Upgrade
पहल टाइम्स
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन
No Result
View All Result
पहल टाइम्स
No Result
View All Result
  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • ईमैगजीन
Home राज्य

जोशीमठ : पर्यावरण बनाम विकास

पहल टाइम्स डेस्क by पहल टाइम्स डेस्क
January 20, 2023
in राज्य, विशेष
A A
Joshimath disaster
23
SHARES
754
VIEWS
Share on FacebookShare on Whatsapp

विनीत नारायण


उत्तराखंड में भगवान श्रीबद्रीविशाल के शरदकालीन पूजा स्थल और आदि शंकराचार्य की तपस्थली ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) नगर में विगत महीने से जो बड़ी लंबी-लंबी दरारें आ गई, वे निरंतर गहरी व लंबी होती जा रही हैं। वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और धार्मिंक लोगों के अनुसार, बेतरतीब ढंग से हुए ‘विकास’ और हर वर्ष बढ़ते पर्यटकों के सैलाब को इसका कारण माना जा सकता है।

इन्हें भी पढ़े

cyber india digital

साइबर सुरक्षा में उत्तराखंड देश के टाॅप पांच राज्यों में शामिल!

August 8, 2026
cm dhami

उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, पुरुषों व महिलाओं को अब समान काम के लिए समान वेतन

August 8, 2026
Mohan Bhagwat

युवाओं के सवालों से संवाद तक: मोहन भागवत ने बताया Gen-Z को समझने का रास्ता

August 8, 2026
Rishabh Pant

ऋषभ पंत ने उत्तराखंड में जमीन खरीदने को लेकर CM धामी से मांगी मदद, मुख्यमंत्री ने दिया भरोसा

August 8, 2026
Load More

जोशीमठ नगर बद्रीनाथ धाम से 45 किमी. पहले ही अलकनंदा नदी के किनारे वाले ऊंचे तेज ढलान वाले पहाड़ पर स्थित है। यहां पर फौजी छावनी और नागरिक मिलाकर 50,000 के लगभग निवासी रहते हैं। साल के छह महीने की गर्मिंयों के दौरान यह संख्या पर्यटकों के कारण दुगुनी हो जाती है। बद्रीनाथ धाम में दशर्नार्थी तो आते ही हैं, साथ ही विश्व प्रसिद्ध औली जाने वाले पर्यटक भी आते हैं। औली  बद्रीनाथ से करीब 50 किमी. दूर है। जोशीमठ से 4 किमी. पैदल चढ़ कर औली पहुंचा जा सकता है। इसलिए औली जाने वाले ज्यादातर पर्यटक भी रात्रि विश्राम जोशीमठ में ही करते हैं। यहां से बद्रीनाथ धाम जाने के लिए 12 किमी. नीचे की ओर विष्णुगंगा और अलकनंदा के मिलन विष्णु प्रयाग तक उतरना पड़ता है, जहां विष्णु प्रयाग जलविद्युत परियोजना (जेपी ग्रुप) का निर्माण कार्य चल रहा है। यहां बिजली बनाने के लिए बड़ी-बड़ी सुरंग कई वर्षो से बनाई जा रही हैं, जिनमें से अधिकांश बन चुकी हैं। जोशीमठ के नीचे दरकने और दरारें आने की मुख्य वजह ये सुरंगें बताई जा रही हैं क्योंकि बारूद से विस्फोट करके ही इन्हें बनाया जाता है। इस कारण पहाड़ में दरारें आना स्वभाविक है।

यह कार्य चार दशकों से पूरे हिमालय विशेषकर गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र में हो रहा है। बिजली बनाने के लिए कई सौ परियोजनाएं यहां चल रही हैं। मैदानों को दी जाने वाली बिजली बनाने के लिए कई दशकों से यहां अंधाधुंध व बेतरतीब ढंग से हिमालय में सुरंगों, सडक़ों और पुलों का निर्माण जारी है, जिससे यहां की वन संपदा आधी रह गई है। अयोध्या से जुड़े राम भक्त संदीप जी द्वारा साझी की गई जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड स्थित बद्री, केदार, यमुनोत्री व गंगोत्री धामों के दशर्न करके इसी जन्म में मोक्ष पाने की सस्ती लालसा के पिपासुओं की भीड़ और नवधनाढ्यों की पहाड़ों में मौज मस्ती भी यहां प्राकृतिक संसाधनों पर भारी पड़ी है। इस कारण समूचा गढ़वाल हिमालय क्षेत्र तेजी से नष्ट हो रहा है जबकि यह देवात्मा हिमालय का सर्वाधिक पवित्र क्षेत्र माना जाता है। इसकी भौगोलिक स्थिति का स्कंध पुराण में भी विस्तृत वर्णन मिलता है।

यहां कदम-कदम, मोड़-मोड़ पर प्राचीन ऋषि मुनियों के आश्रम और पौराणिक देवस्थान स्थित हैं। इन्हीं पर्वतों से गंगा व यमुना जैसी असंख्य पवित्र नदियां निकली हैं। ऐसे परम पवित्र पावन रमणीक हरे-भरे प्रदेश का पर्यावरणविद् के सतत विरोध के बावजूद बिजली बनाने और पर्यटन के लिए वर्तमान बीजेपी सरकार सहित सभी पूर्ववर्ती सरकारों ने खूब दोहन किया है। इस कारण केदारनाथ त्रासदी जैसी घटनाएं घटित हो चुकी हैं, और आगे और भी भयावह विनाश की खबरें आएंगी क्योंकि जब देवताओं की निवास स्थली देवभूमि हिमालय मी पर्यटन के नाम पर अंडा, मांस, मदिरा का व्यापक प्रयोग और न जाने कैसे-कैसे अपराध मनुष्य करेगा तो देवता तो रुष्ट होंगे ही। हर वर्ष गर्मिंयों में उत्तराखंड दशर्न और सैरसपाटे के लिए घुमक्कड़ों की भीड़ इस कदर होती है कि पहाड़ों में गाडिय़ों का कई किमी. तक लंबा जाम लग जाता है। पर्यटकों के कारण यहां का पारिस्थितिकी तंत्र चरमरा जाता है। हर शहर और गांव में बढ़ती भीड़ के लिए होटल और गेस्ट हाउसों की बाढ़ आई हुई है। प्रश्न है कि मैदानों की बिजली की मांग तो निरंतर बढ़ती जाएगी तो इसका खमियाजा पहाड़ क्यों भरे? सरकारों को अन्य विकल्प तलाशने होंगे। क्यों न यहां भी बढ़ती भीड़ के लिए कश्मीर घाटी के पवित्र अमरनाथ धाम के दशर्न की ही तरह दशर्नार्थियों को सीमित मात्रा में परमिट देने का सिस्टम विकसित किया जाए?

इस विषय में सबसे खास बात है कि सरकार समूचे हिमालय क्षेत्र के लिए खास दीर्घकालीन योजना बनाई जाए जिसमें देश के जाने-माने पर्यावरणविद्, इंजीनियरों और वैज्ञानिकों के अनुभवों और सलाहों को खास तवज्जो दी जाए। तभी हिमालय का पारिस्थितिकी तंत्र संभलेगा वरना तो केदारनाथ त्रासदी और अभी हाल की जोशीमठ जैसी घटनाएं निरंतर और विकराल रूप में आएंगी ही आएंगी। दिल्ली विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त प्रोफेसर और वर्तमान में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के एमिरेट्स साइंटिस्ट प्रो. धीरज मोहन बैनर्जी के अनुसार, ‘कई साल पहले भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने एक जांच की थी। वह रिपोर्ट भी बोलती है कि यह क्षेत्र कितना अस्थिर है। भले ही सरकार ने वैज्ञानिकों या शिक्षाविद् को गंभीरता से नहीं लिया, कम से कम उसे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट पर तो ध्यान देना ही चाहिए था। इस क्षेत्र में बेतरतीब ‘विकास’ के नाम पर हो रहे सभी निर्माण कार्यों पर रोक लगनी चाहिए।’

चिंता की बात यह है कि सरकार चाहे यूपीए की हो या एनडीए की वो कभी पर्यावरणवादियों की सलाह को महत्त्व नहीं देती। पर्यावरण के नाम पर मंत्रालय, एनजीटी और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सब कागजी खानापूरी करने के लिए हैं। कॉरपोरेट घरानों के प्रभाव में और उनकी हवस को पूरा करने के लिए सारे नियम और कानून ताक पर रख दिए जाते हैं। पहाड़ हों, जंगल हों, नदी हों या समुद्र का तटीय प्रदेश, हर ओर विनाश का यह तांडव जारी है। नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा शुरू किया गया उत्तराखंड के चार धाम को जोडऩे वाली सडक़ों का प्रस्तावित चौड़ीकरण भविष्य में इससे भी भयंकर त्रासदी लाएगा। पर क्या कोई सुनेगा? देवताओं के कोप से बचाने वाले खुद देवता ही हैं। वो हमारी साधना से खुश होकर हमें बहुत कुछ देते भी हैं, और कुपित होकर बहुत कुछ ले भी लेते हैं। संदीप जी जैसे भक्तों, प्रोफेसर बनर्जी जैसे वैज्ञानिकों, भौगोलिक विशेषज्ञों और सारे जोशीमठवासियों की पीड़ा हम सबकी पीड़ा है। इसलिए ऐसे संकट में सभी को एकजुट हो कर  समस्या का हल निकालना चाहिए।

इन्हें भी पढ़ें

  • All
  • विशेष
  • लाइफस्टाइल
  • खेल
cbse 10th board result

सीबीएसई 10वीं बोर्ड रिजल्ट 2025: 93.66% छात्रों ने मारी बाजी, रिजल्ट लिंक यहां !

May 13, 2025
Grand Hindu conferences

हिन्दू समाज की एकता, संस्कृति और आत्मगौरव के लिए नोएडा में भव्य हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन

January 12, 2026
officers

राजनीतिक दलों को आखिर क्यों पसंद आते हैं अधिकारी?

October 26, 2023
पहल टाइम्स

पहल टाइम्स का संचालन पहल मीडिया ग्रुप्स के द्वारा किया जा रहा है. पहल टाइम्स का प्रयास समाज के लिए उपयोगी खबरों के प्रसार का रहा है. पहल गुप्स के समूह संपादक शूरबीर सिंह नेगी है.

Learn more

पहल टाइम्स कार्यालय

प्रधान संपादकः- शूरवीर सिंह नेगी

9-सी, मोहम्मदपुर, आरके पुरम नई दिल्ली

फोन नं-  +91 11 46678331

मोबाइल- + 91 9910877052

ईमेल- pahaltimes@gmail.com

Categories

  • Uncategorized
  • खाना खजाना
  • खेल
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • दिल्ली
  • धर्म
  • फैशन
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • राजनीति
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • लाइफस्टाइल
  • विशेष
  • विश्व
  • व्यापार
  • साक्षात्कार
  • सामाजिक कार्य
  • स्वास्थ्य

Recent Posts

  • छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी में भारत!
  • साइबर सुरक्षा में उत्तराखंड देश के टाॅप पांच राज्यों में शामिल!
  • उत्तराखंड सरकार का बड़ा फैसला, पुरुषों व महिलाओं को अब समान काम के लिए समान वेतन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.

  • होम
  • दिल्ली
  • राज्य
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • धर्म
  • व्यापार
  • खेल
  • मनोरंजन
  • गैजेट्स
  • जुर्म
  • लाइफस्टाइल
    • स्वास्थ्य
    • फैशन
    • यात्रा
  • विशेष
    • साक्षात्कार
  • ईमैगजीन

© 2021 पहल टाइम्स - देश-दुनिया की संपूर्ण खबरें सिर्फ यहां.