नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन नए क्रिमिनल लॉ बिल पर चर्चा की। इन तीनों बिलों को लोकसभा में पास कर दिया गया है। प्रस्तावित कानूनों के मुताबिक मॉब लिंचिंग के अपराध के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। तो वहीं देश के खिलाफ बोलना देशद्रोह होगा। वहीं राजद्रोह को खत्म कर दिया गया है।
बता दें कि, भारतीय न्याय संहिता विधेयक 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 पहली बार मानसून सत्र के दौरान संसद में पेश किए गए थे।
मॉब लिंचिंग पर नया क्या
- नस्ल, जाति, समुदाय के आधार पर की गई हत्या संबंधित अपराध का नया प्रावधान जोड़ा गया है।
- मॉल लिंचिंग की घटनाओं में आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड की सजा का भी प्रावधान है।
तस्करी को लेकर नए कानून में
- नई न्याय सहिंता में सरकार ने तस्करी कानूनों को जेंडर-न्यूट्रल बना दिया है।
राजद्रोह कानून खत्म
- राजद्रोह कानून को पूरी तरह से निरस्त किया गया है।
- मृत्युदंड की सजा को भी आजीवन कारावास में बदला जा सकेगा।
- आजीवन कारावास को 7 साल तक की सजा में बदला जा सकेगा।
महिला अपराध पर
- गैंग रेप के मामलों में अब 20 साल की सजा का या आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान।
- 18 साल से कम आयु की बच्चियों के मामले में आजीवन कारावास और मौत की सजा।
- झूठे वादे या पहचान छुपाकर यौन संबंध बनाना अब अपराध की श्रेणी में आएगा।
- यौन हिंसा मामलों में बयान महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट ही रिकॉर्ड करेगी।
- पीड़िता का बयान उसके आवास पर महिला अधिकारी के सामने दर्ज करना होगा।
- बयान रिकॉर्ड करते समय पीड़िता के माता-पिता या अभिभावक साथ रह सकते हैं।
टेक्नोलॉजी पर नया कानून
- एफआईआर से लेकर जजमेंट तक सब कुछ डिजिटलाइज होगा
- जांच-पड़ताल से लेकर मुकदमे के साक्ष्यों तक की होगी रिकार्डिंग
- पुलिस द्वारा सर्च और जब्ती की कार्यवाही में होगा टेक्नोलॉजी का उपयोग
- इलेक्ट्रॉनिक या किसी भी तरह का डिजिटल रिकॉर्ड दस्तावेज माना जाएगा
फॉरेंसिक पर नया क्या?
- 7 वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले सभी अपराधों में फोरेंसिक अनिवार्य।
- सभी राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों में फोरेंसिक का इस्तेमाल होगा जरूरी।
- 5 वर्ष के भीतर राज्यों / संघ राज्य क्षेत्रों में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर होगा तैयार।
नागरिक सुविधा को लेकर नए कानून में
- किसी भी थाने में दर्ज हो सकेगी ‘जीरो एफआईआर’।
- ई- एफआईआर के लिए जोड़े गए नए प्रावधान।
- 90 दिन में पुलिस अधिकारी को देनी होगी जांच की प्रगति की सूचना।
घोषित अपराधियों पर चलेगा सख्त कानूनी हंटर
- 10 वर्ष या उससे अधिक, आजीवन एवं मृत्युदंड के दोषी अब प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित किए जा सकेंगे।
- घोषित अपराधियों की भारत से बाहर की संपत्ति को जब्त करने के लिए लाया गया नया प्रावधान।
संगठित अपराध के खिलाफ नए प्रावधान
- संगठित अपराध से संबंधित नई दांडिक धारा जोड़ी गई
- सिंडिकेट की विधिविरुद्ध गतिविधि को बनाया गया दंडनीय
- भारत की एकता और अखंडता के खिलाफ कृत्य को नए प्रावधानों को जोड़ा गया
- 80 सशस्त्र विद्रोह, विध्वंसक कृत्यों, अलगाववादी गतिविधियों को इसमें शामिल किया गया
कानूनों में कई अहम सुधार
- अब आरोपी को बरी करने के लिए याचिका दायर करने के लिए सात दिन मिलेंगे… जज को उन सात दिनों में और अधिकतम 120 दिनों में मामले की सुनवाई करनी होगी सुनवाई होगी।
- पहले प्ली बार्गेनिंग के लिए कोई समय सीमा नहीं थी। अब अगर कोई अपराध के 30 दिनों के भीतर अपना अपराध स्वीकार कर लेता है तो सजा कम होगी।
- सुनवाई के दौरान दस्तावेज पेश करने का कोई प्रावधान नहीं था। अब 30 दिनों के भीतर सभी दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य है। इसमें कोई देरी नहीं की जाएगी।
- छोटे-मोटे अपराधिक मामलों में समरी ट्रायल से लाई जाएगी तेजी
- चोरी-चकारी, आपराधिक धमकी जैसे मामलों में समरी ट्रायल होगा जरुरी
- 3 साल तक की सजा वाले मामलों में मजिस्ट्रेट कर सकते हैं समरी ट्रायल
- ट्रायल इन एब्सेंटिया का प्रावधान लाया गया है। (वे लोग जो दूसरे देशों में छुपे हुए हैं और ट्रायल कर रहे हैं।) उन्हें अब यहां आने की जरूरत नहीं है। अगर वे 90 दिनों के भीतर अदालत में पेश नहीं होते हैं तो उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलेगा… उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए एक सरकारी वकील नियुक्त किया जाएगा।







