नई दिल्ली: केंद्र सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने ‘कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026’ को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है। सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत यह नई योजना 29 जून 2026 से पूरे देश में लागू हो चुकी है, जिस दिन इसे भारत के राजपत्र में प्रकाशित किया गया था।
इस नई योजना ने करीब छह दशक पुरानी ‘ईपीएफ योजना, 1952’ को पूरी तरह से बदल दिया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि आपके पीएफ का मुख्य ढांचा और फायदे पहले जैसे ही रहेंगे, लेकिन डिजिटल कंप्लायंस और गवर्नेंस को काफी आधुनिक बना दिया गया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इस बड़े बदलाव का आप पर क्या असर पड़ेगा।
क्या नहीं बदला?
पीएफ कटौती की दर
- नौकरीपेशा लोगों की हर महीने होने वाली पीएफ कटौती में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
- कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अनिवार्य योगदान पहले की तरह ही वेतन का 12-12 प्रतिशत बना रहेगा।
- सरकार द्वारा अधिसूचित कुछ खास कंपनियों या संस्थानों के लिए 10 प्रतिशत की योगदान दर भी पहले की तरह जारी रहेगी।
- अनिवार्य पीएफ योगदान पहले की तरह ही केंद्र सरकार द्वारा तय वैधानिक वेतन सीमा से लिंक रहेगा।
UAN नंबर रहेगा परमानेंट
आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) पहले की तरह ही आपकी स्थायी पहचान बना रहेगा। नौकरी बदलने पर भी आपका पीएफ अकाउंट आसानी से पोर्टेबल रहेगा। यदि कोई कर्मचारी पोर्टल पर खुद यूएन जेनरेट नहीं कर पाता है, तो यह जिम्मेदारी कंपनी की होगी कि वह उसका UAN जेनरेट करवाए।
पुरानी मेंबरशिप और बैलेंस सुरक्षित
इस बदलाव से मौजूदा पीएफ खाताधारकों पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। जो लोग ईपीएफ योजना 1952 के तहत सदस्य थे, वे ऑटोमैटिक रूप से ईपीएफ योजना 2026 के सदस्य बन जाएंगे। आपका पुराना बैलेंस और रिटायरमेंट सेविंग्स पूरी तरह सुरक्षित और जारी रहेंगी।
क्या बदला? इन नए नियमों को जानना है जरूरी
VPF में अधिक लचीलापन
नए नियम के तहत कर्मचारियों को वैधानिक सीमा से अधिक स्वैच्छिक प्रोविडेंट फंड (VPF) में योगदान करने की अधिक छूट और लचीलापन मिलेगा। कंपनियां चाहें तो कर्मचारी के इस अतिरिक्त योगदान के बराबर का हिस्सा डाल सकती हैं, लेकिन उनके लिए ऐसा करना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं होगा।
प्राइवेट पीएफ ट्रस्ट के लिए कड़े नियम
जो बड़ी कंपनियां अपना खुद का इन-हाउस पीएफ ट्रस्ट चलाती हैं जिन्हें ईपीएफओ से छूट प्राप्त है, उनके लिए नियम बेहद सख्त कर दिए गए हैं:
इन ट्रस्टों के लिए अब पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा।
- कर्मचारियों को ऑनलाइन बैलेंस चेक करने की सुविधा और सालाना अकाउंट स्टेटमेंट डिजिटली देना होगा।
- पीएफ निकासी, ट्रांसफर और एडवांस के दावों का निपटारा तय समय सीमा के भीतर ऑनलाइन और डिजिटल तरीके से करना अनिवार्य कर दिया गया है।
नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए इसका क्या मतलब है?
आम सैलरीड कर्मचारियों के लिए इस नोटिफिकेशन का मतलब यह है कि उनकी जेब से कटने वाले पीएफ की रकम में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। सरकार का पूरा फोकस पीएफ सिस्टम को मॉडर्न और डिजिटल बनाना है। इससे पीएफ अकाउंट का मैनेजमेंट बेहद आसान हो जाएगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और क्लेम सेटलमेंट की प्रक्रिया में होने वाली देरी से मुक्ति मिलेगी।







