
रक्षा बजट और पूंजीगत खरीद पर सरकार का फोकस : रक्षा मंत्री ने आधुनिकीकरण के तीन प्रमुख आयामों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें रक्षा बजट एवं पूंजीगत खरीद सबसे महत्वपूर्ण है. सेना के आधुनिकीकरण के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने रक्षा आधुनिकीकरण के बजट में लगातार वृद्धि की है. उन्होंने कहा कि सरकार केवल बजट बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रही है कि उपलब्ध बजट का प्रभावी तरीके से उपयोग हो और सेनाओं की आवश्यकताओं के अनुरूप महत्वपूर्ण उपकरणों एवं संसाधनों की खरीद की जा सके.
रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ से अधिक पहुंचा : राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 में देश का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपए था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गया है. इसी तरह रक्षा निर्यात भी वर्ष 2014 में दो हजार करोड़ रुपए से कम था, जो अब बढ़कर लगभग 40 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक रक्षा उत्पादन को तीन लाख करोड़ रुपए और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचाने का है. उन्हें विश्वास है कि देश का रक्षा निर्यात निर्धारित लक्ष्य से भी आगे जाएगा.
आधुनिक तकनीक में निजी क्षेत्र की बढ़ रही भागीदारी : रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक युद्ध में तकनीक अभिन्न अंग बन चुकी है. डीआरडीओ की ओर से नई योजनाएं शुरू की जा रही हैं तथा नए हथियारों, मिसाइलों और रक्षा प्रणालियों का परीक्षण किया जा रहा है. सरकार ने निजी क्षेत्र को भी रक्षा उत्पादन में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया है. एमएसएमई से लेकर बड़ी कंपनियां तक रक्षा क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं. उन्होंने कहा कि अब सरकारी कार्यक्रमों के साथ निजी क्षेत्र के कार्यक्रमों में भी भागीदारी बढ़ी है. निजी रक्षा उद्योगों का काम देखकर गर्व की अनुभूति होती है. देश की कंपनियां रक्षा क्षेत्र में बेहतर काम कर रही हैं.
सेना के संगठनात्मक ढांचे में भी किए जा रहे सुधार : आधुनिकीकरण के तीसरे महत्वपूर्ण आयाम मानव संसाधन और सैन्य संगठनात्मक ढांचे पर चर्चा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध में सफलता हासिल करने की सबसे बड़ी ताकत आज भी मानव संसाधन है. युद्ध लड़ने के तरीकों में तेजी से बदलाव हो रहा है. ऐसे में तीनों सेनाओं के संगठनात्मक ढांचे और फॉर्मेशन को भी आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा रहा है. उन्होंने भारतीय सेना में असनी, भैरव और शक्तिबाण जैसी नई फॉर्मेशन्स का उल्लेख करते हुए कहा कि ये बदलती परिचालन आवश्यकताओं और युद्ध परिस्थितियों के अनुरूप उपयोगी साबित हो रही हैं.
आत्मनिर्भर रक्षा इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर : रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिकीकरण का अर्थ केवल नए हथियार और उपकरण खरीदना नहीं है, बल्कि सेनाओं की परिचालन तैयारियों को मजबूत करना, उन्हें आधुनिक तकनीक से सुसज्जित करना और देश में ऐसी क्षमताएं विकसित करना है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक स्वायत्तता और स्वदेशी तकनीकी क्षमता बेहद जरूरी है. सरकार का उद्देश्य ऐसा रक्षा इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें भारतीय उद्योगों की भागीदारी लगातार बढ़े और रक्षा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम हो.







