नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बल केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में निचले स्तर के जवानों के बीच लंबे समय से जारी प्रमोशन के ठहराव को खत्म करने और भारतीय सेना से रिटायर होने वाले पूर्व अग्निवीरों को फोर्स में शामिल करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक प्रशासनिक कदम उठाया जा रहा है।
CRPF मुख्यालय ने लगभग 30 सालों के अंतराल के बाद सैन्य तर्ज पर ‘लांस नायक’ और ‘नायक’ की मिड रैंकों को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया है। फोर्स के शीर्ष नेतृत्व ने देशभर में तैनात अपनी फील्ड यूनिट को 2 दिन के भीतर ‘सैनिक सम्मेलन’ कर जवानों और अधिकारियों से इस प्रस्ताव पर फीडबैक भेजने का निर्देश दिया है।
1997 में क्यों समाप्त की गई थीं ये रैंक?
10 अक्टूबर 1997 को गृह मंत्रालयके एक आदेश द्वारा CRPF और सीमा सुरक्षा बल (BSF) में लागू ‘लांस नायक’ और ‘नायक’ की सैन्य रैंकों को समाप्त कर दिया गया था।
उस समय ग्रेड और सैलरी रिस्ट्रक्चर के सरलीकरण के तहत ‘लांस नायक’ के पद को कांस्टेबल और ‘नायक’ के पद को हेड कांस्टेबल में मिला दिया गया था।
वर्तमान में लगभग 3.25 लाख जवानों वाले CRPF में कांस्टेबल को ‘हेड कांस्टेबल’ बनने में औसतन 22 से 25 साल का लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे जवानों के मनोबल पर सीधा असर पड़ रहा था।
प्रस्तावित समय-बद्ध प्रमोशन स्ट्रक्चर
प्रस्तावित योजना के तहत कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल के बीच दो नए प्रमोशन सोपान जोड़े जाएंगे, जिससे जवानों को समयबद्ध प्रमोशन मिल सकेगा।
पूर्व अग्निवीरों के लिए आकर्षण और तालमेल
इस कदम को केंद्र सरकार की उस नीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके तहत अग्निवीरों के पहले बैच का 4 साल का कार्यकाल इस साल पूरा हो रहा है।
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सेना से 4 साल की सेवा के बाद CAPF में भर्ती होने वाले अग्निवीरों को वही रैंक स्ट्रक्चर मिलेगा, जिससे उनका तालमेल बेहतर रहेगा।
गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ भर्तियों में पूर्व अग्निवीरों को 10% आरक्षण, ऊपरी आयु सीमा में 3 से 5 साल की छूट और फिजिकल टेस्ट से पूरी तरह छूट दी है।
इसके अलावा, CRPF की समर्पित ‘एक्स-अग्निवीर बटालियन’ में 50% पद पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षित रखे गए हैं।
पूर्व कर्मियों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा कि यह कदम तभी सार्थक साबित होगा जब जवानों को वास्तव में समय-बद्ध वित्तीय लाभ और प्रमोशन मिले, अन्यथा यह केवल पद का नाम बदलने जैसा अभ्यास बनकर रह जाएगा।
सीनियर कमांडेंट्स का मानना है कि 1,000 से अधिक कर्मियों वाली बटालियन में पदानुक्रम और अनुशासन को बनाए रखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस बदलाव से यूनिट की परिचालन दक्षता और कमांड स्ट्रक्चर पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
फील्ड स्तर की बैठकों से मिले सुझावों को सेक्टर मुख्यालयों में समेकित कर गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा, जिसके बाद इस पर अंतिम मुहर लगेगी।







